प्रशांत भूषण पर FIR के बाद किरेन रिजिजू का हमला: 'भारत की छवि और संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा बयान जारी किया, जो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के तुरंत बाद आया। रिजिजू ने इस मामले को भारत की छवि और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुँचाने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया।
एफआईआर का आधार क्या है
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अनुसार, 3 नवंबर 2026 को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान यह पाया गया कि प्रशांत भूषण के सोशल मीडिया हैंडल से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का एक डिजिटल रूप से परिवर्तित (फर्जी) वीडियो एक्स पर शेयर किया गया था। पुलिस ने एक्स पर अपनी पोस्ट के जरिए बताया कि इस वीडियो के माध्यम से कथित तौर पर भ्रामक, मानहानिकारक और भड़काऊ सामग्री फैलाई गई, जिससे सार्वजनिक उपद्रव और अफवाहें फैलाने का प्रयास किया गया।
आरोप है कि उक्त क्लिप में गलत तरीके से दिखाया गया था कि लावरोव भारत की विदेश नीति और नीतियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। यह वीडियो कथित तौर पर भारतीय विदेश नीति पर आलोचनात्मक टिप्पणी के साथ शेयर किया गया था।
विदेश मंत्रालय पहले ही कर चुका था खंडन
विदेश मंत्रालय (MEA) ने अटलांटा में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ही इस वीडियो को फर्जी घोषित करते हुए खारिज कर दिया था। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वीडियो में दर्शाया गया दावा पूरी तरह असत्य है।
रिजिजू का बयान: पुराने विवाद का भी जिक्र
रिजिजू ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'पहले भी इस प्रशांत भूषण ने एक फर्जी खबर फैलाई थी कि जज और मंत्री लंदन बैडमिंटन खेलने गए हैं। और उन्होंने इसके लिए माफी भी नहीं मांगी थी। यह भारत की छवि और भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने की साजिश का हिस्सा है।' इस बयान में रिजिजू ने भूषण पर पुराने विवाद को भी जोड़ते हुए एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा किया।
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर तीखी बहस छेड़ दी है। एक ओर पुलिस जाँच कर रही है कि फर्जी वीडियो का स्रोत क्या है और इसे किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया, वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफ से इसे देश की संस्थाओं के विरुद्ध साजिश बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता और उसके दायरे पर स्वतंत्र न्यायिक जाँच ज़रूरी है।
आगे क्या होगा
फिलहाल जाँच एजेंसियाँ इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि वीडियो का मूल स्रोत कहाँ है और इसे शेयर करने में किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है। प्रशांत भूषण की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह मामला आने वाले दिनों में अदालत में भी पहुँचने की संभावना है।