प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' बयान पर NDA का पलटवार, BJP बोली- सड़क हंगामे से सत्ता नहीं बदलती
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' वाले बयान ने 16 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया, जिसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यह विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठा है।
क्या था प्रशांत भूषण का बयान
प्रशांत भूषण ने गुरुवार को कहा था, 'अगर सरकार को यह लगता है कि यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है तो हां, हम रिजीम चेंज करना चाहते हैं।' उनके इस बयान को सत्तारूढ़ गठबंधन ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया। यह ऐसे समय में आया है जब SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच तनाव चरम पर है।
BJP का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में विपक्ष का असली एजेंडा सामने आ गया है। उन्होंने कहा, 'उनके मंसूबे साफ हो गए हैं। नेहा बोरा कहती हैं कि बांग्लादेश के मॉडल से इंस्पायर्ड हैं। प्रशांत भूषण कहते हैं कि यहां चेंज करना है।'
गुरु प्रकाश ने यह भी कहा, 'रिजीम चेंज का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीका होता है। चुनाव लड़िए, उम्मीदवार उतारिए, मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाइए, अपनी नीति और नेतृत्व को स्पष्ट करिए। इस प्रकार से सड़क पर हंगामा करके सत्ता परिवर्तन नहीं होता। देश संसद और संविधान की संवैधानिक मर्यादा के अंतर्गत चलता है।'
जदयू की प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी प्रशांत भूषण के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'जनता का जनादेश ही किसी को सत्ता में लाता है और किसी को सत्ता से बाहर करता है। जनादेश पाने के लिए जनता का भरोसा जीतना जरूरी है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल अराजक तरीकों से हासिल नहीं कर सकता।'
राजीव रंजन ने आम आदमी पार्टी (AAP) का उदाहरण देते हुए कहा, 'उन्होंने 'आप' के साथ रहते हुए भी ऐसे ही दावे किए थे, लेकिन वे खुद भी उस पार्टी के साथ नहीं टिक पाए। 'आप' ने दिल्ली और पूरे देश में अपने कामों से 'वैकल्पिक राजनीति' पर जनता का भरोसा तोड़ दिया है।'
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल और नागरिक समाज के एक वर्ग ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कई राज्यों में जारी है। इसी विरोध के बीच प्रशांत भूषण का यह बयान आया, जिसने बहस को नई दिशा दे दी।
आगे क्या
NDA की तीखी प्रतिक्रिया के बाद यह देखना होगा कि विपक्ष और नागरिक समाज के आंदोलन की रणनीति किस रूप में आगे बढ़ती है। SIR पर सर्वोच्च न्यायालय में भी सुनवाई जारी है, और किसी भी फैसले का सीधा असर इस पूरी बहस पर पड़ सकता है।