त्योहारी सीजन में बढ़ती कर्ज मांग: RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को लिक्विडिटी संतुलन की दी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने 24 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ देशभर में ऋण की मांग में तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है और बैंकों को आने वाले महीनों में लिक्विडिटी प्रबंधन को अत्यंत सावधानी से संचालित करना होगा। यह बात उन्होंने 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव के प्रश्नोत्तर सत्र में कही।
मुख्य घटनाक्रम
जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है और बैंकों के सामने दोहरी चुनौती है — बढ़ती ऋण मांग को पूरा करना और साथ ही पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखना। उन्होंने बताया कि RBI इस विषय पर बैंकों के साथ बैठकें कर चुका है, जिनमें लिक्विडिटी प्रबंधन की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग किस क्षेत्र में और किस प्रकार किया जाए, यह निर्णय प्रत्येक बैंक अपनी व्यावसायिक जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार करेगा। केंद्रीय बैंक इस मामले में कोई सीधा निर्देश नहीं देगा।
बैंकों की एसेट लायबिलिटी स्थिति की भूमिका
डिप्टी गवर्नर जैन ने कहा कि बैंकों की मौजूदा परियोजनाएं, ऋण प्रस्तावों की पाइपलाइन और भविष्य की लिक्विडिटी स्थिति का उनका आकलन यह तय करेगा कि वे उपलब्ध फंड का उपयोग किस प्रकार करते हैं। उनके अनुसार, बैंकों की एसेट लायबिलिटी पोजीशन फंड उपयोग के फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
उन्होंने संकेत दिया कि त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता ऋण, वाहन ऋण, आवास ऋण और कारोबारी ऋणों की मांग में उछाल की संभावना रहती है। ऐसे में बैंकों को संसाधनों का इष्टतम प्रबंधन करना होगा ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
रुपये की स्थिति पर डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के विचार
इसी कार्यक्रम श्रृंखला में RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मुंबई में SBIDFSC के एक सम्मेलन में भारतीय रुपये की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक भारतीय रुपया संचयी रूप से 13.1 प्रतिशत (पॉइंट टू पॉइंट आधार पर) कमजोर हुआ है।
गुप्ता ने कहा, "अगर कुछ कहा जाए तो ऐसा लगता है कि रुपए का मौजूदा स्तर न केवल स्थिर होने, बल्कि शायद मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश रखता है। जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी इसी तरह की उम्मीद जताई थी।" उनके अनुसार, RBI विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चालू खाता घाटा और भुगतान संतुलन
गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा (CAD) और कम होना चाहिए। इसकी वजह अर्थव्यवस्था की पारंपरिक मजबूती के साथ साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता जैसी नई ताकतों का उभरना है। उन्होंने यह भी स्मरण दिलाया कि RBI के पास कई दशकों के CAD या भुगतान संतुलन (BOP) के शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।
गौरतलब है कि भारत परंपरागत रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप BOP समग्र रूप से सकारात्मक बना रहता है। यह ढाँचा रुपये के मूल्य को दीर्घकालिक आधार पर समर्थन देता है।
आगे क्या होगा
त्योहारी सीजन आमतौर पर अक्टूबर नवंबर में अपने चरम पर होता है, और इस दौरान बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी दबाव बढ़ सकता है। RBI के संकेत स्पष्ट हैं — बैंकों को अपनी बैलेंस शीट की मजबूती से समझौता किए बिना ऋण की बढ़ती मांग को पूरा करना होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्रीय बैंक की यह सलाह वित्तीय स्थिरता के प्रति उसकी सजगता को दर्शाती है।