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एस्सार रिन्यूएबल्स और एनएचपीसी में 300 MW अक्षय ऊर्जा PPA, ₹4,500 करोड़ का निवेश

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एस्सार रिन्यूएबल्स और एनएचपीसी में 300 MW अक्षय ऊर्जा PPA, ₹4,500 करोड़ का निवेश

सारांश

एस्सार रिन्यूएबल्स और एनएचपीसी की यह साझेदारी सिर्फ एक PPA नहीं — यह भारत के हरित ऊर्जा बाज़ार में निजी पूंजी और सरकारी संस्थान के बीच बढ़ती पूरकता का प्रतीक है। ₹4,500 करोड़ की BESS-एकीकृत FDRE परियोजना बताती है कि अब निवेशक केवल क्षमता नहीं, ग्रिड-विश्वसनीयता खरीद रहे हैं।

मुख्य बातें

एस्सार रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ERL) ने एनएचपीसी लिमिटेड के साथ आंध्र प्रदेश में 300 मेगावाट FDRE परियोजना के लिए PPA पर हस्ताक्षर किए।
एस्सार पावर इस परियोजना में करीब ₹4,500 करोड़ का निवेश करेगी।
परियोजना में सौर, पवन और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का एकीकरण किया जाएगा।
यह परियोजना एस्सार पावर के 5 गीगावाट के विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो का हिस्सा है।
एनएचपीसी, विद्युत मंत्रालय के अधीन नवरत्न उपक्रम, हाल के वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा में भी विस्तार कर रही है।
यह परियोजना भारत के 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को समर्थन देगी।

एस्सार रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ERL) ने 4 नवंबर 2026 को सरकारी नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड के साथ आंध्र प्रदेश में 300 मेगावाट की फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजना के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना में एस्सार पावर करीब ₹4,500 करोड़ का निवेश करेगी, जो भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र में निजी पूंजी के बढ़ते प्रवाह का संकेत है।

परियोजना का स्वरूप और तकनीकी ढाँचा

यह परियोजना सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के एकीकृत संयोजन पर आधारित होगी। FDRE मॉडल की खासियत यह है कि यह पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों की तुलना में अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करता है — मांग के अनुसार बिजली भेजना संभव बनाता है, जो सौर और पवन ऊर्जा की रुक-रुक कर उपलब्धता की सीमा को पाटता है।

गौरतलब है कि यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। BESS तकनीक को शामिल करना इस बात का संकेत है कि अब निवेशक केवल क्षमता नहीं, बल्कि ग्रिड-विश्वसनीयता पर भी ध्यान दे रहे हैं।

एस्सार की व्यापक ऊर्जा रणनीति

यह परियोजना एस्सार पावर की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी लगभग 5 गीगावाट का विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित कर रही है। इस पोर्टफोलियो में अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ तापीय और गैस-आधारित उत्पादन परिसंपत्तियाँ भी शामिल हैं।

कंपनी के अनुसार, भारत के शहरी और औद्योगिक केंद्रों में बिजली की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। ऐसे में एकीकृत पोर्टफोलियो के ज़रिये ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और कम-कार्बन भविष्य की दिशा में संक्रमण को समर्थन देना कंपनी की प्राथमिकता है।

प्रमुख अधिकारियों की प्रतिक्रिया

एस्सार ग्रुप के ऑपरेटिंग पार्टनर-इन्फ्रास्ट्रक्चर श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में एस्सार के दीर्घकालिक अनुभव और नई तकनीकों पर फोकस के कारण समूह भारत की अगली ऊर्जा विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने की स्थिति में है।

एस्सार पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकुर कुमार ने कहा कि कंपनी सौर, पवन और BESS में मज़बूत पोर्टफोलियो तैयार करने पर केंद्रित है। उनके अनुसार, एनएचपीसी के साथ यह 300 मेगावाट की परियोजना एस्सार की अक्षय ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

एनएचपीसी की भूमिका और विस्तार

एनएचपीसी लिमिटेड, विद्युत मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का नवरत्न उपक्रम, परंपरागत रूप से देश की सबसे बड़ी जलविद्युत विकास कंपनी रही है। हाल के वर्षों में एनएचपीसी ने अपने कारोबार का विस्तार सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्रों में भी किया है, जो उसकी 'संपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा' कंपनी बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

आगे की राह

यह सौदा भारत के हरित ऊर्जा परिदृश्य में निजी-सार्वजनिक साझेदारी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। ₹4,500 करोड़ का यह निवेश न केवल आंध्र प्रदेश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करेगा, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता में भी योगदान देगा। परियोजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा और आपूर्ति की शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹4,500 करोड़ का निवेश और परियोजना की समय-सीमा अभी सार्वजनिक नहीं है — क्रियान्वयन की पारदर्शिता ही बताएगी कि यह साझेदारी भारत के ऊर्जा संक्रमण में वास्तविक योगदान देती है या महज़ घोषणा बनकर रह जाती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस्सार रिन्यूएबल्स और एनएचपीसी के बीच क्या समझौता हुआ है?
एस्सार रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ERL) ने एनएचपीसी लिमिटेड के साथ आंध्र प्रदेश में 300 मेगावाट की FDRE परियोजना के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना में एस्सार पावर करीब ₹4,500 करोड़ का निवेश करेगी।
FDRE परियोजना क्या होती है और यह सामान्य सौर परियोजना से अलग कैसे है?
फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजना में सौर, पवन और बैटरी भंडारण (BESS) को एकीकृत किया जाता है, जिससे मांग के अनुसार बिजली भेजना संभव होता है। यह पारंपरिक सौर या पवन परियोजनाओं से इसलिए बेहतर है क्योंकि ये स्रोत रुक-रुककर बिजली देते हैं, जबकि FDRE ग्रिड को स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
एस्सार पावर की व्यापक ऊर्जा योजना क्या है?
एस्सार पावर लगभग 5 गीगावाट का विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित कर रही है, जिसमें अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ तापीय और गैस-आधारित बिजली उत्पादन परिसंपत्तियाँ भी शामिल हैं। एनएचपीसी के साथ 300 मेगावाट की यह परियोजना इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
एनएचपीसी इस परियोजना में क्यों शामिल है?
एनएचपीसी लिमिटेड, जो परंपरागत रूप से जलविद्युत क्षेत्र में देश की अग्रणी सरकारी कंपनी है, हाल के वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा में भी विस्तार कर रही है। विद्युत मंत्रालय के अधीन यह नवरत्न उपक्रम अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मज़बूत करने के लिए निजी कंपनियों के साथ PPA जैसे समझौते कर रहा है।
यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों से कैसे जुड़ती है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है। यह 300 मेगावाट FDRE परियोजना उस लक्ष्य में सीधा योगदान देती है और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को और गति देने का काम कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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