3 नवंबर 2026
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अंडरकवर स्टिंग में चौंकाने वाले खुलासे: 'रिजीम चेंज' बहस के बीच बांग्लादेश जैसे आंदोलन की 'इच्छा'

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अंडरकवर स्टिंग में चौंकाने वाले खुलासे: 'रिजीम चेंज' बहस के बीच बांग्लादेश जैसे आंदोलन की 'इच्छा'

सारांश

सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच एक अंडरकवर स्टिंग ने कथित तौर पर उन बयानों को रिकॉर्ड किया जिनमें बांग्लादेश-नेपाल जैसे हालात की 'इच्छा', प्रदर्शनों में महिलाओं को 'किले की दीवार' बनाने की रणनीति और प्रतिदिन ₹5 लाख खर्च के दावे शामिल हैं।

मुख्य बातें

3 नवंबर 2026 को सामने आए अंडरकवर स्टिंग में रिजीम चेंज बहस के बीच कई संगठनों के प्रतिनिधियों के चौंकाने वाले बयान कथित तौर पर रिकॉर्ड किए गए।
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान ने कथित तौर पर कहा, 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं।' मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन के साफवान ने कथित तौर पर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात की संभावना जताई।
प्रदर्शनों में महिलाओं को अग्रिम पंक्ति में रखने की कथित रणनीति का जिक्र साफवान ने किया।
क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम ने दावा किया कि प्रदर्शनों पर करीब ₹5 लाख प्रतिदिन खर्च हो रहे थे।
क्रांतिकारी युवा संगठन की प्रवक्ता मुदिता ने कथित तौर पर बांग्लादेश जैसे आंदोलन की इच्छा पर सहमति जताई।

देशभर में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर जारी बहस के बीच एक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर कई चौंकाने वाले बयान सामने आए हैं। 3 नवंबर 2026 को सामने आए इस स्टिंग में कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों ने संकेत दिए कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय अन्य तरीकों से सत्ता परिवर्तन की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।

मौलाना सिराज खान का बयान

मुंबई में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान से अंडरकवर रिपोर्टर ने फ्रांस जैसे हिंसक प्रदर्शनों की संभावना पर सवाल पूछा। मौलाना ने कथित तौर पर गैर-मुस्लिमों की तरफ से सड़क पर उतरने की बात करते हुए कहा, 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं।' यह बयान अब सार्वजनिक बहस का केंद्र बन गया है।

साफवान के बयान — नेपाल और बांग्लादेश का संदर्भ

मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन के प्रतिनिधि साफवान ने भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियाँ बनने की संभावना पर कहा, 'ये पक्का है कुछ तो होगा, सब कुछ लंबे वक्त तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। मुझे लगता है अगर फिर 20 जुलाई जैसा दिन आया तो नेपाल जैसे हालात हो सकते हैं।' बांग्लादेश और नेपाल के लिए तैयार रहने के सवाल पर उन्होंने कथित तौर पर कहा, 'कुछ तो करना पड़ेगा।'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन की अनुगूँज भारतीय राजनीतिक विमर्श में सुनाई दे रही है और 'रिजीम चेंज' को लेकर विभिन्न राजनीतिक खेमों में बयानबाज़ी तेज है।

प्रदर्शनों में महिलाओं को आगे रखने की कथित रणनीति

स्टिंग में प्रदर्शनों के दौरान लड़कियों को अग्रिम पंक्ति में रखने की कथित रणनीति को लेकर भी बातचीत सामने आई। साफवान ने कथित तौर पर कहा, 'हाँ, ऐसा कुछ है, वे किले की दीवार की तरह खड़ी हो जाती हैं और बाकी लोग अंदर आ जाते हैं। जब एक महिला पुरुष पुलिसकर्मी के सामने आती है तो इससे दिल्ली पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है।' आलोचकों का कहना है कि यह बयान महिलाओं को सुरक्षा-कवच के रूप में इस्तेमाल करने की सोच को उजागर करता है, जो गहरी नैतिक चिंताएँ पैदा करता है।

प्रदर्शनों के संसाधन और खर्च

क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम ने अंडरकवर रिपोर्टर को बताया कि प्रदर्शनों पर करीब ₹5 लाख प्रतिदिन खर्च हो रहे थे। भीम ने कहा, 'शुरू में ये चीज पता चल गई थी। ज्यादातर आप के फैन थे, आम आदमी से जुड़े थे।' उन्होंने बाउंसर की मौजूदगी का भी जिक्र किया। यह दावे, यदि सत्यापित हों, तो प्रदर्शनों की फंडिंग और संगठन के बारे में गंभीर सवाल उठाते हैं।

क्रांतिकारी युवा संगठन की प्रवक्ता का रुख

क्रांतिकारी युवा संगठन की प्रवक्ता मुदिता से बांग्लादेश जैसे आंदोलन की इच्छा के बारे में सवाल पूछे गए, जिस पर उन्होंने कथित तौर पर सहमति जताई। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ देश में भड़काऊ गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रही हैं। संबंधित संगठनों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। आगे यह देखना होगा कि इन खुलासों पर सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ क्या कदम उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या ज़मीनी स्तर पर कुछ संगठन सक्रिय रणनीति बना रहे हैं? प्रदर्शनों में ₹5 लाख प्रतिदिन खर्च के दावे, यदि सत्यापित हों, तो फंडिंग के स्रोत और पारदर्शिता पर जाँच की माँग करते हैं। महिलाओं को 'किले की दीवार' के रूप में इस्तेमाल करने की कथित रणनीति न केवल कानूनी बल्कि नैतिक दृष्टि से भी गहरी चिंता का विषय है। मुख्यधारा की कवरेज इन बयानों की सनसनी पर केंद्रित रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि सरकार और जाँच एजेंसियाँ इन खुलासों पर अब क्या ठोस कार्रवाई करती हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन क्या है और इसमें क्या सामने आया?
यह एक अंडरकवर पत्रकारिता अभियान है जिसमें 3 नवंबर 2026 को विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के कथित बयान रिकॉर्ड किए गए। इनमें बांग्लादेश-नेपाल जैसे हालात की इच्छा, प्रदर्शनों की रणनीति और फंडिंग से जुड़े दावे शामिल हैं।
मौलाना सिराज खान ने स्टिंग में क्या कहा?
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान ने कथित तौर पर कहा, 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं।' यह बयान फ्रांस जैसे हिंसक प्रदर्शनों की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में आया।
प्रदर्शनों में महिलाओं को आगे रखने की रणनीति क्या है?
स्टिंग में साफवान ने कथित तौर पर बताया कि महिलाओं को अग्रिम पंक्ति में 'किले की दीवार' की तरह खड़ा किया जाता है ताकि पुलिस की कार्रवाई में नकारात्मक छवि बने। आलोचकों का कहना है कि यह महिलाओं का उपकरण की तरह इस्तेमाल है।
प्रदर्शनों में प्रतिदिन ₹5 लाख खर्च का दावा किसने किया?
क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम ने अंडरकवर रिपोर्टर को बताया कि प्रदर्शनों पर करीब ₹5 लाख प्रतिदिन खर्च हो रहे थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी के समर्थकों और बाउंसर की मौजूदगी का भी जिक्र किया, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
'रिजीम चेंज' की बहस का भारतीय राजनीति में क्या संदर्भ है?
बांग्लादेश में 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद भारत में भी 'रिजीम चेंज' शब्द राजनीतिक विमर्श में आया। विभिन्न विपक्षी और सामाजिक समूह इस शब्द का उपयोग करते रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे लोकतंत्र-विरोधी सोच बताता है।
राष्ट्र प्रेस
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