बांग्लादेश में कपड़ा श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन: 30,000 टका वेतन मांग पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में 2 नवंबर 2026 को कपड़ा श्रमिकों का आंदोलन उग्र रूप ले चुका है। न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका करने की मांग पर हजारों श्रमिकों ने प्रमुख राजमार्गों को जाम कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। मीरपुर और गाजीपुर से अब तक कुल 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार सुबह विभिन्न फैक्ट्रियों के करीब 1,000 श्रमिक ढाका-टंगाइल राजमार्ग पर पल्ली विद्युत क्षेत्र में एकत्र हुए और सड़क पूरी तरह अवरुद्ध कर दी, जिससे दोनों दिशाओं में यातायात ठप हो गया। गाजीपुर औद्योगिक पुलिस के अधीक्षक मोहम्मद अमजद हुसैन ने बताया कि श्रमिकों के प्रदर्शन के कारण वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।
ढाका के आशुलिया क्षेत्र में भी कई फैक्ट्रियों के श्रमिक काम छोड़कर सड़क पर उतर आए और नबीनगर-चंद्रा राजमार्ग को जाम करने का प्रयास किया। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन के जरिए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। आशुलिया सर्किल के सहायक आयुक्त (भूमि) मोहिबुल्लाह अकोन ने पुष्टि की कि कबीरपुर क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने दो बार राजमार्ग अवरुद्ध करने की कोशिश की।
रविवार की हिंसा और गिरफ्तारियाँ
इससे एक दिन पहले, रविवार को गाजीपुर में श्रमिकों ने ढाका-टंगाइल राजमार्ग जाम करने के साथ-साथ कोनाबाड़ी क्षेत्र में एक पुलिस बॉक्स में आग भी लगा दी। पुलिस के अनुसार, रविवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें कई घंटों तक जारी रहीं।
तोड़फोड़, आगजनी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोप में पुलिस ने मीरपुर से 29 और गाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र से 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।
श्रमिकों की मांगें
आंदोलनकारी श्रमिक तीन प्रमुख माँगों पर अड़े हैं — न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका करना, ब्लैक लिस्टिंग प्रथा समाप्त करना, और अन्य श्रम-संबंधी सुधार। गौरतलब है कि बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग देश की कुल निर्यात आय में लगभग 80% का योगदान देता है, जिससे इस क्षेत्र की अस्थिरता का व्यापक आर्थिक असर पड़ता है।
मानवाधिकार संगठन की निंदा
फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन 'जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस' (JMBF) ने श्रमिकों — विशेषकर महिलाओं और छात्रों — के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और मनमानी गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। संगठन ने स्वतंत्र जाँच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही और हिरासत में लिए गए श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।
JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहानुर इस्लाम ने कहा, 'बढ़ती महंगाई के कारण श्रमिक बेहतर वेतन की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय बल प्रयोग और गिरफ्तारियाँ चिंता का विषय हैं।'
आगे की स्थिति
प्रशासन हालात को नियंत्रण में लाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन श्रमिक संगठनों ने संकेत दिए हैं कि जब तक सरकार और फैक्ट्री मालिक वेतन वृद्धि पर ठोस वार्ता नहीं करते, आंदोलन जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी मुद्रा दबाव का सामना कर रहा है, जिससे श्रमिक असंतोष का समाधान और भी जटिल हो गया है।