5 अक्टूबर 2026
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ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान: सपा-कांग्रेस मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक मानती हैं, ओवैसी सही कह रहे हैं

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ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान: सपा-कांग्रेस मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक मानती हैं, ओवैसी सही कह रहे हैं

सारांश

यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा और कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए ओवैसी के 'दरी नहीं बिछाएंगे' वाले बयान को सही ठहराया। उनका आरोप — दोनों पार्टियाँ मुस्लिम वोट लेती हैं, सत्ता में आकर सिर्फ अपनी जाति को आगे बढ़ाती हैं। 2027 यूपी चुनाव से पहले यह बयान राजनीतिक पारा चढ़ा सकता है।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 5 अक्टूबर 2026 को अंबेडकर नगर में सपा और कांग्रेस पर मुस्लिमों को वोट बैंक मानने का आरोप लगाया।
राजभर ने असदुद्दीन ओवैसी के 'दरी नहीं बिछाएंगे' वाले बयान का खुलकर समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि सपा ने मुसलमानों के दम पर चार बार सरकार बनाई, लेकिन एक बार भी किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री नहीं बनाया।
सपा-कांग्रेस गठबंधन को राजभर ने 'एक सिक्के के दो पहलू' बताया।
एसआईआर विवाद पर कहा — विपक्ष जनता के फैसले की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर थोप रहा है।
यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आया है।

यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 5 अक्टूबर 2026 को अंबेडकर नगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियाँ मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती हैं और सत्ता में आने के बाद उन्हें हाशिये पर धकेल देती हैं।

ओवैसी के बयान का समर्थन

राजभर ने असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ओवैसी ने बहराइच में एक जनसभा में जो कहा — 'दरी नहीं बिछाएंगे, हम वोट बैंक नहीं हैं और हमें हमारा हक मिलना चाहिए' — वह बिल्कुल सही है। राजभर के अनुसार, ओवैसी का यह बयान मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक उपेक्षा की वास्तविकता को सामने रखता है।

सपा पर सीधा निशाना

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए राजभर ने कहा कि जहाँ भी कोई मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा होता है, सपा वहाँ यादव प्रत्याशी उतारकर उसे दबाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने मुसलमानों के समर्थन पर चार बार सरकार बनाई, लेकिन एक बार भी किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने की बात नहीं की।

राजभर ने कहा कि सत्ता में आने के बाद अखिलेश यादव ने केवल अपनी बिरादरी को आगे बढ़ाया, जबकि मुस्लिम समुदाय को दरी बिछवाने और दंगे देखने पर मजबूर होना पड़ा।

कांग्रेस पर भी आरोप

राजभर ने कांग्रेस को भी इसी श्रेणी में रखा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पार्टी भी मुस्लिम वोट लेकर सत्ता में आती रही, लेकिन सरकार बनने के बाद अपने दांव-पेच में उलझ जाती है और मुस्लिम समुदाय के हितों की अनदेखी होती रहती है। उनके अनुसार, सपा और कांग्रेस 'एक सिक्के के दो पहलू' हैं।

एसआईआर विवाद पर राजभर का पलटवार

देशभर में चल रहे एसआईआर (SIR) से जुड़े प्रदर्शनों पर राजभर ने कहा कि जनता विपक्ष को पहले ही नकार चुकी है और अब ये लोग अपनी हार की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर थोप रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि 2014 में जब कांग्रेस की पूरे देश की व्यवस्था पर पकड़ थी, तब भी जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना। उसी तरह यूपी में सपा की सरकार रहते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बहुमत मिला — इन दोनों उदाहरणों से साफ है कि जनता का फैसला सत्तारूढ़ दल के पक्ष में नहीं था।

2027 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि

यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी दलों की तैयारियाँ तेज़ होने लगी हैं। राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर भी कहा कि दोनों पार्टियाँ सीट बँटवारे पर आपस में ही उलझी हुई हैं और जनता को भ्रमित करने का काम कर रही हैं। गौरतलब है कि राजभर स्वयं सुभासपा (SBSP) के नेता हैं और फिलहाल BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन में सहयोगी हैं, ऐसे में उनका यह बयान राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल और अधिक केंद्र में आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 यूपी चुनाव से पहले की रणनीतिक चाल भी है — जो BJP के सहयोगी होते हुए भी ओवैसी की भाषा बोल रहे हैं, यह गठबंधन की जटिल राजनीति को उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल यूपी की राजनीति में फिर से गरमाने लगा है। गौरतलब है कि राजभर का सपा से इतिहास उथल-पुथल भरा रहा है और उनकी आलोचना में पुराने गठबंधन का कड़वापन भी दिखता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि BJP खुद भी मुस्लिम प्रत्याशियों को न के बराबर टिकट देती है — इस विरोधाभास पर राजभर चुप हैं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने कहा कि सपा और कांग्रेस मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक मानती हैं — वोट लेती हैं, लेकिन सत्ता में आकर केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाती हैं। उनका कहना था कि सपा ने मुसलमानों के समर्थन से चार बार सरकार बनाई, पर एक बार भी किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री नहीं बनाया।
राजभर ने ओवैसी के किस बयान का समर्थन किया?
ओवैसी ने बहराइच की एक जनसभा में कहा था — 'दरी नहीं बिछाएंगे, हम वोट बैंक नहीं हैं और हमें हमारा हक मिलना चाहिए।' राजभर ने इस बयान को 'बिल्कुल सही' बताया।
राजभर का यह बयान 2027 यूपी चुनाव के संदर्भ में क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण एक अहम मुद्दा बन सकता है। राजभर का यह बयान सपा-कांग्रेस गठबंधन की मुस्लिम साख को चुनौती देता है और ओवैसी की AIMIM को मुस्लिम बहुल सीटों पर जगह बनाने का मौका दे सकता है।
एसआईआर विवाद पर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने कहा कि विपक्ष को जनता ने पहले ही नकार दिया है और अब वे अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने 2014 और यूपी में सपा सरकार के बाद BJP की जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता का फैसला सत्तारूढ़ दल की परवाह किए बिना आता है।
ओम प्रकाश राजभर कौन हैं और उनकी राजनीतिक स्थिति क्या है?
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। वे फिलहाल BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी हैं। उनका सपा के साथ पुराना और उथल-पुथल भरा राजनीतिक इतिहास रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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