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योगी के 'बाबर-सपा' बयान पर सियासत: एनडीए ने किया समर्थन, कांग्रेस बोली — बाबर के वंशज BJP में

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योगी के 'बाबर-सपा' बयान पर सियासत: एनडीए ने किया समर्थन, कांग्रेस बोली — बाबर के वंशज BJP में

सारांश

योगी आदित्यनाथ का 'बाबर-सपा' बयान राष्ट्रीय राजनीति में तूफान ले आया। एनडीए ने समर्थन किया तो कांग्रेस ने पलटवार में कहा — बाबर के वंशज भाजपा में हैं, राजस्थान के डिप्टी CM हैं। चुनावी मौसम में यह बयानबाज़ी ध्रुवीकरण की रणनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'राम का नाम लेने से सपा को उतनी ही चिढ़ होती है, जितनी बाबर को थी।' मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बयान का समर्थन किया; कहा — सपा के लोग अब तक राम मंदिर के दर्शन नहीं गए।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी योगी के पक्ष में बोलते हुए 1992 की अयोध्या घटनाओं का हवाला दिया।
कांग्रेस नेता असीम वकार ने पलटवार करते हुए दावा किया — बाबर के वंशज भाजपा में हैं और राजस्थान में डिप्टी सीएम के पद पर हैं।
वकार ने कहा कि किसी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी में बाबर का कोई वंशज नहीं है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान — 'राम का नाम लेने से सपा को उतनी ही चिढ़ होती है, जितनी बाबर को थी' — ने 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी। जहाँ एनडीए के नेताओं ने इस बयान का खुलकर समर्थन किया, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही निशाना साध दिया।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि योगी ने बिल्कुल सही बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेता अब तक राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन के लिए नहीं गए। राजभर के अनुसार, बाबर से तुलना पूरी तरह उचित है।

पटना में बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी योगी के बयान की ताईद की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सनातन धर्म और सनातन संस्कृति की विरोधी है। सरावगी ने कहा, 'मुस्लिम वोटों और किसी खास समुदाय के वोटों के लिए समाजवादी पार्टी किसी भी हद तक जा सकती है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1992 में अयोध्या में हुई घटनाओं के दौरान सपा सरकार में लाठीचार्ज, फायरिंग और रामभक्तों की मौत हुई थी। उनका आरोप था कि चुनाव नज़दीक आने पर सपा एक बार फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस नेता असीम वकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उनके स्टाफ और भाजपा के लोग सही जानकारी नहीं देते। वकार ने तीखे शब्दों में कहा, 'मुख्यमंत्री योगी को अपने लोगों से जानकारी ले लेनी चाहिए कि बाबर के रिश्तेदार और वंशज आजकल कहाँ हैं। उन्हें मालूम पड़ जाएगा कि बाबर के वंशज आज भाजपा में हैं और राजस्थान में डिप्टी सीएम के पद पर हैं।'

वकार ने यह भी दावा किया कि हिंदुस्तान की किसी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी में बाबर का कोई वंशज नहीं है, और जो जाँच करना चाहे वह भाजपा में जाकर देखे। यह टिप्पणी सीधे तौर पर राजस्थान के एक भाजपा नेता पर निशाना थी, जिसे असीम वकार ने 'बाबर का वंशज' करार दिया।

बयानबाज़ी का राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ होती जा रही हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े बयान पिछले कई वर्षों से भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बिंदु रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वोट-ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा हैं।

भाजपा नेताओं का तर्क है कि सपा ने राम मंदिर के मुद्दे पर कभी स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, जबकि सपा के समर्थकों का कहना है कि वे सांप्रदायिक एजेंडे के विरुद्ध हैं। यह Nवीं बार है जब योगी-सपा के बीच 'राम बनाम बाबर' की भाषा में राजनीतिक संवाद हुआ है।

आगे क्या

इस बयानबाज़ी के बाद समाजवादी पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है, खासकर जब उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय या उपचुनाव की तारीखें घोषित होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर बार ध्रुवीकरण की ज़मीन पर खेला जाता है। दिलचस्प यह है कि कांग्रेस का पलटवार भी उसी 'वंश-परंपरा' की भाषा में था, जो यह बताता है कि विपक्ष भी उसी पारिभाषिक ढाँचे में खेल रहा है जो भाजपा ने तय किया है। असली सवाल यह है कि इस बयानबाज़ी से उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी, महँगाई और किसान जैसे मुद्दे पृष्ठभूमि में कैसे धकेले जा रहे हैं — और मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस विस्थापन को रेखांकित करने से चूक जाती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी आदित्यनाथ ने सपा और बाबर को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम का नाम लेने से समाजवादी पार्टी को उतनी ही चिढ़ होती है, जितनी बाबर को थी। यह बयान 22 सितंबर 2026 को सामने आया और इसने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
एनडीए के किन नेताओं ने योगी के बयान का समर्थन किया?
मंत्री ओमप्रकाश राजभर और बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने योगी के बयान का समर्थन किया। सरावगी ने 1992 की अयोध्या घटनाओं का हवाला देते हुए सपा पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस ने योगी के बयान का जवाब कैसे दिया?
कांग्रेस नेता असीम वकार ने दावा किया कि बाबर के वंशज भाजपा में हैं और राजस्थान में डिप्टी सीएम के पद पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी में बाबर का कोई वंशज नहीं है।
यह विवाद किस राजनीतिक संदर्भ में हुआ?
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हुई जब उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं। राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े बयान पिछले कई वर्षों से भाजपा-सपा संघर्ष के केंद्र में रहे हैं।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
समाजवादी पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले उपचुनावों या स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान और उग्र हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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