क्या पीयूष पांडे की आवाज ने भारत को अपनी कहानी पर विश्वास दिलाया? : गौतम अदाणी

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क्या पीयूष पांडे की आवाज ने भारत को अपनी कहानी पर विश्वास दिलाया? : गौतम अदाणी

सारांश

गौतम अदाणी ने पीयूष पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनकी आवाज को भारत की आत्मा से जोड़ा। जानें कैसे पांडे ने भारतीय विज्ञापन को नई ऊंंचाई दी।

मुख्य बातें

पीयूष पांडे का योगदान भारतीय विज्ञापन में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कई ब्रांड के विज्ञापनों में अपनी आवाज दी।
भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
उनकी आवाज ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया।

अहमदाबाद, २४ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने शुक्रवार को पद्म श्री पुरस्कार विजेता पीयूष पांडे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी आवाज ने भारत को अपनी कहानी पर विश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "पीयूष पांडे सिर्फ एक विज्ञापन दिग्गज नहीं थे, बल्कि वे उससे कहीं अधिक थे। वे एक ऐसी आवाज थे जिसने भारत को अपनी कहानी पर विश्वास दिलाया।"

गौतम अदाणी ने आगे कहा कि उन्होंने भारतीय विज्ञापन को आत्मविश्वास, आत्मा और स्वदेशी अंदाज प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि पांडे उनके गहरे मित्र थे। उन्होंने पांडे के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा, "एक मास्टर बल्लेबाज की तरह, उन्होंने हर शॉट दिल से खेला। आज भारत ने अपना एक सच्चा बेटा खो दिया है।"

इससे पहले अदाणी ग्रुप के एग्रो और ऑयल एंड गैस के प्रबंध निदेशक प्रणव अदाणी ने भी पीयूष पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, "मेरे प्रिय दोस्त पीयूष पांडे के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। वे एक क्रिएटिव जीनियस थे, जिन्होंने भारतीय विज्ञापन को ग्लोबल पावरहाउस का आकार दिया। उनके विचार उद्योग के बेंचमार्क थे। उन्होंने कई पीढ़ियों के स्टोरीटेलर्स को प्रेरित किया। उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। 'ओम शान्ति'।"

पीयूष पांडे की पहचान विज्ञापन जगत में एक मिसाल के रूप में होती थी। उन्होंने कई ब्रांड के विज्ञापनों में अपनी आवाज देकर कम्युनिकेशन का तरीका ही बदल दिया। पांडे ने हिंदी और भारतीय मुहावरों को विज्ञापनों में शामिल किया। भारत सरकार की ओर से उन्हें २०१६ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने ७० वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। इससे पहले वे कुछ समय कोमा में रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

पीयूष पांडे केवल एक विज्ञापन दिग्गज नहीं थे, बल्कि भारत की आत्मा का एक हिस्सा थे। उनकी आवाज ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया। यह एक सच्चा नुकसान है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने पीयूष पांडे के बारे में क्या कहा?
गौतम अदाणी ने कहा कि पीयूष पांडे की आवाज ने भारत को अपनी कहानी पर विश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पीयूष पांडे को कौन सा सम्मान मिला था?
पीयूष पांडे को २०१६ में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
राष्ट्र प्रेस