बांग्लादेश: गाजीपुर में 30,000 टका न्यूनतम वेतन की मांग पर गारमेंट श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन, ढाका-टांगाइल हाईवे जाम
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के गाजीपुर में 1 नवंबर 2026 को रेडीमेड गारमेंट उद्योग के श्रमिकों ने 30,000 टका न्यूनतम मासिक वेतन की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन किया, जिसके दौरान कोनाबाड़ी इलाके में एक पुलिस बॉक्स को आग के हवाले कर दिया गया और ढाका-टांगाइल हाईवे को पूरी तरह बाधित कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की पाँच प्लाटून तैनात करनी पड़ीं।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह करीब 9:30 बजे श्रमिकों ने ढाका-टांगाइल हाईवे को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने मौचक, चंद्र पोली बिद्युत, सफीपुर बाजार और कालियाकैर उपजिला के तेलीचाला समेत कई स्थानों पर सड़कें जाम कर दीं। नारेबाजी करते श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन वृद्धि, कथित ब्लैकलिस्टिंग खत्म करने और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की माँग उठाई।
कोनाबाड़ी थाने के प्रभारी इफ्तिखार हुसैन ने पुष्टि की कि प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर स्थित एक पुलिस बॉक्स में आग लगा दी। कालियाकैर थाने के प्रभारी शाहिदुल इस्लाम ने बताया कि श्रमिकों के सड़क जाम जारी रखने के कारण वाहनों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रही।
फैक्ट्रियों पर असर
रिपोर्टों के अनुसार, आशुलिया क्षेत्र में भी श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के बाद 50 से अधिक गारमेंट फैक्ट्रियों ने रविवार को छुट्टी घोषित कर दी। औद्योगिक पुलिस के हवाले से यह जानकारी सामने आई। कई कारखानों का कामकाज प्रभावित हुआ और उत्पादन रोकना पड़ा।
नरसिंहपुर इलाके की अब्दुल्लापुर-बाइपाइल सड़क पर भी विभिन्न फैक्ट्रियों के कर्मचारी एकत्र हुए और बेहतर वेतन की माँग उठाई। कठगड़ा आमतला क्षेत्र की एक गारमेंट फैक्टरी के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इलाके की अधिकांश फैक्ट्रियों ने छुट्टी घोषित कर दी है।
हिंसा और पुलिस से झड़प
शनिवार को भी आशुलिया में गारमेंट श्रमिकों ने इसी मांग को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद कठगड़ा और आसपास के इलाकों में कम से कम 11 फैक्ट्रियों ने बंदी की घोषणा की थी। आशुलिया इंडस्ट्रियल पुलिस-1 के अधीक्षक मोहम्मद मोमिनुल इस्लाम भुइयां ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के पथराव में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई और आसपास की फैक्ट्रियों पर ईंट-पत्थर फेंके गए।
श्रमिकों की व्यथा
श्रमिकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। वे लंबे समय से 30,000 टका न्यूनतम मासिक वेतन, कथित ब्लैकलिस्टिंग समाप्त करने और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार की माँग उठाते आ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग — जो देश के निर्यात का मुख्य आधार है — पहले से ही वैश्विक माँग के दबाव में है।
गौरतलब है कि यह बांग्लादेश के गारमेंट क्षेत्र में श्रम असंतोष की हालिया कड़ी में नवीनतम घटना है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और फैक्ट्री मालिकों के साथ बातचीत नहीं होती, तो प्रदर्शन और व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है।