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केशव प्रसाद मौर्य का दावा: 2027 में सपा का हश्र TMC जैसा, BJP तीसरी बार बनाएगी UP सरकार

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केशव प्रसाद मौर्य का दावा: 2027 में सपा का हश्र TMC जैसा, BJP तीसरी बार बनाएगी UP सरकार

सारांश

कानपुर में BJP के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में UP उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि 2027 के बाद सपा का राजनीतिक दायरा TMC की तरह सिमट जाएगा और BJP रिकॉर्ड मतों से तीसरी बार सरकार बनाएगी — यह बयान 2027 चुनावी रण की आक्रामक शुरुआत का संकेत है।

मुख्य बातें

UP उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 17 जून 2026 को कानपुर में BJP प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन को संबोधित किया।
मौर्य का दावा — 2027 विधानसभा चुनाव के बाद सपा का प्रभाव TMC की तर्ज पर सिमट जाएगा।
BJP के रिकॉर्ड मतों से जीत का दावा, चाहे विपक्ष गठबंधन में उतरे या अलग-अलग।
सपा नेतृत्व पर कटाक्ष — 'सैफई का चश्मा उतारकर' प्रदेश का विकास देखें।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं पर कहा — कानून अपना काम करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और CM योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में UP की नई पहचान का दावा।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार, 17 जून 2026 को कानपुर में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद सपा का राजनीतिक प्रभाव उसी तरह सिमट जाएगा, जैसे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उभार के बाद वाम दलों का हुआ था। मौर्य ने यह भी कहा कि BJP लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी।

विपक्ष पर सीधा प्रहार

मौर्य ने कहा कि चाहे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ें या गठबंधन बनाकर मैदान में उतरें — BJP रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करेगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसके पास जनता के सामने रखने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है और वह केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहा है।

उन्होंने सपा नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के नेताओं को 'सैफई का चश्मा' उतारकर प्रदेश के अन्य जिलों में हुए विकास कार्यों को भी देखना चाहिए। उनके अनुसार, एक्सप्रेस-वे, निवेश, रोज़गार, आधारभूत ढाँचे और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर प्रदेश में अभूतपूर्व बदलाव हुए हैं, जिन्हें विपक्ष स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

क्षेत्रीय दलों पर अस्तित्व का संकट

मौर्य ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ देते हुए कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में BJP ने पारंपरिक क्षेत्रीय दलों को हाशिये पर धकेला है। उनके अनुसार, 2027 के बाद सपा का राजनीतिक दायरा भी सिमटकर रह जाएगा।

अयोध्या राम मंदिर विवाद पर प्रतिक्रिया

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और कथित अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों पर उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में किसी प्रकार के भ्रष्टाचार का प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं के धन के साथ कोई गड़बड़ी की होगी, तो कानून अपना काम करेगा और संबंधित व्यक्ति को उसके कर्मों का परिणाम अवश्य मिलेगा।

कानून-व्यवस्था और विकास का दावा

मौर्य ने कहा कि BJP सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। अपराध और माफिया तंत्र के खिलाफ चलाए गए अभियानों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है, जिससे आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। गौरतलब है कि यह वही दावे हैं जो BJP 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी करती रही थी, और जिनके आधार पर उसे बहुमत मिला था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है, और इसीलिए प्रदेश की जनता का भरोसा BJP पर लगातार बढ़ रहा है।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी करीब डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन सभी प्रमुख दलों ने जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। मौर्य का यह बयान BJP की आक्रामक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष को कमज़ोर और अप्रासंगिक दिखाने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तथ्यात्मक रूप से अधूरा — TMC का 'पतन' वामपंथ का था, जबकि सपा UP में मुख्य विपक्ष की भूमिका में अभी भी मज़बूत है। 2022 में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जो 2017 के मुकाबले बड़ा उछाल था। BJP की असली चुनौती यह है कि एंटी-इनकम्बेंसी, बेरोज़गारी और महँगाई के मुद्दे 2027 में कितना वज़न रखते हैं। विकास के दावे तब तक चुनावी नैरेटिव नहीं बनते, जब तक जमीनी स्तर पर उनकी अनुभूति न हो — और यही वह अंतर है जिसे BJP को पाटना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशव प्रसाद मौर्य ने सपा की तुलना TMC से क्यों की?
मौर्य ने दावा किया कि जैसे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के उभार के बाद वाम दलों का प्रभाव सिमट गया, वैसे ही 2027 के बाद सपा का राजनीतिक दायरा उत्तर प्रदेश में सीमित हो जाएगा। यह BJP की चुनावी रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्ष को कमज़ोर और अप्रासंगिक दिखाया जाता है।
2027 UP विधानसभा चुनाव में BJP की क्या रणनीति है?
मौर्य के अनुसार BJP विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी और रिकॉर्ड मतों से जीत का दावा किया है। पार्टी प्रधानमंत्री मोदी और CM योगी आदित्यनाथ की छवि को केंद्र में रखकर अभियान चलाएगी।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं पर मौर्य का क्या कहना है?
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में किसी भ्रष्टाचार का प्रश्न नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं के धन के साथ गड़बड़ी की होगी, तो कानून अपना काम करेगा।
क्या सपा, BSP और कांग्रेस 2027 में गठबंधन कर सकते हैं?
मौर्य ने कहा कि चाहे विपक्षी दल अलग-अलग लड़ें या गठबंधन बनाएं, BJP रिकॉर्ड मतों से जीतेगी। हालाँकि, 2027 में विपक्षी गठबंधन की संभावना अभी स्पष्ट नहीं है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने सपा नेतृत्व पर 'सैफई का चश्मा' वाली टिप्पणी क्यों की?
मौर्य का इशारा सपा के गढ़ सैफई (इटावा) की ओर था, जहाँ से पार्टी का नेतृत्व आता है। उनका कहना था कि सपा नेता केवल अपने क्षेत्र तक सीमित नज़रिये से प्रदेश को देखते हैं और पूरे UP में हुए विकास कार्यों को नज़रअंदाज़ करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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