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मोहन भागवत के विजयादशमी बयानों पर भाजपा नेताओं का समर्थन, बोले- भारत में रिजीम चेंज नामुमकिन

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मोहन भागवत के विजयादशमी बयानों पर भाजपा नेताओं का समर्थन, बोले- भारत में रिजीम चेंज नामुमकिन

सारांश

नागपुर विजयादशमी मंच पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का 'रिजीम चेंज' पर हमला और OTT विनियमन की माँग — और BJP का एकजुट समर्थन। यह महज बयानबाजी नहीं, बल्कि संघ परिवार की उस बड़ी रणनीतिक लड़ाई का हिस्सा है जो सांस्कृतिक, डिजिटल और राजनीतिक मोर्चों पर एक साथ लड़ी जा रही है।

मुख्य बातें

मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव पर 'रिजीम चेंज' को नकारा और पश्चिमी प्रभाव को सांस्कृतिक खतरा बताया।
भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण की माँग करते हुए कहा कि शासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और संजय राउत के बयानों का उल्लेख करते हुए 'अराजकता फैलाने की साजिश' का आरोप लगाया।
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राहुल गांधी चुनावी राह छोड़ हिंसा का सहारा ले रहे हैं — यह एक राजनीतिक आरोप है।
भाजपा प्रवक्ता अजय अलोक ने कहा कि 140 करोड़ में से 110 करोड़ हिंदू देश की ताकत हैं, इसलिए रिजीम चेंज असंभव है।
भाजपा एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने RSS को वैश्विक संगठन बताते हुए भागवत के विश्लेषण को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर आधारित कहा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर 'रिजीम चेंज' की अवधारणा और युवाओं पर डिजिटल सामग्री के प्रभाव को लेकर जो बयान दिए, उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर समर्थन दिया है। नेताओं ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी बाहरी या आंतरिक प्रयास देश को अस्थिर नहीं कर सकता।

भागवत ने क्या कहा

भागवत ने अपने संबोधन में कहा, 'पश्चिम से एक आंधी चली है, जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले न हुआ, आज भी नहीं होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने के लिए 'आसुरी ताकतें' योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही हैं, और क्षुद्र सत्ता-स्वार्थ के चलते कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं।

डॉ. भागवत ने नई पीढ़ी पर डिजिटल सामग्री के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि युवा विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को उचित-अनुचित का विवेक किए बिना ग्रहण कर लेते हैं। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शासन-प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि पश्चिमी देशों से सीख लेकर या उनके साथ मिलकर भारत में भी उसी प्रकार के प्रयास करने की कोशिश की जा रही है। प्रशांत भूषण ने कहा कि रिजीम चेंज करेंगे। योगेंद्र यादव ने कहा कि अब सड़कों पर लड़ाई होगी, पार्लियामेंट में चर्चा नहीं होगी। उसके बाद नेहा बोरा ने कहा कि हम बांग्लादेश से प्रेरणा लेते हैं। अब संजय राउत ने कहा कि दुनिया से सबक सीखना चाहिए, जहां पर सुप्रीम कोर्ट को जला दिया गया, तो ये सबके-सब देश में बवाल खड़ा करना चाहते हैं। भारत में लोग लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास करते हैं, इसलिए भारत में ऐसी परिस्थिति नहीं आएगी।'

आरपी सिंह ने यह भी कहा, 'मोहन भागवत ने बिल्कुल ठीक कहा कि आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए। धरना, प्रदर्शन करने की छूट है, परंतु अंततः उसका समाधान क्या होगा — उस पर चर्चा होनी चाहिए, न कि सिर्फ आंदोलन के लिए आंदोलन।'

अन्य भाजपा नेताओं का रुख

भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'आरएसएस प्रमुख का यह कहना सही है कि जो लोग सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत हैं।' उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे वोटों से नहीं जीत सकते, इसलिए कथित तौर पर हिंसा और अराजकता का रास्ता अपना रहे हैं।

भाजपा नेता गुरु प्रकाश पासवान ने OTT और नशे की लत को युवाओं के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री को नियमित करने के लिए ठोस व्यवस्थाएं होनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता अजय अलोक ने कहा कि रिजीम चेंज का प्रयोग भारत में कभी सफल नहीं होगा, क्योंकि 140 करोड़ की आबादी में 110 करोड़ हिंदू देश की ताकत हैं।

RSS की व्यापक भूमिका पर जोर

भाजपा एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने कहा कि RSS केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सक्रिय है। उनके अनुसार, भागवत की टिप्पणियाँ वैश्विक घटनाक्रमों की गहरी समझ पर आधारित हैं और पूरे देश ने उन्हें ध्यान से सुना है।

आगे क्या होगा

विजयादशमी उत्सव में दिए गए भागवत के बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। BJP के इस सामूहिक समर्थन से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में 'रिजीम चेंज' की अवधारणा और OTT विनियमन का मुद्दा सार्वजनिक विमर्श में और प्रमुखता पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश है जो विपक्षी आंदोलनों को 'विदेश-प्रेरित अस्थिरता' के रूप में परिभाषित करने की कोशिश करता है। गौरतलब है कि RSS प्रमुख का विजयादशमी भाषण परंपरागत रूप से संघ परिवार का वार्षिक 'एजेंडा सेटिंग' अवसर होता है — इस बार OTT विनियमन की माँग एक नया डिजिटल मोर्चा खोलती है। आलोचकों का कहना है कि 'आसुरी ताकतें' और 'पश्चिमी आंधी' जैसी भाषा असहमति को देशद्रोह से जोड़ने का जोखिम उठाती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि OTT नियमन की माँग कानूनी ढाँचे में कैसे तब्दील होगी और उसकी सीमा कहाँ तय होगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने विजयादशमी पर रिजीम चेंज के बारे में क्या कहा?
भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव में कहा कि 'रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी' — यह दावा पहले भी गलत साबित हुआ है और आज भी नहीं होगा। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए पश्चिम से आ रही 'सांस्कृतिक आंधी' को भारत के लिए खतरा बताया।
भाजपा नेताओं ने भागवत के बयानों का समर्थन क्यों किया?
भाजपा नेताओं ने भागवत के बयानों को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती की पुष्टि बताते हुए समर्थन दिया। उनका तर्क था कि विपक्षी नेताओं के कुछ बयान 'अराजकता फैलाने' का प्रयास दर्शाते हैं और संघ प्रमुख ने सही समय पर सही चेतावनी दी है।
भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म पर क्या आपत्ति जताई?
भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी OTT सहित विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली सामग्री को बिना विवेक के ग्रहण कर रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि इस पर अनुशासन और प्रतिबंध संबंधी नीतिगत विचार किया जाए।
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को समझ आ गया है कि वे वोटों के जरिए नहीं जीत सकते, इसलिए वे कथित तौर पर हिंसा और अराजकता का रास्ता अपना रहे हैं। यह एक राजनीतिक आरोप है जिस पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
RSS का विजयादशमी भाषण राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
विजयादशमी पर RSS सरसंघचालक का वार्षिक भाषण परंपरागत रूप से संघ परिवार के एजेंडे की दिशा तय करता है। इस बार रिजीम चेंज, OTT विनियमन और वैश्विक सांस्कृतिक खतरे — तीन विषयों पर भागवत की स्पष्ट राय ने तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं।
राष्ट्र प्रेस
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