बांग्लादेश: मीरपुर में न्यूनतम वेतन विवाद, तीसरे दिन भी श्रमिक-पुलिस झड़प, 264 कारखाने बंद
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के मीरपुर में 3 नवंबर 2026 को न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करने की माँग को लेकर कपड़ा श्रमिकों और पुलिस के बीच लगातार तीसरे दिन भी झड़प हुई, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया और एक मेट्रो स्टेशन को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। अब तक कम से कम 10 लोग घायल हो चुके हैं और 264 कपड़ा कारखानों में सामान्य अवकाश घोषित किया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
ढाका ट्रिब्यून ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि मंगलवार सुबह करीब 10:15 बजे मीरपुर-11 इलाके में उस समय भिड़ंत हुई जब पुलिस ने श्रमिकों को सड़क जाम करने से रोकने की कोशिश की। कर्मचारी बीच-बीच में गलियों से बाहर निकलकर पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंकते देखे गए, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड छोड़े।
स्थानीय निवासी और प्रत्यक्षदर्शी यूसुफ अहमद ने बांग्ला ट्रिब्यून को बताया कि मीरपुर-10 और मीरपुर-11 के बीच स्थित कई कारखानों के पुरुष और महिला कर्मचारी अपने कार्यस्थलों के बाहर एकत्र हो गए थे।
आंदोलन की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारी श्रमिक तीन प्रमुख माँगें रख रहे हैं — न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करना, श्रमिकों की ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगाना और छंटनी बंद करना। यह आंदोलन केवल मीरपुर तक सीमित नहीं है — गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में भी सोमवार को हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरे।
सरकार की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रविवार को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि कपड़ा श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ परिधान उद्योग में उत्पादन और निर्यात भी निर्बाध बनाए रखा जाए। उन्होंने श्रमिक आंदोलन की आड़ में हिंसा, तोड़फोड़ और अशांति फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
श्रम एवं रोज़गार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए श्रमिकों से सड़कों का रास्ता छोड़कर काम पर लौटने की अपील की। इसके बावजूद तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहे, जो दर्शाता है कि सरकारी आश्वासन अभी श्रमिकों को संतुष्ट करने में नाकाफी साबित हुआ है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश का परिधान उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात का एक प्रमुख आधार है। 264 कपड़ा कारखानों में उत्पादन ठप पड़ने से देश के कपड़ा निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में कामकाज बाधित होना आर्थिक दृष्टि से गंभीर संकेत है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि सरकार द्वारा वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा के बावजूद आंदोलन थमा नहीं है, जो यह बताता है कि श्रमिक ठोस और तत्काल घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं। नए वेतन बोर्ड की सिफारिशें और सरकार का अगला कदम ही तय करेगा कि यह संकट और गहराएगा या सुलझेगा।