प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर NDA नेताओं का पलटवार, कहा — पैसे देकर नहीं बदलती सत्ता
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' संबंधी बयान पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को तीखा प्रतिवाद किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरुद्ध जारी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में यह बयानबाज़ी तेज़ हुई है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।
राहुल सिन्हा का पलटवार
कोलकाता से भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि सड़क पर कुछ लोगों को जुटाने भर से जन आंदोलन नहीं बनता। उन्होंने कहा, 'आवाज उसको कहते हैं जिसका साथ जनता दे। इनके साथ कोई जनता नहीं है। कुछ पैसा देकर लोगों को सड़क पर उतारने से कुछ नहीं होने वाला है।' सिन्हा ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान से सहमति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का इस्तेमाल चुनाव सुधार की माँग नहीं, बल्कि अस्थिरता फैलाकर सत्ता हथियाने की नीयत दर्शाता है।
सिन्हा ने आगे कहा, 'राजनाथ सिंह ने एकदम सही बात कही है। ये लोग देश को सुधारना नहीं चाहते, बल्कि आंदोलन करके देश को बिगाड़ना चाहते हैं और वो भी विदेशी ताकतों की सहायता लेकर। लेकिन बांग्लादेश में जो हुआ, नेपाल या श्रीलंका में जो हुआ, वह भारत में नहीं हो सकता। क्योंकि भारत में लोकतंत्र है और देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।'
विजयवाड़ा से भाजपा नेता का आरोप
विजयवाड़ा में भाजपा नेता किलारू दिलीप कुमार ने इस पूरे विरोध को सुनियोजित साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले नेहा बोहरा ने खोपड़ी वाली टी-शर्ट पहनी थी, जो खून-खराबे और बांग्लादेश की तर्ज पर सरकार बदलने का प्रतीक है। इसके बाद प्रशांत भूषण ने उसी अंदाज़ में सरकार बदलने की माँग की है।'
दिलीप कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारें मतपत्र से बदलती हैं, सड़क से नहीं। उन्होंने कहा, 'सरकारें मतदान के ज़रिए बदली जाती हैं। अगर उन्हें आलोचना करनी है तो उन्हें पूरी आज़ादी है, लेकिन जहाँ जनता लोकतंत्र के तहत अपने प्रतिनिधि चुनती है, वहाँ वे सरकार बदलने की माँग नहीं कर सकते। यहाँ बांग्लादेश, पाकिस्तान या नेपाल वाला तरीका नहीं चलेगा।'
रांची से भाजपा प्रवक्ता ने लगाया गंभीर आरोप
रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रशांत भूषण की सोच को 'नक्सली मानसिकता' करार दिया। उन्होंने कहा, 'ये नक्सलियों की सोच है। जब आप लोकप्रिय जनादेश से चुनाव में नहीं जीत पाते हैं, तो रिजीम चेंज की बात करते हैं।' शाहदेव ने दावा किया कि भूषण के एक वायरल वीडियो में वे देश में 'क्रांति' और 'खून-खराबे' की वकालत करते दिखे — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरुद्ध देशभर में धरना-प्रदर्शन जारी हैं। आलोचकों का तर्क है कि SIR प्रक्रिया मतदाता सूचियों में हेरफेर का माध्यम बन सकती है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को निराधार बताता है। 'रिजीम चेंज' वाले बयान ने इस पूरे राजनीतिक विमर्श को एक नई धार दे दी है।
आगे की स्थिति
भाजपा और उसके सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि NDA इस मुद्दे को विपक्ष की 'लोकतंत्र-विरोधी मानसिकता' के रूप में राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करेगा। प्रशांत भूषण या विपक्षी नेताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।