एस्सार रिन्यूएबल्स और एनएचपीसी में 300 MW अक्षय ऊर्जा PPA, ₹4,500 करोड़ का निवेश
सारांश
मुख्य बातें
एस्सार रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ERL) ने 4 नवंबर 2026 को सरकारी नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड के साथ आंध्र प्रदेश में 300 मेगावाट की फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजना के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना में एस्सार पावर करीब ₹4,500 करोड़ का निवेश करेगी, जो भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र में निजी पूंजी के बढ़ते प्रवाह का संकेत है।
परियोजना का स्वरूप और तकनीकी ढाँचा
यह परियोजना सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के एकीकृत संयोजन पर आधारित होगी। FDRE मॉडल की खासियत यह है कि यह पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों की तुलना में अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करता है — मांग के अनुसार बिजली भेजना संभव बनाता है, जो सौर और पवन ऊर्जा की रुक-रुक कर उपलब्धता की सीमा को पाटता है।
गौरतलब है कि यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। BESS तकनीक को शामिल करना इस बात का संकेत है कि अब निवेशक केवल क्षमता नहीं, बल्कि ग्रिड-विश्वसनीयता पर भी ध्यान दे रहे हैं।
एस्सार की व्यापक ऊर्जा रणनीति
यह परियोजना एस्सार पावर की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी लगभग 5 गीगावाट का विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित कर रही है। इस पोर्टफोलियो में अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ तापीय और गैस-आधारित उत्पादन परिसंपत्तियाँ भी शामिल हैं।
कंपनी के अनुसार, भारत के शहरी और औद्योगिक केंद्रों में बिजली की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। ऐसे में एकीकृत पोर्टफोलियो के ज़रिये ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और कम-कार्बन भविष्य की दिशा में संक्रमण को समर्थन देना कंपनी की प्राथमिकता है।
प्रमुख अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एस्सार ग्रुप के ऑपरेटिंग पार्टनर-इन्फ्रास्ट्रक्चर श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में एस्सार के दीर्घकालिक अनुभव और नई तकनीकों पर फोकस के कारण समूह भारत की अगली ऊर्जा विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने की स्थिति में है।
एस्सार पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकुर कुमार ने कहा कि कंपनी सौर, पवन और BESS में मज़बूत पोर्टफोलियो तैयार करने पर केंद्रित है। उनके अनुसार, एनएचपीसी के साथ यह 300 मेगावाट की परियोजना एस्सार की अक्षय ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
एनएचपीसी की भूमिका और विस्तार
एनएचपीसी लिमिटेड, विद्युत मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का नवरत्न उपक्रम, परंपरागत रूप से देश की सबसे बड़ी जलविद्युत विकास कंपनी रही है। हाल के वर्षों में एनएचपीसी ने अपने कारोबार का विस्तार सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्रों में भी किया है, जो उसकी 'संपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा' कंपनी बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
आगे की राह
यह सौदा भारत के हरित ऊर्जा परिदृश्य में निजी-सार्वजनिक साझेदारी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। ₹4,500 करोड़ का यह निवेश न केवल आंध्र प्रदेश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करेगा, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता में भी योगदान देगा। परियोजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा और आपूर्ति की शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।