23 अक्टूबर 2026
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मनोज झा का पीएम मोदी पर पलटवार: 'यह गांधी का देश है, गांधी के तरीकों से ही सब होगा'

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मनोज झा का पीएम मोदी पर पलटवार: 'यह गांधी का देश है, गांधी के तरीकों से ही सब होगा'

सारांश

RJD सांसद मनोज झा ने पीएम मोदी के 'अव्यवस्था और रिजीम चेंज' वाले बयान को सीधे चुनौती दी — कहा कि बेरोज़गारी और असमानता पर चुप रहने वाली सरकार को गांधीवादी विरोध को कोसने का अधिकार नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद में भी सरकार पर 'नैतिकता की हत्या' का आरोप।

मुख्य बातें

RJD सांसद मनोज झा ने 23 अक्टूबर 2026 को पटना में पीएम मोदी के 'रिजीम चेंज' बयान पर तीखा पलटवार किया।
झा ने कहा — 'यह गांधी का देश है और गांधी के तरीकों से ही सब कुछ होगा'; बेरोज़गारी और असमानता पर सरकार की चुप्पी को निशाना बनाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रक्रियागत जवाब को झा ने 'संवैधानिक नैतिकता का कत्ल' बताया।
उत्तर प्रदेश और बिहार के विधान परिषद चुनाव में एसटीएफ की तैनाती पर BJP पर हमला; आरोप लगाया कि 'बिना अतिरिक्त मदद के वे लड़ नहीं सकते।' इंडिया गठबंधन का आरोप — सरकार विरोध को प्रक्रियात्मक तर्कों की आड़ में दबाने की कोशिश कर रही है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने 23 अक्टूबर 2026 को पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मोदी ने इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शनों को देश में 'अव्यवस्था फैलाने' और 'सत्ता परिवर्तन के सपने' देखने से जोड़ा था। झा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जनता के बीच गलत धारणा फैला रहे हैं।

मनोज झा का मुख्य तर्क

मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री विदेश दौरों पर जाकर कहते हैं कि वे 'गांधी और बुद्ध के देश' से आए हैं, लेकिन देश के भीतर उनकी सरकार गांधीवादी मूल्यों को नहीं अपनाती।

झा ने तीखे शब्दों में कहा, 'अगर आपका पूरा रिजीम आर्किटेक्चर बेरोज़गारी और असमानता की बात नहीं करता, तो लोग क्या करें? क्या आपके ऑर्केस्ट्रा में शामिल हो जाएं? लोग जंतर-मंतर नहीं जाएंगे तो कहाँ जाएंगे? यह गांधी का देश है और गांधी के तरीकों से ही सब कुछ होगा, आपको इसे स्वीकार करना होगा।'

मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर प्रतिक्रिया

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाने जैसी ही है, और यदि विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाता है तो प्रक्रिया के तहत चर्चा होगी।

इस पर मनोज झा ने तंज कसते हुए कहा, 'आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। नया यही है कि मैं अखबार पर नहीं जाऊंगा, मैं साक्ष्य पर नहीं जाऊंगा, मैं सबूत पर नहीं जाऊंगा, मैं प्रोसीजर के आधार पर मोरैलिटी का — जो हमारे संविधान का एक बहुत बड़ा सिद्धांत है — उसका कत्ल कर दूंगा। इसके अलावा कुछ नहीं।'

झा का आरोप है कि सरकार इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को प्रक्रियात्मक तर्कों की आड़ लेकर टालना चाहती है, जबकि नैतिकता के मूल प्रश्न को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पर लंबे समय से सवाल उठाता रहा है।

विधान परिषद चुनाव पर भाजपा पर हमला

उत्तर प्रदेश और बिहार में जारी विधान परिषद चुनाव को लेकर मनोज झा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मतदान हो ही रहे हैं, लेकिन कल रात जिस तरह से एसटीएफ आ गई, तो मुझे लग गया कि हाँ, ये चुनाव है। क्योंकि बिना किसी अतिरिक्त मदद के तो आप लड़ ही नहीं सकते।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी निगरानी तंत्र की निष्पक्षता पर बार-बार सवाल उठा रहे हैं।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था कि दुनिया नए वैश्विक क्रम की तलाश में आगे बढ़ रही है, वहीं भारत में कुछ लोग देश में अव्यवस्था फैलाने और सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं। इस बयान को इंडिया गठबंधन ने अपने विरोध प्रदर्शनों पर सीधा हमला माना और उसी के जवाब में झा की यह प्रतिक्रिया सामने आई।

आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच यह तकरार आगामी चुनावी मौसम में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विपक्ष की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद को संवैधानिक नैतिकता के सवाल से जोड़कर सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाया जा रहा है। 'गांधी और बुद्ध के देश' की दुहाई विदेश में देना और घर में असमानता व बेरोज़गारी पर मौन रहना — झा ने इसी अंतर्विरोध को उजागर किया, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। विधान परिषद चुनाव में एसटीएफ की तैनाती पर टिप्पणी यह भी संकेत देती है कि ज़मीनी चुनावी प्रक्रिया पर विश्वसनीयता का संकट गहरा रहा है। असली प्रश्न यह है कि क्या सत्तारूढ़ दल चुनाव आयुक्त विवाद को प्रक्रियात्मक ढाल से लंबे समय तक टाल सकता है, या नैतिकता का यह प्रश्न मतदाताओं तक पहुँचेगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने पीएम मोदी के किस बयान पर पलटवार किया?
पीएम मोदी ने कहा था कि कुछ लोग भारत में अव्यवस्था फैलाने और सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं। इस बयान को इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शनों पर हमला मानते हुए RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि गांधीवादी तरीके से विरोध करना लोगों का संवैधानिक अधिकार है।
इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहा है?
इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और उनके कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की माँग कर रहा है। गठबंधन का आरोप है कि सरकार इस नैतिक प्रश्न को प्रक्रियात्मक तर्कों की आड़ लेकर टाल रही है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया पर क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाने जैसी ही है, और यदि विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाता है तो प्रक्रिया के तहत चर्चा होगी। मनोज झा ने इस जवाब को 'संवैधानिक नैतिकता का कत्ल' बताया।
मनोज झा ने विधान परिषद चुनाव में एसटीएफ की तैनाती पर क्या कहा?
मनोज झा ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान एसटीएफ की तैनाती यह साबित करती है कि BJP बिना अतिरिक्त मदद के चुनाव नहीं लड़ सकती। उन्होंने इसे सत्तारूढ़ दल द्वारा प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का संकेत बताया।
मनोज झा के 'गांधी के तरीकों' वाले बयान का क्या अर्थ है?
झा का तर्क है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन — जैसे जंतर-मंतर पर धरना — गांधीवादी परंपरा का हिस्सा है और इसे 'रिजीम चेंज' की कोशिश बताना जनता को गुमराह करना है। उनके अनुसार, जब सरकार बेरोज़गारी और असमानता पर मौन रहे तो लोगों का सड़क पर उतरना स्वाभाविक और संवैधानिक है।
राष्ट्र प्रेस
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