4 नवंबर 2026
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RBI ने TCCFM का गठन किया, डिप्टी गवर्नर रोहित जैन की अध्यक्षता में वित्तीय बाज़ारों पर नई सलाहकार समिति

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RBI ने TCCFM का गठन किया, डिप्टी गवर्नर रोहित जैन की अध्यक्षता में वित्तीय बाज़ारों पर नई सलाहकार समिति

सारांश

RBI ने वित्तीय बाज़ारों पर नीतिगत संवाद को व्यवस्थित करने के लिए TCCFM का गठन किया है। डिप्टी गवर्नर रोहित जैन की अगुआई में यह समिति मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाज़ार पर तिमाही बैठकें करेगी — बाज़ार और नियामक के बीच संवाद का एक नया संस्थागत ढाँचा।

मुख्य बातें

RBI ने 4 नवंबर 2026 को TCCFM (टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी फॉर फाइनेंशियल मार्केट्स) के गठन की घोषणा की।
समिति की अध्यक्षता डिप्टी गवर्नर रोहित जैन करेंगे; इसमें 7 बाहरी सदस्य बैंकों, बाज़ार संघों और क्लियरिंग संस्थानों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सदस्यों में SEBI के पूर्व सदस्य अनंत नारायण, SBI के उप MD शमशेर सिंह, Axis Bank के ED नीरज गंभीर, Morgan Stanley India के MD रिधम देसाई शामिल।
समिति मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा और डेरिवेटिव बाज़ारों पर नीतिगत एवं परिचालन मुद्दों पर विचार करेगी।
बैठकें प्रत्येक तिमाही में कम-से-कम एक बार आयोजित होंगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 4 नवंबर 2026 को वित्तीय बाज़ार पक्षकारों के साथ संरचित संवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी फॉर फाइनेंशियल मार्केट्स (TCCFM) के गठन की घोषणा की। इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन करेंगे। RBI के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह समिति मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा और इनसे जुड़े डेरिवेटिव बाज़ारों पर नीतिगत एवं परिचालन विषयों में बाज़ार प्रतिभागियों से व्यवस्थित रूप से बातचीत के लिए एक केंद्रीय मंच का काम करेगी।

समिति की संरचना और सदस्य

डिप्टी गवर्नर रोहित जैन के अतिरिक्त TCCFM में सात बाहरी सदस्य शामिल होंगे, जो बैंकों, बाज़ार संघों, क्लियरिंग संस्थानों और वित्तीय सेवा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह समिति प्रत्येक तिमाही में कम-से-कम एक बार बैठक करेगी।

बाहरी सदस्यों में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य एवं IIT बॉम्बे में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' अनंत नारायण; फिक्स्ड इनकम मनी मार्केट एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FIMMDA) के चेयरमैन एवं भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के उप प्रबंध निदेशक शमशेर सिंह; तथा एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक नीरज गंभीर शामिल हैं।

इसके अलावा, ICICI बैंक के ट्रेजरी और इकोनॉमिक रिसर्च प्रमुख शैलेंद्र झिंगन, सिटी इंडिया के प्रबंध निदेशक और बाज़ार प्रमुख आदित्य बागरी, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) के प्रबंध निदेशक नंद किशोर और मॉर्गन स्टेनली इंडिया के प्रबंध निदेशक रिधम देसाई भी समिति के सदस्य हैं।

TCCFM का कार्यक्षेत्र

समिति के कार्यक्षेत्र में मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा और इनसे जुड़े डेरिवेटिव बाज़ारों की कार्यकुशलता, तरलता और लचीलेपन से संबंधित मुद्दों की जाँच शामिल है। इसके साथ ही, यह समिति इन बाज़ारों को और अधिक गहरा एवं व्यापक बनाने के उपायों की भी पहचान करेगी।

यह पैनल वित्तीय बाज़ारों को प्रभावित करने वाले उभरते नीतिगत और परिचालन मुद्दों की जाँच करेगा — जिसमें RBI के उपायों के क्रियान्वयन और बाज़ार में आने वाली अनपेक्षित बाधाओं की पहचान भी शामिल है। ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, रिपोर्टिंग और बाज़ार अवसंरचना से जुड़े विनियामक एवं परिचालन ढाँचों पर विचार करना भी इसके दायरे में आता है।

वैश्विक और नवाचार संबंधी चर्चा

समिति अंतरराष्ट्रीय और घरेलू घटनाक्रमों, वित्तीय नवाचारों तथा उन उभरते जोखिमों पर भी विचार-विमर्श करेगी जिनका भारतीय वित्तीय बाज़ारों पर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि RBI बाज़ार-विशिष्ट अथवा व्यापक आर्थिक मुद्दों को भी जाँच हेतु इस समिति के पास भेज सकता है।

आम जनता और बाज़ार पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वित्तीय बाज़ार तेज़ी से वैश्विक पूँजी प्रवाह और तकनीकी नवाचारों के प्रति संवेदनशील हो रहे हैं। एक त्रैमासिक परामर्श तंत्र से नीति-निर्माण में पारदर्शिता बढ़ने और बाज़ार प्रतिभागियों की चिंताओं को समय पर संबोधित करने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाज़ारों में सहभागिता बढ़ाने के नज़रिए से यह एक सकारात्मक संस्थागत कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसकी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता होगी — क्या समिति की सिफारिशें सार्वजनिक की जाएँगी, या ये केवल आंतरिक नीति-परामर्श तक सीमित रहेंगी? भारत में ऐसी सलाहकार समितियाँ अक्सर नतीजों की जवाबदेही के बिना बनती हैं। विदेशी मुद्रा और डेरिवेटिव बाज़ारों में वैश्विक जोखिम बढ़ रहे हैं, ऐसे में एक त्रैमासिक परामर्श चक्र पर्याप्त है या नहीं, यह भी एक प्रासंगिक सवाल है। बाज़ार की गहराई और तरलता पर वर्षों से चली आ रही चुनौतियों को देखते हुए, यह समिति तभी सार्थक होगी जब इसकी अनुशंसाएँ नीतिगत बदलावों में परिवर्तित होती दिखें।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TCCFM क्या है और RBI ने इसे क्यों बनाया?
TCCFM यानी टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी फॉर फाइनेंशियल मार्केट्स, RBI द्वारा 4 नवंबर 2026 को गठित एक सलाहकार समिति है। इसका उद्देश्य मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाज़ारों पर नीतिगत एवं परिचालन विषयों में बाज़ार पक्षकारों के साथ व्यवस्थित संवाद स्थापित करना है।
TCCFM की अध्यक्षता कौन करेंगे और इसमें कौन-कौन शामिल हैं?
समिति की अध्यक्षता RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन करेंगे। इसके 7 बाहरी सदस्यों में SEBI के पूर्व सदस्य अनंत नारायण, SBI के उप MD शमशेर सिंह, Axis Bank के ED नीरज गंभीर, ICICI बैंक के शैलेंद्र झिंगन, सिटी इंडिया के आदित्य बागरी, CCIL के नंद किशोर और Morgan Stanley India के रिधम देसाई शामिल हैं।
TCCFM कितनी बार बैठक करेगी?
RBI के बयान के अनुसार, यह समिति प्रत्येक तिमाही में कम-से-कम एक बार बैठक करेगी। इसके अलावा RBI विशेष बाज़ार या व्यापक आर्थिक मुद्दों पर भी जाँच हेतु इस समिति के पास विषय भेज सकता है।
TCCFM के कार्यक्षेत्र में कौन-से बाज़ार और विषय शामिल हैं?
समिति मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा और इनसे जुड़े डेरिवेटिव बाज़ारों की कार्यकुशलता, तरलता और लचीलेपन पर विचार करेगी। ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, रिपोर्टिंग ढाँचे, वित्तीय नवाचार और उभरते वैश्विक जोखिम भी इसके दायरे में हैं।
इस समिति से बाज़ार प्रतिभागियों को क्या फायदा होगा?
इस समिति के ज़रिए बैंकों, बाज़ार संघों और वित्तीय सेवा कंपनियों को RBI की नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे इनपुट देने का अवसर मिलेगा। इससे अनपेक्षित नीतिगत बाधाओं की पहचान जल्दी हो सकेगी और बाज़ार अवसंरचना को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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