ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर वार: 'वोट बैंक खिसका तो याद आए आजम खान'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 20 अक्टूबर 2026 को बलिया में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने अखिलेश यादव की रामपुर जेल में बंद सपा नेता आजम खान से प्रस्तावित मुलाकात को महज राजनीतिक फायदे की कोशिश करार दिया।
मुख्य आरोप: वोट बैंक बचाने की कवायद
राजभर ने कहा, 'यह चुनाव से जुड़ा एक वादा करने की कोशिश है। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की हरकतों की वजह से ही आजम खान इतने लंबे समय से जेल में हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि जब अखिलेश को यह आभास हुआ कि उनका वोट बैंक खिसक रहा है, तभी उन्होंने आजम खान के ज़रिए मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश शुरू की।
राजभर ने कहा, 'वे चाहते हैं कि मुसलमान उनके साथ बने रहें और अपने अधिकारों की माँग किए बिना उनके लिए काम करते रहें। यही वजह है कि अखिलेश यादव आजम खान से मिलने जा रहे हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और सपा अपनी जातीय-धार्मिक गोलबंदी को मज़बूत करने में लगी है।
योगी-मोदी पर भरोसा, सरकार बनाने का दावा
राजभर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी के सामने कोई भी राजनीतिक दल नहीं टिक सकता। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव को यह एहसास हो गया है कि उनकी पार्टी सरकार नहीं बनाने जा रही है।' रसड़ा रामलीला में उमड़ी भारी भीड़ का हवाला देते हुए उन्होंने इसे जनता का सरकार के प्रति विश्वास बताया।
महँगाई पर अखिलेश के बयान पर पलटवार
महँगाई के मुद्दे पर अखिलेश यादव के हालिया बयान पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि विकास के कारण जनजीवन बेहतर हुआ है। उनके अनुसार, 'पहले लोग कच्चे मकान में रहते थे, आज पक्के मकान में हैं। पहले चूल्हे पर खाना बनता था, अब गैस पर बनता है। मोटरसाइकिल ले रहे हैं।' आलोचकों का कहना है कि ऐसे तर्क महँगाई की असल मार झेल रही आबादी की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करते हैं।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष के बयान की निंदा
राजभर ने पंजाब विधानसभा के स्पीकर द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'देश की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठे नेताओं के बारे में इस तरह का बयान बेहद निंदनीय है। स्पीकर की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए।' गौरतलब है कि विपक्षी नेताओं और सत्तापक्ष के बीच इस तरह के ज़ुबानी हमले ताज़ा राजनीतिक माहौल में लगातार बढ़ रहे हैं।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
राजभर के इस बयान के बाद सपा की तरफ से किसी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। आजम खान की रामपुर जेल से संभावित रिहाई या मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है। यह देखना होगा कि अखिलेश यादव इस मुलाकात को किस तरह राजनीतिक रूप से भुनाते हैं और भाजपा गठबंधन इस पर अपनी काट कैसे तैयार करता है।