सोनिया गांधी के बाबरी बयान पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार: 'कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर'
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 7 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर तीखा हमला बोला। उनका यह पलटवार सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर दिए गए एक बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर 6 दिसंबर 1992 की घटना पर भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। त्रिवेदी ने कहा कि यह बयान कांग्रेस की 'छिपी हुई मानसिकता' को उजागर करता है।
त्रिवेदी के प्रमुख आरोप
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढाँचे के गिराए जाने पर सोनिया गांधी की आँखों में आँसू आए, लेकिन संसद भवन की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के सम्मान में अफजल गुरु को फाँसी की माँग को लेकर जब वीरों ने अपने मेडल वापस किए, तब उनकी आँखों से एक बूँद नहीं गिरी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवाद के आरोपियों के लिए कांग्रेस नेताओं ने शोक जताया।
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर 'राम विरोधी' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने रामलीला मैदान में कथित तौर पर 'भारत-विरोधी ताकतों' के साथ हाथ मिलाया था। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के दिल में कल भी बाबर था और आज भी बाबर है — तीन पीढ़ियों ने बाबर की कब्र पर सजदा किया है।'
ऐतिहासिक संदर्भ पर सवाल
त्रिवेदी ने 6 दिसंबर 1992 की घटनाओं का विस्तृत विवरण देते हुए पूछा कि सोनिया गांधी ने किस भारतीय टीवी चैनल पर वे दृश्य देखे जिन पर उनकी आँखों में आँसू आए। उन्होंने बताया कि उस दिन कार सेवक सुबह 11:30 बजे पहुँचे थे, शाम 5:00 बजे ढाँचा गिरने की खबर के बाद कल्याण सिंह सरकार ने इस्तीफा दिया, और रात 8:45 बजे तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की घोषणा की।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1989 में अयोध्या से भगवान राम का नाम लेकर चुनाव प्रचार शुरू किया था। त्रिवेदी के अनुसार, कांग्रेस की 'असली मानसिकता' यह है कि वह 'विशेष रूप से कट्टरपंथी तत्वों' के साथ खड़ी दिखती है।
तसलीमा नसरीन और 1992 के दंगों का हवाला
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि 1992 के दंगों के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैकड़ों मंदिर तोड़े गए और लाखों लोग बेघर हुए। उन्होंने कहा कि लेखिका तसलीमा नसरीन ने इन घटनाओं पर 'लज्जा' पुस्तक लिखी, लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में तसलीमा नसरीन को प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं करने दी गई। त्रिवेदी के अनुसार, यह दोहरा मापदंड कांग्रेस के रवैये को स्पष्ट करता है।
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के कथित अयोध्या दौरे पर भी त्रिवेदी ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते-आते इस तरह के 'दिखावे' बढ़ेंगे और इशारा किया कि जो लोग कभी गोली चलवाते थे, वे अब पूजा-पाठ की बात कर रहे हैं। त्रिवेदी ने हिंदू समाज से 'एकता' बनाए रखने का आह्वान किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में सामने आई है जब अयोध्या दीपोत्सव में नए कीर्तिमान स्थापित होने की खबरें आ रही हैं। गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की 34वीं बरसी नजदीक आने के साथ इस मुद्दे पर राजनीतिक सक्रियता हर वर्ष बढ़ती देखी गई है। कांग्रेस की ओर से त्रिवेदी के बयानों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक विवाद के और गहराने की संभावना है।