किरेन रिजिजू का 'रिजीम चेंज' पर पलटवार: 'गद्दारों को कभी माफ मत करो'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखी पोस्ट के ज़रिये 'रिजीम चेंज' की वकालत करने वालों पर सीधा हमला बोला। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा खुले तौर पर 'रिजीम चेंज' की माँग स्वीकार किए जाने के बाद भड़के सियासी विवाद के बीच रिजिजू ने देशभक्त भारतीयों से अपील की कि गद्दारों को कभी माफ न किया जाए।
रिजिजू की एक्स पोस्ट और उसका संदर्भ
रिजिजू ने एक्स पर लिखा, 'प्यारे देशभक्त भारतीयों, याद रखें — अपने दुश्मनों को एक बार माफ करो, दोस्तों को दो बार, लेकिन गद्दारों को कभी नहीं।' यह पोस्ट उन्होंने प्रशांत भूषण की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो शेयर करते हुए की, जिसमें भूषण को यह कहते सुना गया, 'हाँ, हम रिजीम चेंज चाहते हैं।' रिजिजू ने इस बयान को राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक करार दिया।
पुराने बयान भी आए सामने
रिजिजू ने एक अन्य पोस्ट में भूषण के 2011 के कश्मीर संबंधी बयान का वीडियो भी साझा किया, जिसमें भूषण कथित तौर पर कहते सुने गए थे कि 'अगर कश्मीरी लोग अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें अलग होने दें।' रिजिजू ने इन दोनों बयानों को एक साथ जोड़ते हुए एक व्यापक राजनीतिक तस्वीर पेश की। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा, 'लड़ाई की रेखा खिंच गई है — यह दिमागी नक्सल बनाम देशभक्त भारतीय है।'
राजनाथ सिंह का भी विपक्ष पर निशाना
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 'रिजीम चेंज' शब्द का उपयोग यह साबित करता है कि प्रदर्शनकारियों का असली इरादा अराजकता फैलाकर सत्ता पर काबिज होना है। राजनाथ ने कहा कि विपक्ष की यह लड़ाई न तो चुनाव आयोग के लिए है, न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए, बल्कि इसका एकमात्र उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करना है।
राजनाथ ने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए आगाह किया कि 'रिजीम चेंज' की वकालत करने वाले लोकतांत्रिक ढाँचे को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि लोकतंत्र को अराजकता के लाइसेंस की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सियासी बहस का दायरा
इस पूरे विवाद ने 'रिजीम चेंज' की माँग के अर्थ, संवैधानिक सीमाओं और विपक्षी आंदोलनों की मंशा को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय बहस खड़ी कर दी है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि यह माँग लोकतांत्रिक मूल्यों की आड़ में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर पहले से ही तीखी राजनीतिक नोकझोंक जारी है।
आगे क्या
गौरतलब है कि इस विवाद के और गहराने की संभावना है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे एक व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाने के संकेत दिए हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया और न्यायपालिका तथा नागरिक समाज की स्थिति इस बहस की दिशा तय करेगी।