पंजाब की AAP सरकार आर्थिक मजबूरी में केंद्र की योजनाएं लागू कर रही: बांसुरी स्वराज का हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद बांसुरी स्वराज ने 1 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब सरकार पर तीखा प्रहार किया। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते राज्य को कर्ज के गर्त में धकेला, और अब आर्थिक व प्रशासनिक दबाव में आकर वही केंद्रीय जनकल्याण योजनाएं लागू करने को विवश है, जिनका वह पहले खुलकर विरोध करती थी।
मुख्य आरोप: पहले विरोध, अब मजबूरी में अनुपालन
बांसुरी स्वराज ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने शुरुआत में केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं की आलोचना की और जनता को उनके विरुद्ध भ्रमित करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, अब वही सरकार उन्हीं योजनाओं को लागू करने पर मजबूर है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार का कोई बड़ा फैसला नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक और प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।' साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब योजना जनहित में थी, तो पहले उसका विरोध क्यों किया गया।
विधानसभा को 'राजनीतिक नौटंकी का मंच' बताया
BJP सांसद ने आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा को जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा का मंच बनाने के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन की जगह बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि AAP सरकार अपने ही पारित प्रस्तावों पर कायम नहीं रह सकी, जिससे जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
तेलंगाना CM के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया
बांसुरी स्वराज ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के उस बयान की भी निंदा की, जिसमें उन्होंने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने इसे 'सत्ता के अहंकार में दिया गया बेहद निंदनीय बयान' करार दिया। उन्होंने नितिन नवीन को एक अनुभवी और संगठन को मजबूत करने वाले नेता बताया।
कांग्रेस की भाषा पर सवाल
स्वराज ने कहा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा BJP नेताओं के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है — यह कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक सोच को दर्शाता है। उनके अनुसार, ऐतिहासिक रूप से भी कांग्रेस नेताओं ने अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति ऐसी ही भाषा अपनाई है।
BJP का रुख: संगठन और मर्यादा पर जोर
बांसुरी स्वराज ने विश्वास जताया कि BJP इस तरह के बयानों से विचलित नहीं होगी और जनता के बीच अपने संगठन व विचारधारा को और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, किंतु सार्वजनिक जीवन में गरिमा और मर्यादा बनाए रखना हर नेता की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है।