मोहन भागवत के विजयादशमी बयानों पर भाजपा नेताओं का समर्थन, बोले- भारत में रिजीम चेंज नामुमकिन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर 'रिजीम चेंज' की अवधारणा और युवाओं पर डिजिटल सामग्री के प्रभाव को लेकर जो बयान दिए, उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर समर्थन दिया है। नेताओं ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी बाहरी या आंतरिक प्रयास देश को अस्थिर नहीं कर सकता।
भागवत ने क्या कहा
भागवत ने अपने संबोधन में कहा, 'पश्चिम से एक आंधी चली है, जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले न हुआ, आज भी नहीं होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने के लिए 'आसुरी ताकतें' योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही हैं, और क्षुद्र सत्ता-स्वार्थ के चलते कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं।
डॉ. भागवत ने नई पीढ़ी पर डिजिटल सामग्री के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि युवा विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को उचित-अनुचित का विवेक किए बिना ग्रहण कर लेते हैं। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शासन-प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि पश्चिमी देशों से सीख लेकर या उनके साथ मिलकर भारत में भी उसी प्रकार के प्रयास करने की कोशिश की जा रही है। प्रशांत भूषण ने कहा कि रिजीम चेंज करेंगे। योगेंद्र यादव ने कहा कि अब सड़कों पर लड़ाई होगी, पार्लियामेंट में चर्चा नहीं होगी। उसके बाद नेहा बोरा ने कहा कि हम बांग्लादेश से प्रेरणा लेते हैं। अब संजय राउत ने कहा कि दुनिया से सबक सीखना चाहिए, जहां पर सुप्रीम कोर्ट को जला दिया गया, तो ये सबके-सब देश में बवाल खड़ा करना चाहते हैं। भारत में लोग लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास करते हैं, इसलिए भारत में ऐसी परिस्थिति नहीं आएगी।'
आरपी सिंह ने यह भी कहा, 'मोहन भागवत ने बिल्कुल ठीक कहा कि आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए। धरना, प्रदर्शन करने की छूट है, परंतु अंततः उसका समाधान क्या होगा — उस पर चर्चा होनी चाहिए, न कि सिर्फ आंदोलन के लिए आंदोलन।'
अन्य भाजपा नेताओं का रुख
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'आरएसएस प्रमुख का यह कहना सही है कि जो लोग सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत हैं।' उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे वोटों से नहीं जीत सकते, इसलिए कथित तौर पर हिंसा और अराजकता का रास्ता अपना रहे हैं।
भाजपा नेता गुरु प्रकाश पासवान ने OTT और नशे की लत को युवाओं के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री को नियमित करने के लिए ठोस व्यवस्थाएं होनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता अजय अलोक ने कहा कि रिजीम चेंज का प्रयोग भारत में कभी सफल नहीं होगा, क्योंकि 140 करोड़ की आबादी में 110 करोड़ हिंदू देश की ताकत हैं।
RSS की व्यापक भूमिका पर जोर
भाजपा एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने कहा कि RSS केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सक्रिय है। उनके अनुसार, भागवत की टिप्पणियाँ वैश्विक घटनाक्रमों की गहरी समझ पर आधारित हैं और पूरे देश ने उन्हें ध्यान से सुना है।
आगे क्या होगा
विजयादशमी उत्सव में दिए गए भागवत के बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। BJP के इस सामूहिक समर्थन से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में 'रिजीम चेंज' की अवधारणा और OTT विनियमन का मुद्दा सार्वजनिक विमर्श में और प्रमुखता पाएगा।