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भाजपा शासन पर जनता में रोष, तानाशाही की हद पार: माता प्रसाद पांडेय का तीखा हमला

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भाजपा शासन पर जनता में रोष, तानाशाही की हद पार: माता प्रसाद पांडेय का तीखा हमला

सारांश

उत्तर प्रदेश विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय ने भाजपा पर तानाशाही की हद पार करने का आरोप लगाया, मंत्री राजभर को 'खुद एक घोटाला' बताया और ब्राह्मण समुदाय से सपा के साथ एकजुट रहने की अपील की — यह सब 2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में।

मुख्य बातें

माता प्रसाद पांडेय ने 17 जून को लखनऊ में कहा कि जनता में भाजपा शासन को लेकर गहरा रोष है।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए उन्हें 'खुद एक घोटाला' करार दिया।
मुख्यमंत्री की भाषा-शैली पर आपत्ति जताई, जौनपुर में माफिया के खुलेआम घूमने का सवाल उठाया।
समाजवादी पार्टी के भाजपा में विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया।
ब्राह्मण समुदाय की बैठक में उपस्थित लोगों से सपा को मजबूत करने और एकजुट रहने की अपील की।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय ने बुधवार, 17 जून को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता में भाजपा शासन को लेकर गहरा रोष है और लोग इस सरकार को सत्ता से बाहर करना चाहते हैं। मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए पांडेय ने तंज कसा कि 'वो खुद ही एक घोटाला हैं।'

भाजपा पर तानाशाही का आरोप

पांडेय ने कहा कि भाजपा ने 'तानाशाही की चरम सीमा' पार कर ली है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक भाषा के स्तर पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या इस तरह की भाषा लोकतंत्र के लिए उचित है।

मुख्यमंत्री की भाषा पर आपत्ति

विपक्ष के नेता ने कहा कि वे कई मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन आम जनता के बीच इस तरह की भाषा-शैली का उपयोग उन्होंने कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री माफिया के सफाए की बात करते हैं, लेकिन जौनपुर में कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है — यह सरकार की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है।

ब्राह्मण समुदाय की बैठक और समाजवादी पार्टी का संदेश

पांडेय ने ब्राह्मण समुदाय की बैठक में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने उपस्थित लोगों से समाजवादी पार्टी (सपा) को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'आप लोगों के साथ बहुत अत्याचार हुआ है, इसलिए एकजुट रहना जरूरी है।' साथ ही, उन्होंने सपा के भाजपा में विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

2027 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस बैठक के राजनीतिक निहितार्थ हैं, तो पांडेय ने कहा कि इसके कोई अलग मायने नहीं निकाले जाने चाहिए — पार्टी का एकमात्र संदेश एकजुटता है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में विभिन्न सामाजिक समूहों को साधने की राजनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं और 2027 के चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पार्टी की पारंपरिक पिछड़ा-मुस्लिम गठजोड़ की छवि से परे जाने की कोशिश को दर्शाता है। राजभर पर 'घोटाला' वाला तंज इस बात का संकेत है कि विपक्ष एनडीए के भीतरी तनावों को भुनाने की तैयारी में है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ब्राह्मण बैठकें वोट में तब्दील होंगी — 2022 में भी इसी तरह की कोशिशें हुई थीं और नतीजा सपा के पक्ष में नहीं रहा था।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माता प्रसाद पांडेय ने ओम प्रकाश राजभर के बारे में क्या कहा?
पांडेय ने राजभर के बयान पर सीधी प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए तंज में कहा कि 'वो खुद ही एक घोटाला हैं।' उन्होंने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की।
क्या समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल हो रही है?
नहीं। माता प्रसाद पांडेय ने 17 जून को स्पष्ट रूप से इन अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि सपा का लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना है, न कि उसके साथ जाना।
ब्राह्मण समुदाय की बैठक का उद्देश्य क्या था?
पांडेय के अनुसार, बैठक में उपस्थित लोगों से समाजवादी पार्टी को मजबूत करने और एकजुट रहने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समुदाय के साथ हुए कथित अत्याचार के मद्देनजर एकता जरूरी है।
क्या इस बैठक के 2027 चुनाव से राजनीतिक मायने हैं?
पांडेय ने इससे इनकार किया और कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल एकजुटता का संदेश देना था। हालाँकि, यह गतिविधि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों की पृष्ठभूमि में हो रही है।
माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री की भाषा पर क्या आपत्ति जताई?
पांडेय ने कहा कि उन्होंने कई मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया है, लेकिन आम जनता के बीच इस तरह की भाषा-शैली कभी नहीं देखी। उन्होंने जौनपुर का उदाहरण देते हुए माफिया सफाए के दावों पर भी सवाल उठाया।
राष्ट्र प्रेस
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