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पीयूष पांडे की पहली पुण्यतिथि: इला अरुण बोलीं — 'आप हर पल दिल में हो'

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पीयूष पांडे की पहली पुण्यतिथि: इला अरुण बोलीं — 'आप हर पल दिल में हो'

सारांश

विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे को गए लगभग एक साल हो रहा है, और उनकी बहन इला अरुण का दर्द इंस्टाग्राम पर छलक पड़ा। 'फेविकॉल का जोड़' से लेकर 'अबकी बार मोदी सरकार' तक — पांडे की विरासत उतनी ही अटूट है जितना उनकी बहन का उनसे प्यार।

मुख्य बातें

अभिनेत्री-गायिका इला अरुण ने भाई पीयूष पांडे की पहली पुण्यतिथि से पहले इंस्टाग्राम पर भावुक श्रद्धांजलि पोस्ट की।
पीयूष पांडे का निधन 23 अक्टूबर 2025 को 70 वर्ष की आयु में मुंबई में सेप्सिस के कारण हुआ था।
वे ऑगिल्वी इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर थे; एजेंसी लगातार 12 वर्षों तक देश में नंबर वन रही।
उनकी रचनाओं में फेविकॉल , एशियन पेंट्स , 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' और ' अबकी बार मोदी सरकार ' नारा शामिल हैं।
2016 में पद्म श्री और 2024 में LIA लीजेंड अवॉर्ड से सम्मानित।

अभिनेत्री और गायिका इला अरुण ने अपने भाई, दिग्गज विज्ञापन गुरु पीयूष पांडे की पहली पुण्यतिथि से ठीक पहले उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। 23 अक्टूबर 2025 को मुंबई में 70 वर्ष की आयु में पीयूष पांडे का निधन हुआ था, और उनकी पहली बरसी नजदीक आते ही इला अरुण का दर्द इंस्टाग्राम पर छलक पड़ा।

इला अरुण का भावुक संदेश

इला अरुण ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'प्यारे भाई पीयूष, यह हफ्ता हम सभी के लिए सबसे मुश्किल हफ्ता रहा है। आपको गए हुए लगभग एक साल होने जा रहा है। पूरे परिवार के लिए आप भगवान का दिया एक अनमोल तोहफा थे।' उन्होंने आगे लिखा, 'जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, दिन और भारी होते जा रहे हैं। आप हर पल मेरे दिल में हो — तुम्हारी बहन, इला अरुण।'

इन शब्दों में एक गहरा पारिवारिक दर्द साफ झलकता है। इला अरुण और पीयूष पांडे का रिश्ता न केवल भाई-बहन का था, बल्कि दोनों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अपने-अपने क्षेत्रों में जीवित रखने का काम किया।

पीयूष पांडे का निधन और बीमारी

पीयूष पांडे लंबे समय से एक गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। यह संक्रमण धीरे-धीरे उनके पूरे शरीर और रक्त में फैल गया, जिससे उन्हें सेप्सिस हो गया। इस कारण उनकी किडनी, लिवर और फेफड़े जैसे प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया और 23 अक्टूबर 2025 को मुंबई में उनका निधन हो गया।

विज्ञापन जगत में अमिट छाप

पीयूष पांडे ऑगिल्वी इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर थे। उन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत में क्रांति लाई — पश्चिमी शैली की जगह ठेठ देसी भाषा, भावनाओं और सांस्कृतिक मिजाज को प्रमुखता दी। उनके नेतृत्व में ऑगिल्वी इंडिया लगातार 12 वर्षों तक देश की नंबर वन विज्ञापन एजेंसी बनी रही।

उनकी रचनाशीलता का दायरा असाधारण रहा। फेविकॉल का 'ये फेविकॉल का जोड़ है', एशियन पेंट्स का 'हर घर कुछ कहता है', कैडबरी के विज्ञापन, पल्स पोलियो का 'दो बूंद जिंदगी की', राष्ट्रीय एकता गीत 'मिले सुर मेरा तुम्हारा', और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 2014 के चुनावी नारे 'अबकी बार मोदी सरकार' तक — इन सबके पीछे पीयूष पांडे की कलम और सोच थी।

पुरस्कार और सम्मान

पीयूष पांडे को 2016 में भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें 2024 में LIA लीजेंड अवॉर्ड मिला। क्लियो और कांस लायंस जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उनकी प्रतिभा को पुरस्कृत किया गया। भारतीय विज्ञापन उद्योग में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है।

परिवार और विरासत

गौरतलब है कि पीयूष पांडे की विरासत केवल पुरस्कारों और नारों तक सीमित नहीं है — वे भारतीय जन-मानस की नब्ज पकड़ने वाले उस दुर्लभ रचनाकार थे जिन्होंने व्यापार और संस्कृति के बीच की दूरी को पाटा। इला अरुण का यह भावुक संदेश बताता है कि एक साल बाद भी परिवार उनकी अनुपस्थिति को उतनी ही शिद्दत से महसूस कर रहा है। उनकी रचनाएँ आने वाले वर्षों तक भारतीय विज्ञापन और सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सांस्कृतिक सहानुभूति से जन्म लेती है। आज जब विज्ञापन जगत एल्गोरिद्म और परफॉर्मेंस मेट्रिक्स की ओर दौड़ रहा है, पांडे की विरासत एक ज़रूरी सवाल पूछती है — क्या भारतीय विज्ञापन उद्योग अब भी उस देसी भावनात्मक गहराई को थाम सकता है जो उन्होंने दशकों में बनाई? इला अरुण का भावुक संदेश बताता है कि यह सिर्फ एक प्रतिभा की नहीं, एक पूरे दृष्टिकोण की कमी है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष पांडे कौन थे और उनका निधन कब हुआ?
पीयूष पांडे भारत के सबसे प्रभावशाली विज्ञापन गुरुओं में से एक थे और ऑगिल्वी इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष व ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर थे। उनका निधन 23 अक्टूबर 2025 को मुंबई में 70 वर्ष की आयु में सेप्सिस के कारण हुआ था।
इला अरुण ने पीयूष पांडे को कैसे याद किया?
इला अरुण ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यह हफ्ता परिवार के लिए सबसे मुश्किल रहा है और पीयूष पांडे को गए लगभग एक साल होने जा रहा है। उन्होंने अपने भाई को 'भगवान का दिया अनमोल तोहफा' बताया।
पीयूष पांडे के सबसे प्रसिद्ध विज्ञापन कौन से हैं?
पीयूष पांडे ने फेविकॉल का 'ये फेविकॉल का जोड़ है', एशियन पेंट्स का 'हर घर कुछ कहता है', पल्स पोलियो का 'दो बूंद जिंदगी की', राष्ट्रीय एकता गीत 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' और BJP का 2014 का नारा 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसी कालजयी रचनाएँ दीं।
पीयूष पांडे को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
पीयूष पांडे को 2016 में भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें 2024 में LIA लीजेंड अवॉर्ड और कांस लायंस तथा क्लियो जैसे अंतरराष्ट्रीय विज्ञापन पुरस्कार भी मिले।
ऑगिल्वी इंडिया में पीयूष पांडे का क्या योगदान था?
पीयूष पांडे के नेतृत्व में ऑगिल्वी इंडिया लगातार 12 वर्षों तक देश की नंबर वन विज्ञापन एजेंसी बनी रही। उन्होंने भारतीय विज्ञापन में पश्चिमी शैली की जगह देसी भाषा, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में लाकर पूरे उद्योग की दिशा बदल दी।
राष्ट्र प्रेस
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