योगी के 'बाबर-सपा' बयान पर सियासत: एनडीए ने किया समर्थन, कांग्रेस बोली — बाबर के वंशज BJP में
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान — 'राम का नाम लेने से सपा को उतनी ही चिढ़ होती है, जितनी बाबर को थी' — ने 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी। जहाँ एनडीए के नेताओं ने इस बयान का खुलकर समर्थन किया, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही निशाना साध दिया।
एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि योगी ने बिल्कुल सही बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेता अब तक राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन के लिए नहीं गए। राजभर के अनुसार, बाबर से तुलना पूरी तरह उचित है।
पटना में बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी योगी के बयान की ताईद की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सनातन धर्म और सनातन संस्कृति की विरोधी है। सरावगी ने कहा, 'मुस्लिम वोटों और किसी खास समुदाय के वोटों के लिए समाजवादी पार्टी किसी भी हद तक जा सकती है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1992 में अयोध्या में हुई घटनाओं के दौरान सपा सरकार में लाठीचार्ज, फायरिंग और रामभक्तों की मौत हुई थी। उनका आरोप था कि चुनाव नज़दीक आने पर सपा एक बार फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस नेता असीम वकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उनके स्टाफ और भाजपा के लोग सही जानकारी नहीं देते। वकार ने तीखे शब्दों में कहा, 'मुख्यमंत्री योगी को अपने लोगों से जानकारी ले लेनी चाहिए कि बाबर के रिश्तेदार और वंशज आजकल कहाँ हैं। उन्हें मालूम पड़ जाएगा कि बाबर के वंशज आज भाजपा में हैं और राजस्थान में डिप्टी सीएम के पद पर हैं।'
वकार ने यह भी दावा किया कि हिंदुस्तान की किसी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी में बाबर का कोई वंशज नहीं है, और जो जाँच करना चाहे वह भाजपा में जाकर देखे। यह टिप्पणी सीधे तौर पर राजस्थान के एक भाजपा नेता पर निशाना थी, जिसे असीम वकार ने 'बाबर का वंशज' करार दिया।
बयानबाज़ी का राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ होती जा रही हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े बयान पिछले कई वर्षों से भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बिंदु रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वोट-ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा हैं।
भाजपा नेताओं का तर्क है कि सपा ने राम मंदिर के मुद्दे पर कभी स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, जबकि सपा के समर्थकों का कहना है कि वे सांप्रदायिक एजेंडे के विरुद्ध हैं। यह Nवीं बार है जब योगी-सपा के बीच 'राम बनाम बाबर' की भाषा में राजनीतिक संवाद हुआ है।
आगे क्या
इस बयानबाज़ी के बाद समाजवादी पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है, खासकर जब उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय या उपचुनाव की तारीखें घोषित होंगी।