अमेरिका-ईरान विवाद: वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का नया कारण
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज का कब्जा वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का कारण बना।
- बाजार में सप्लाई में रुकावट का डर है।
- बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।
- होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
वॉशिंगटन, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को वैश्विक तेल कीमतों में अचानक वृद्धि हुई। यह तब हुआ जब अमेरिका ने एक ईरानी कार्गो जहाज को अपने कब्जे में लिया। इससे तनाव बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
सीएनएन के लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे यह 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई तेल की कीमत 7 प्रतिशत बढ़कर 88.3 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
यह वृद्धि ओमान की खाड़ी में तनाव के कारण हुई, जहां अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी झंडे वाले जहाज पर फायरिंग की और उसे कब्जे में लिया। यह जहाज नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते तनाव के कारण सोमवार तक तेल की कीमतें लगभग पांच प्रतिशत तक उछल गईं, क्योंकि बाजार में सप्लाई में रुकावट का डर बना हुआ है।
इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर सवाल उठा दिए हैं, जिससे पहले से अस्थिर ऊर्जा बाजार में और भी उतार-चढ़ाव आने की संभावना है। विशेष रूप से, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता में इजाफा हुआ है।
इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है। कई जहाज अपना रुख बदल रहे हैं या वापस लौट रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को चेतावनी मिलने के बाद कम से कम 13 जहाज वापस लौट गए, और रविवार को कोई भी तेल टैंकर इस मार्ग से नहीं गुजरा।
ईरान कभी इस मार्ग को खोलता है तो कभी बंद करता है, जिससे तेल की कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि फिलहाल इस मार्ग से गुजरना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हम इसे किसी न किसी तरीके से खोल सकते हैं, लेकिन सबसे अच्छा तरीका यही है कि टकराव समाप्त हो और ईरान को पूरी तरह कमजोर और निरस्त्र किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट जारी रहती है, तो वैश्विक सप्लाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। फरवरी के अंत से ही कीमतों में तेजी का रुख देखा जा रहा है।