21 अक्टूबर 2026
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिले इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच, भारत-इजरायल संबंध मजबूत करने पर बनी सहमति

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिले इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच, भारत-इजरायल संबंध मजबूत करने पर बनी सहमति

सारांश

नागपुर में आरएसएस के 101वें विजयादशमी समारोह के दौरान इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच और सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के बीच मुलाकात हुई। दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच साझेदारी, गलत सूचनाओं और चरमपंथ जैसी साझा चुनौतियों पर चर्चा हुई — यह मेलजोल भारत-इजरायल संबंधों को नागरिक समाज स्तर तक ले जाने का संकेत है।

मुख्य बातें

इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने 21 अक्टूबर 2026 को नागपुर में आरएसएस के 101वें विजयादशमी समारोह के दौरान सरसंघचालक डॉ.
मोहन भागवत से मुलाकात की।
बैठक में भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने, संस्थागत सहयोग बढ़ाने और जन-स्तरीय संपर्क को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई।
भागवत को दोनों प्राचीन सभ्यताओं की साझेदारी का प्रतीक स्मृति चिह्न भेंट किया।
महावाणिज्यदूत ने गलत सूचनाओं, विरोधी विमर्श और चरमपंथ को भारत और इजरायल की साझा चुनौतियाँ बताया।
इससे पहले रेवाच ने मुंबई में बिलबोर्ड लगाकर विमान अपहरण नाकाम करने वाले कैप्टन स्मित को सम्मानित किया था और उनके लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान की पैरवी की थी।

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 101वें विजयादशमी समारोह के दौरान बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को भारत के मध्य-पश्चिम क्षेत्र में इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से विशेष मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने तथा संस्थागत सहयोग को विस्तार देने पर विचार-विमर्श हुआ।

मुलाकात का विवरण और चर्चा के मुद्दे

महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि डॉ. मोहन भागवत के साथ हुई बातचीत में भारत और इजरायल के बीच सौहार्दपूर्ण एवं सुदृढ़ संबंधों को केंद्र में रखा गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर सहयोग बढ़ाने और जन-स्तर पर परस्पर संपर्क को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर रेवाच ने डॉ. भागवत को एक विशेष स्मृति चिह्न भेंट किया, जो दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक साझेदारी का प्रतीक है।

साझा चुनौतियों पर जताई चिंता

महावाणिज्यदूत ने अपने बयान में कहा कि भारत और इजरायल दोनों को गलत सूचनाओं, विरोधी विमर्श और चरमपंथ जैसी साझा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जुड़े रहना और विश्व के सामने अपनी कहानियाँ स्वयं प्रस्तुत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन जुटाने में सक्रिय है और भारत के साथ उसके रणनीतिक संबंध लगातार गहरे होते रहे हैं।

पृष्ठभूमि: कैप्टन स्मित को सम्मान

गौरतलब है कि इससे पहले भी याविन रेवाच ने मुंबई में बिलबोर्ड लगाकर कैप्टन स्मित की बहादुरी को सार्वजनिक रूप से सम्मान दिया था। रेवाच ने बताया था कि गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन स्मित ने इजरायली यात्रियों की जान बचाई और विमान अपहरण की एक कोशिश को नाकाम किया। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी राय में कैप्टन स्मित को उनके साहस के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।

भारत-इजरायल संबंधों का संदर्भ

भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंध 1992 में औपचारिक रूप से स्थापित हुए थे और तब से दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। आरएसएस जैसे प्रमुख सांस्कृतिक संगठन के प्रमुख के साथ इजरायली प्रतिनिधि की यह बैठक दोनों देशों के नागरिक समाज स्तर पर संपर्क को भी रेखांकित करती है।

आगे की दिशा

इस मुलाकात के बाद रेवाच ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच संस्थागत और जन-स्तरीय संपर्क को और व्यवस्थित रूप देने की दिशा में आने वाले समय में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यह बैठक भारत-इजरायल संबंधों में एक नई सांस्कृतिक और सामाजिक परत जोड़ने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस स्तर की कूटनीतिक सक्रियता भारत-इजरायल संबंधों को केवल सरकारी चैनलों से आगे ले जाने का संकेत देती है। गलत सूचनाओं और चरमपंथ पर जताई गई 'साझा चिंता' एक ऐसा विमर्श है जिसे दोनों देश अपने-अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में अलग-अलग तरीके से परिभाषित करते हैं — इस अभिसरण की सीमाएँ और निहितार्थ स्पष्ट होने अभी बाकी हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच और मोहन भागवत की मुलाकात कब और कहाँ हुई?
यह मुलाकात 21 अक्टूबर 2026 को नागपुर में आरएसएस के 101वें विजयादशमी समारोह के दौरान हुई। इजरायल के महावाणिज्यदूत (मध्य-पश्चिम भारत) याविन रेवाच ने सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से यह भेंट की।
इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में भारत और इजरायल के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने, संस्थागत सहयोग बढ़ाने तथा जन-स्तरीय संपर्क को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई। गलत सूचनाओं, विरोधी विमर्श और चरमपंथ जैसी साझा चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया।
याविन रेवाच ने डॉ. मोहन भागवत को क्या भेंट किया?
महावाणिज्यदूत रेवाच ने डॉ. भागवत को एक विशेष स्मृति चिह्न भेंट किया, जो दोनों प्राचीन सभ्यताओं — भारत और इजरायल — के बीच ऐतिहासिक साझेदारी का प्रतीक बताया गया।
कैप्टन स्मित कौन हैं और उनका इस संदर्भ में क्या उल्लेख है?
कैप्टन स्मित एक भारतीय पायलट हैं, जिन्होंने गंभीर चोटों के बावजूद इजरायली यात्रियों की जान बचाई और विमान अपहरण की कोशिश को नाकाम किया। महावाणिज्यदूत रेवाच ने मुंबई में बिलबोर्ड लगाकर उनकी बहादुरी को सम्मानित किया और उनके लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान की पैरवी की थी।
भारत-इजरायल संबंध कितने पुराने हैं और इनका वर्तमान स्वरूप क्या है?
भारत और इजरायल के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। आरएसएस जैसे प्रमुख सांस्कृतिक संगठन के साथ यह कूटनीतिक संपर्क नागरिक समाज स्तर पर संबंधों को विस्तार देने का प्रयास दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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