16 अक्टूबर 2026
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प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर NDA नेताओं का पलटवार, कहा — पैसे देकर नहीं बदलती सत्ता

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प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर NDA नेताओं का पलटवार, कहा — पैसे देकर नहीं बदलती सत्ता

सारांश

प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा सांसद और नेताओं ने इसे विदेशी ताकतों की मदद से अस्थिरता फैलाने की साजिश बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के खिलाफ विरोध के बीच यह बयानबाज़ी लोकतंत्र बनाम 'रिजीम चेंज' की बहस में बदल गई है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर NDA नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को तीखा पलटवार किया।
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा — 'कुछ पैसा देकर लोगों को सड़क पर उतारने से कुछ नहीं होने वाला।' भाजपा नेता किलारू दिलीप कुमार ने विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित साजिश बताया और नेहा बोहरा की 'खोपड़ी वाली टी-शर्ट' का हवाला दिया।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भूषण की सोच को 'नक्सली मानसिकता' करार दिया।
यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरुद्ध जारी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उभरा है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' संबंधी बयान पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को तीखा प्रतिवाद किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरुद्ध जारी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में यह बयानबाज़ी तेज़ हुई है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।

राहुल सिन्हा का पलटवार

कोलकाता से भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि सड़क पर कुछ लोगों को जुटाने भर से जन आंदोलन नहीं बनता। उन्होंने कहा, 'आवाज उसको कहते हैं जिसका साथ जनता दे। इनके साथ कोई जनता नहीं है। कुछ पैसा देकर लोगों को सड़क पर उतारने से कुछ नहीं होने वाला है।' सिन्हा ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान से सहमति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का इस्तेमाल चुनाव सुधार की माँग नहीं, बल्कि अस्थिरता फैलाकर सत्ता हथियाने की नीयत दर्शाता है।

सिन्हा ने आगे कहा, 'राजनाथ सिंह ने एकदम सही बात कही है। ये लोग देश को सुधारना नहीं चाहते, बल्कि आंदोलन करके देश को बिगाड़ना चाहते हैं और वो भी विदेशी ताकतों की सहायता लेकर। लेकिन बांग्लादेश में जो हुआ, नेपाल या श्रीलंका में जो हुआ, वह भारत में नहीं हो सकता। क्योंकि भारत में लोकतंत्र है और देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।'

विजयवाड़ा से भाजपा नेता का आरोप

विजयवाड़ा में भाजपा नेता किलारू दिलीप कुमार ने इस पूरे विरोध को सुनियोजित साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले नेहा बोहरा ने खोपड़ी वाली टी-शर्ट पहनी थी, जो खून-खराबे और बांग्लादेश की तर्ज पर सरकार बदलने का प्रतीक है। इसके बाद प्रशांत भूषण ने उसी अंदाज़ में सरकार बदलने की माँग की है।'

दिलीप कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारें मतपत्र से बदलती हैं, सड़क से नहीं। उन्होंने कहा, 'सरकारें मतदान के ज़रिए बदली जाती हैं। अगर उन्हें आलोचना करनी है तो उन्हें पूरी आज़ादी है, लेकिन जहाँ जनता लोकतंत्र के तहत अपने प्रतिनिधि चुनती है, वहाँ वे सरकार बदलने की माँग नहीं कर सकते। यहाँ बांग्लादेश, पाकिस्तान या नेपाल वाला तरीका नहीं चलेगा।'

रांची से भाजपा प्रवक्ता ने लगाया गंभीर आरोप

रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रशांत भूषण की सोच को 'नक्सली मानसिकता' करार दिया। उन्होंने कहा, 'ये नक्सलियों की सोच है। जब आप लोकप्रिय जनादेश से चुनाव में नहीं जीत पाते हैं, तो रिजीम चेंज की बात करते हैं।' शाहदेव ने दावा किया कि भूषण के एक वायरल वीडियो में वे देश में 'क्रांति' और 'खून-खराबे' की वकालत करते दिखे — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरुद्ध देशभर में धरना-प्रदर्शन जारी हैं। आलोचकों का तर्क है कि SIR प्रक्रिया मतदाता सूचियों में हेरफेर का माध्यम बन सकती है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को निराधार बताता है। 'रिजीम चेंज' वाले बयान ने इस पूरे राजनीतिक विमर्श को एक नई धार दे दी है।

आगे की स्थिति

भाजपा और उसके सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि NDA इस मुद्दे को विपक्ष की 'लोकतंत्र-विरोधी मानसिकता' के रूप में राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करेगा। प्रशांत भूषण या विपक्षी नेताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'नक्सली मानसिकता' और 'विदेशी ताकत' जैसे शब्दों का बार-बार प्रयोग बताता है कि BJP इस मुद्दे को चुनावी तर्कों से परे एक राष्ट्रवादी आख्यान में बदलना चाहती है। असली सवाल — SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूचियों की शुद्धता — इस शोर में दब जाने का जोखिम है। प्रशांत भूषण के बयान की शब्दावली पर बहस होनी चाहिए, लेकिन उस बहस को मूल मुद्दे से ध्यान हटाने का औज़ार नहीं बनने देना चाहिए।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर विवाद क्यों हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरुद्ध विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में 'रिजीम चेंज' शब्द का प्रयोग किया, जिसे भाजपा नेताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बताया। इस बयान के बाद NDA नेताओं ने देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध क्यों हो रहा है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर आलोचकों का कहना है कि इससे मतदाता सूचियों में हेरफेर हो सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, हालाँकि चुनाव आयोग इन आरोपों को निराधार बताता है।
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने प्रशांत भूषण पर क्या कहा?
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि सड़क पर कुछ लोगों को जुटाने से जन आंदोलन नहीं बनता और 'कुछ पैसा देकर लोगों को सड़क पर उतारने से कुछ नहीं होने वाला।' उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान से सहमति जताते हुए विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रशांत भूषण पर क्या आरोप लगाए?
रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रशांत भूषण की सोच को 'नक्सली मानसिकता' बताया। उन्होंने दावा किया कि भूषण के एक वायरल वीडियो में वे 'क्रांति' और 'खून-खराबे' की बात करते दिखे — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
भाजपा नेताओं ने बांग्लादेश और नेपाल का उल्लेख क्यों किया?
कई भाजपा नेताओं ने बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हुए सत्ता परिवर्तनों का संदर्भ देते हुए चेतावनी दी कि भारत में ऐसा संभव नहीं होगा। उनका तर्क था कि भारत में मज़बूत लोकतंत्र और जनादेश है, इसलिए सड़क पर दबाव बनाकर सरकार नहीं बदली जा सकती।
राष्ट्र प्रेस
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