20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

RSS शताब्दी विजयादशमी: भागवत बोले — रिजीम चेंज से हालात नहीं बदलते, भारत को एकजुट रहना होगा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
RSS शताब्दी विजयादशमी: भागवत बोले — रिजीम चेंज से हालात नहीं बदलते, भारत को एकजुट रहना होगा

सारांश

RSS के शताब्दी विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक भागवत ने पश्चिम से उठती 'आसुरी आंधी' की बात की, फ्रांस बांग्लादेश का हवाला देकर रिजीम चेंज की राजनीति को नकारा और एकजुट भारत का आह्वान किया। यह संघ के 100वें वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण वैचारिक संदेश है।

मुख्य बातें

मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में संबोधन दिया।
भागवत ने कहा कि फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश के उदाहरण बताते हैं कि रिजीम चेंज से परिस्थितियाँ कभी नहीं बदलतीं।
उन्होंने भारत की विविधता को शक्ति बताते हुए एकजुटता का आह्वान किया — "हम जब भी बंटे, कमजोर हुए।" कैप्टन स्मित मच्छार के कार्य को 'हिंदू स्वभाव' का स्वाभाविक उदाहरण बताया।
21 प्रांतों के 210 जिलों के 1,296 विद्यालयों में स्वयंसेवकों की भागीदारी से छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार का उल्लेख किया।
स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष को इस वर्ष की विशेष स्मृतियाँ बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष के श्री विजयादशमी उत्सव में देश, समाज और वैश्विक परिदृश्य पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रिजीम चेंज से कभी परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं और भारत की शक्ति उसकी एकता में निहित है। कार्यक्रम की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन से हुई, जिसमें भागवत स्वयं शामिल रहे।

रिजीम चेंज पर सीधा वार

भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में जारी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा, "एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।" उनके अनुसार भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने के लिए आसुरी ताकतें सुनियोजित तरीके से काम कर रही हैं, और क्षुद्र सत्ता स्वार्थ के चलते कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इस मुहिम का हिस्सा बन जाते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई लोकतांत्रिक देशों में सत्ता परिवर्तन की माँग को लेकर बड़े आंदोलन उभरे हैं। भागवत ने इस प्रवृत्ति को सांस्कृतिक और सामाजिक संस्कारों पर पश्चिमी हस्तक्षेप से जोड़ा।

भारत की एकता और विविधता

संघ प्रमुख ने भारत की विविधता को उसकी ताकत बताते हुए कहा कि देश में अलग अलग पंथ, प्रांत, जातियाँ, भाषाएँ, खान पान और रीति रिवाज हैं, किंतु "भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है।" उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, "हम जब भी बंटे, कमजोर हुए।" उनके अनुसार भारत पहले भी एकता के बल पर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी यही मार्ग है।

हिंदू स्वभाव और सनातन दृष्टि

भागवत ने हिंदू भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें कोई विशिष्ट पूजा पद्धति, खान पान या जाति भाषा की अनिवार्यता नहीं है। उन्होंने कहा, "सबसे ऊपर आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व ही सनातन दृष्टि का लक्षण है।" उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्य में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं था — बल्कि वह उनके भीतर के संस्कारों का स्वाभाविक प्रकटीकरण था, और यही हिंदू स्वभाव है।

गौरतलब है कि भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठित हिंदू समाज की बात करना सर्वपंथ समादर के विरुद्ध नहीं है, बल्कि संघ का कार्य समावेशिता के संस्कार से प्रेरित है।

स्मरणीय हस्तियाँ और शताब्दी वर्ष

भागवत ने इस वर्ष को दो महान हस्तियों की स्मृति का वर्ष बताया — स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी महाराज की जन्म शताब्दी। उन्होंने राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 'हिंदू मेला' और स्वदेशी मेलों के जरिए स्व बोध जगाने का प्रयास किया था।

आंदोलन और ग्रामीण शिक्षा

भागवत ने आंदोलनों पर संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि व्यवस्था की कमियों के कारण आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन वे समाधान देने के लिए होने चाहिए, राजनीति का साधन नहीं बनने चाहिए। उन्होंने ग्रामीण शिक्षा में स्वयंसेवकों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि 21 प्रांतों के 210 जिलों के 1,296 विद्यालयों में स्वयंसेवकों की सहभागिता से छात्रों की उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार आया है।

शताब्दी वर्ष के इस उत्सव में दिए गए भागवत के संबोधन को संघ के आगामी सांगठनिक एजेंडे की दिशा माना जा रहा है — जहाँ राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक आत्मबोध और वैश्विक चुनौतियों का सामना केंद्रीय विषय रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारत के पड़ोस में हाल के राजनीतिक उथल पुथल की सीधी आलोचना है। मुख्यधारा की रिपोर्टिंग अक्सर इस भाषण को केवल हिंदुत्व एजेंडे के चश्मे से देखती है, जबकि भागवत ने ग्रामीण शिक्षा के ठोस आँकड़े और वैश्विक सामाजिक अस्थिरता का व्यापक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया। असली सवाल यह है कि 'एकजुट भारत' के आह्वान को क्या सामाजिक समरसता की ठोस पहल में बदला जाएगा, या यह केवल वैचारिक आधार मजबूत करने का अभ्यास है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RSS विजयादशमी 2026 पर मोहन भागवत ने क्या कहा?
सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में RSS के शताब्दी विजयादशमी उत्सव में कहा कि रिजीम चेंज से परिस्थितियाँ कभी नहीं बदलतीं और भारत की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश के उदाहरण देकर पश्चिम से आ रही 'आसुरी आंधी' की चेतावनी दी।
भागवत ने रिजीम चेंज पर क्या टिप्पणी की?
भागवत ने सीधे कहा कि 'रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी' यह दावा झूठा है — 'पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।' उन्होंने इसे पश्चिम से संचालित एक सुनियोजित अभियान बताया जो भद्रता, व्यवस्था और सांस्कृतिक संस्कारों को नष्ट करना चाहता है।
RSS का शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2025 26 में अपने 100 वर्ष पूरे किए हैं, इसलिए यह विजयादशमी उत्सव संगठन के शताब्दी वर्ष का सबसे बड़ा वैचारिक आयोजन है। इसमें सरसंघचालक का भाषण RSS की भावी दिशा और राष्ट्रीय एजेंडे को स्थापित करता है।
भागवत ने हिंदू स्वभाव को कैसे परिभाषित किया?
भागवत ने कहा कि हिंदू स्वभाव में कोई विशिष्ट पूजा पद्धति, खान पान या जाति की अनिवार्यता नहीं है — इसका मूल आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व है। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार के कार्य को इसी स्वभाव का उदाहरण बताया।
RSS ने ग्रामीण शिक्षा में कितना काम किया है?
भागवत ने बताया कि 21 प्रांतों के 210 जिलों के 1,296 विद्यालयों में स्वयंसेवकों और ग्रामीणों की सहभागिता से छात्रों की उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार देखा गया है। यह संघ के सेवा कार्यों का एक ठोस सांख्यिकीय उदाहरण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले