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ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर पलटवार: 'झूठ के सौदागर संवाद और सच्चाई से डरते हैं'

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ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर पलटवार: 'झूठ के सौदागर संवाद और सच्चाई से डरते हैं'

सारांश

अखिलेश यादव के 'मंत्री से पत्रकार बने' वाले तंज पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीनदयाल उपाध्याय से लोहिया तक की पत्रकारिता परंपरा का हवाला देकर पलटवार किया — 'जो झूठ के सौदागर होंगे, उन्हें संवाद बुरा लगेगा।' यह वाकयुद्ध 2027 के यूपी चुनाव की आहट में दोनों दलों के बीच बढ़ती तल्खी का संकेत है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 29 मई को एक्स पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया।
अखिलेश ने पाठक और मंत्री नरेंद्र कश्यप के वीडियो साक्षात्कार को लेकर 'स्वास्थ्य मंत्री से पत्रकार बने' और 'बेहद बचकाना' कहकर निशाना साधा था।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय , स्व.
राममनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पत्रकारिता परंपरा का हवाला दिया।
पाठक ने पत्रकारों को 'खलिहर' कहे जाने को मेहनतकश समाज और मीडिया जगत का अपमान बताया।
विवाद की जड़ वह वीडियो है जिसमें पाठक ने सपा शासन बनाम भाजपा सरकार की तुलना की और पीडीए एजेंडे पर निशाना साधा।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार, 29 मई को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने पाठक को 'स्वास्थ्य मंत्री से पत्रकार बने' कहकर निशाना साधा था। पाठक ने पत्रकारिता और संवाद की लोकतांत्रिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों को 'खलिहर' बताना मेहनतकश समाज और मीडिया जगत का अपमान है।

विवाद की जड़: अखिलेश यादव का तंज

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और पिछड़ा वर्ग मंत्री नरेंद्र कश्यप के बीच जारी एक वीडियो साक्षात्कार पर चुटकी लेते हुए कहा था — 'जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गए बेकार, अब वो बन गए पत्रकार।' उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रदेश की जनता बिजली कटौती, गर्मी और बीमारी से तड़प रही है, तब भाजपाई मंत्री 'इंटरव्यू-इंटरव्यू' खेलकर गर्मी की छुट्टियाँ मना रहे हैं। अखिलेश ने इस पर 'बेहद बचकाना' टिप्पणी भी की।

पाठक का एक्स पर जवाब: ऐतिहासिक संदर्भ से पलटवार

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विस्तृत जवाब पोस्ट किया। उन्होंने एकात्म मानववाद के प्रणेता स्व. पंडित दीनदयाल उपाध्याय, तत्कालीन जनसंघ अध्यक्ष स्व. पीतांबर दास, भारत रत्न स्व. नानाजी देशमुख और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. डॉ. राममनोहर लोहिया की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए लिखा — 'पत्रकार होना गर्व की बात है।'

पाठक ने अपनी पोस्ट में याद दिलाया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय मासिक पत्रिका 'राष्ट्रधर्म' निकालते थे और डॉ. लोहिया हिंदी मासिक 'जन' तथा अंग्रेजी पत्रिका 'मैनकाइंड' के संपादक थे। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण का हवाला देते हुए कहा कि 'तानाशाह ही संवाद के विरोधी होते हैं।'

पत्रकारों के अपमान पर नाराज़गी

पाठक ने पत्रकारों को 'खलिहर' कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा — 'हमारे पत्रकार भाई और बहन हमारे समाज के कर्मयोगी हैं। उन्हें खलिहर बताना सभी पत्रकारों और मेहनतकशों का अपमान है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक सार्थक साक्षात्कार में कितनी मेधा और मेहनत लगती है, यह पत्रकार साथियों से पूछा जाना चाहिए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा — 'जो युवराज होंगे, उन्हें मेहनतकश बुरे लगेंगे। जो झूठ के सौदागर होंगे, उन्हें संवाद बुरा लगेगा।'

विवाद की पृष्ठभूमि: वह वीडियो जिसने बहस छेड़ी

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक नई पहल के तहत पिछड़ा वर्ग मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक वीडियो साक्षात्कार जारी किया था, जिसमें सपा शासन और भाजपा सरकार की तुलना की गई थी। इस दौरान उन्होंने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडे पर भी निशाना साधा था। इसी वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया, जिसके बाद यह राजनीतिक वाकयुद्ध शुरू हुआ।

आगे क्या

यह वाकयुद्ध उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच जारी वाक्-संघर्ष की नई कड़ी है। ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि वे एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में लोक स्वास्थ्य सुधार में लगे हैं और एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संवाद जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज़ होने के आसार हैं, क्योंकि दोनों दल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच 'नैरेटिव की लड़ाई' है। ब्रजेश पाठक का ऐतिहासिक संदर्भ — दीनदयाल से लोहिया तक — एक सोची-समझी रणनीति है जो सपा के ही वैचारिक पूर्वजों को उसके खिलाफ खड़ा करती है। दूसरी ओर, अखिलेश का 'युवराज' वाला व्यंग्य भाजपा के लिए उल्टा पड़ सकता है, क्योंकि पत्रकार समुदाय को 'खलिहर' कहना मीडिया कवरेज में सहानुभूति की लहर पैदा कर सकता है। मुख्यधारा की कवरेज इस विवाद को महज़ 'बयानबाज़ी' मानकर चलती है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश में बिजली, स्वास्थ्य और गर्मी की मार झेल रही जनता इन शब्द-युद्धों में कोई राहत खोज पा रही है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रजेश पाठक और अखिलेश यादव के बीच विवाद क्यों हुआ?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्री नरेंद्र कश्यप के वीडियो साक्षात्कार पर तंज कसते हुए कहा था कि वे 'स्वास्थ्य मंत्री से पत्रकार बन गए।' इसी पर पाठक ने एक्स पर पलटवार किया।
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश को क्या जवाब दिया?
पाठक ने एक्स पर लिखा कि पत्रकारिता भारतीय लोकतंत्र की सनातन परंपरा है और दीनदयाल उपाध्याय से लेकर डॉ. लोहिया तक सभी महान नेता पत्रकार रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'जो झूठ के सौदागर होंगे, उन्हें संवाद बुरा लगेगा।'
अखिलेश यादव ने पत्रकारों को 'खलिहर' क्यों कहा?
अखिलेश यादव ने भाजपा मंत्रियों के वीडियो साक्षात्कार की आलोचना करते हुए इस शब्द का प्रयोग किया था। पाठक ने इसे मेहनतकश समाज और मीडिया जगत का अपमान बताया।
वह वीडियो क्या था जिसने यह विवाद छेड़ा?
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पिछड़ा वर्ग मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक वीडियो साक्षात्कार जारी किया था, जिसमें सपा शासन और भाजपा सरकार की तुलना की गई और पीडीए एजेंडे पर निशाना साधा गया।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण का हवाला क्यों दिया गया?
पाठक ने जयप्रकाश नारायण की यह उक्ति उद्धृत की कि 'तानाशाह ही संवाद के विरोधी होते हैं।' इसके ज़रिये उन्होंने अखिलेश यादव पर परोक्ष रूप से तानाशाही प्रवृत्ति का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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