19 अक्टूबर 2026
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सपा-कांग्रेस गठबंधन तय, बस घोषणा बाकी: सपा सांसद रमाशंकर राजभर का बड़ा बयान

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सपा-कांग्रेस गठबंधन तय, बस घोषणा बाकी: सपा सांसद रमाशंकर राजभर का बड़ा बयान

सारांश

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने दावा किया कि UP विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन व्यावहारिक रूप से तय हो चुका है — 15 दिनों की खामोशी को उन्होंने इसका सबसे बड़ा सबूत बताया। साथ ही उन्होंने ओवैसी के बयान और परिसीमन बिल पर भी तीखे सवाल उठाए।

मुख्य बातें

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने 19 अक्टूबर 2026 को कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन तय हो चुका है, केवल आधिकारिक घोषणा बाकी है।
पिछले 15 दिनों से दोनों दलों की ओर से गठबंधन पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया — राजभर ने इसे गठबंधन की पुष्टि माना।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के जाति-धर्म आधारित बयान पर राजभर ने तीखा पलटवार किया।
परिसीमन बिल पर DMK द्वारा केंद्र का समर्थन करने की खबरों पर राजभर ने संदेह जताया; DMK का पिछला रुख विरोध का रहा है।
राजभर ने 19 दिनों के संसद सत्र में एक घंटे भी सही कामकाज न होने पर सरकार की आलोचना की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रमाशंकर राजभर ने 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन व्यावहारिक रूप से तय हो चुका है — केवल आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से दोनों दलों की ओर से गठबंधन पर कोई सार्वजनिक बयान न आना, स्वयं इस बात का प्रमाण है।

गठबंधन पर राजभर का बयान

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा, 'अपेक्षा करना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन आप देख रहे होंगे कि पिछले 15 दिनों से समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई बात सामने नहीं आ रही है। सबको सोचना चाहिए कि इसका मतलब यह है कि गठबंधन तय हो चुका है, बस घोषणा बाकी है। समय आने पर हमारे नेता इसकी घोषणा भी कर देंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को लेकर अटकलों का दौर चल रहा है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भी सपा और कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था।

ओवैसी के बयान पर पलटवार

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने जाति और धर्म के आधार पर दिए जाने वाले वक्तव्यों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह तय करने वाले ओवैसी कौन होते हैं कि 'अब्दुल कालीन बिछाएगा या राज करेगा।' राजभर ने आगे पूछा कि यदि अब्दुल कालीन नहीं बिछाने वाला, तो अब तक वह किसके लिए कालीन बिछाता रहा है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि ऐसे बयान किसके प्रभाव में आकर दिए जा रहे हैं।

राजभर ने नेताओं से आग्रह किया कि वे विचार करें कि जाति और धर्म पर आधारित बयानों का देश की जनता पर क्या असर पड़ता है।

परिसीमन बिल पर DMK और केंद्र सरकार

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा परिसीमन बिल पर केंद्र सरकार का समर्थन करने की खबरों पर राजभर ने संदेह जताया। उन्होंने कहा कि परिसीमन बिल की मंशा से दक्षिण भारत को सबसे अधिक नुकसान हो सकता है, और ऐसे में दक्षिण भारत की राजनीति करने वाली DMK का इस विधेयक का समर्थन करना उन्हें संभव नहीं लगता।

उन्होंने याद दिलाया कि DMK ने पिछली बार परिसीमन बिल का कड़ा विरोध किया था। यदि सरकार यह विधेयक फिर से लाती है, तो राजभर ने इसे 'तुगलकी फैसला' करार दिया।

संसद की कार्यवाही पर निशाना

राजभर ने संसद सत्र को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 19 दिनों तक सदन चलने के बावजूद एक घंटे भी सही ढंग से कामकाज नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे की रणनीति के लिए पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का इंतज़ार है।

राजभर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार परिसीमन बिल लेकर आती है, तो उसे व्यापक आलोचना झेलनी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के हित में काम नहीं कर रही है। आने वाले दिनों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की आधिकारिक घोषणा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस फर्क को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। विपक्षी गठबंधनों में अक्सर 'तय हो चुका है' और 'घोषणा हो चुकी है' के बीच की खाई में सीट-बंटवारे के कड़वे विवाद जन्म लेते हैं — 2022 का सपा-रालोद अनुभव इसका उदाहरण है। ओवैसी पर राजभर का पलटवार और परिसीमन बिल पर DMK को लेकर उनका संदेह, यह दर्शाता है कि विपक्ष अभी भी अपने भीतर कई मोर्चों पर एकमत नहीं है। असली परीक्षा तब होगी जब सीटों की सूची सार्वजनिक होगी।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा-कांग्रेस गठबंधन कब तय हुआ और इसकी घोषणा कब होगी?
सपा सांसद रमाशंकर राजभर के अनुसार गठबंधन व्यावहारिक रूप से तय हो चुका है और उचित समय आने पर पार्टी नेतृत्व इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा। उन्होंने 15 दिनों की दोनों दलों की चुप्पी को इसका संकेत बताया।
रमाशंकर राजभर ने ओवैसी के बयान पर क्या कहा?
राजभर ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के जाति और धर्म आधारित बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्यों का जनता पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने पूछा कि यह तय करने वाले ओवैसी कौन होते हैं और ये बयान किसके प्रभाव में दिए जा रहे हैं।
परिसीमन बिल पर DMK के रुख को लेकर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने कहा कि परिसीमन बिल से दक्षिण भारत को सबसे अधिक नुकसान हो सकता है, इसलिए DMK द्वारा इसका समर्थन करने की संभावना पर उन्हें भरोसा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि DMK ने पिछली बार इस बिल का कड़ा विरोध किया था।
राजभर ने संसद सत्र को लेकर सरकार की आलोचना क्यों की?
उन्होंने कहा कि 19 दिनों तक सदन चलने के बावजूद एक घंटे भी सही ढंग से कामकाज नहीं हो सका, जो संसदीय प्रक्रिया की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आगे की रणनीति के लिए पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का इंतज़ार करने की बात कही।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहाँ की राजनीति राष्ट्रीय समीकरणों को सीधे प्रभावित करती है। 2024 लोकसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के तहत सपा-कांग्रेस के साझा प्रदर्शन के बाद, विधानसभा में उनकी एकजुटता विपक्ष की रणनीति के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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