24 सितंबर 2026
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त्योहारी सीजन में बढ़ती कर्ज मांग: RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को लिक्विडिटी संतुलन की दी चेतावनी

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त्योहारी सीजन में बढ़ती कर्ज मांग: RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को लिक्विडिटी संतुलन की दी चेतावनी

सारांश

त्योहारी सीजन में ऋण मांग के उछाल के बीच RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को लिक्विडिटी संतुलन की स्पष्ट सलाह दी। साथ ही डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बताया कि रुपया 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक 13.1% कमजोर हुआ है — पर अब मजबूती की गुंजाइश है।

मुख्य बातें

RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने 24 सितंबर 2026 को 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में बैंकों को त्योहारी सीजन में लिक्विडिटी सावधानी से प्रबंधित करने की सलाह दी।
देश में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत है; उपभोक्ता, वाहन, आवास और कारोबारी ऋणों की त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना।
RBI बैंकों के साथ लिक्विडिटी रणनीति पर बैठकें कर चुका है; फंड तैनाती का निर्णय बैंकों पर छोड़ा।
RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार रुपया 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक संचयी रूप से 13.1% कमजोर हुआ है।
गुप्ता ने कहा कि रुपये के मौजूदा स्तर पर स्थिरता और संभावित मजबूती की पर्याप्त गुंजाइश है।
आने वाले वर्षों में CAD में और कमी की उम्मीद; BOP परंपरागत रूप से सकारात्मक बना हुआ है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने 24 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ देशभर में ऋण की मांग में तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है और बैंकों को आने वाले महीनों में लिक्विडिटी प्रबंधन को अत्यंत सावधानी से संचालित करना होगा। यह बात उन्होंने 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव के प्रश्नोत्तर सत्र में कही।

मुख्य घटनाक्रम

जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है और बैंकों के सामने दोहरी चुनौती है — बढ़ती ऋण मांग को पूरा करना और साथ ही पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखना। उन्होंने बताया कि RBI इस विषय पर बैंकों के साथ बैठकें कर चुका है, जिनमें लिक्विडिटी प्रबंधन की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग किस क्षेत्र में और किस प्रकार किया जाए, यह निर्णय प्रत्येक बैंक अपनी व्यावसायिक जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार करेगा। केंद्रीय बैंक इस मामले में कोई सीधा निर्देश नहीं देगा।

बैंकों की एसेट लायबिलिटी स्थिति की भूमिका

डिप्टी गवर्नर जैन ने कहा कि बैंकों की मौजूदा परियोजनाएं, ऋण प्रस्तावों की पाइपलाइन और भविष्य की लिक्विडिटी स्थिति का उनका आकलन यह तय करेगा कि वे उपलब्ध फंड का उपयोग किस प्रकार करते हैं। उनके अनुसार, बैंकों की एसेट लायबिलिटी पोजीशन फंड उपयोग के फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।

उन्होंने संकेत दिया कि त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता ऋण, वाहन ऋण, आवास ऋण और कारोबारी ऋणों की मांग में उछाल की संभावना रहती है। ऐसे में बैंकों को संसाधनों का इष्टतम प्रबंधन करना होगा ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।

रुपये की स्थिति पर डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के विचार

इसी कार्यक्रम श्रृंखला में RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मुंबई में SBIDFSC के एक सम्मेलन में भारतीय रुपये की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक भारतीय रुपया संचयी रूप से 13.1 प्रतिशत (पॉइंट टू पॉइंट आधार पर) कमजोर हुआ है।

गुप्ता ने कहा, "अगर कुछ कहा जाए तो ऐसा लगता है कि रुपए का मौजूदा स्तर न केवल स्थिर होने, बल्कि शायद मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश रखता है। जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी इसी तरह की उम्मीद जताई थी।" उनके अनुसार, RBI विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

चालू खाता घाटा और भुगतान संतुलन

गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा (CAD) और कम होना चाहिए। इसकी वजह अर्थव्यवस्था की पारंपरिक मजबूती के साथ साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता जैसी नई ताकतों का उभरना है। उन्होंने यह भी स्मरण दिलाया कि RBI के पास कई दशकों के CAD या भुगतान संतुलन (BOP) के शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।

गौरतलब है कि भारत परंपरागत रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप BOP समग्र रूप से सकारात्मक बना रहता है। यह ढाँचा रुपये के मूल्य को दीर्घकालिक आधार पर समर्थन देता है।

आगे क्या होगा

त्योहारी सीजन आमतौर पर अक्टूबर नवंबर में अपने चरम पर होता है, और इस दौरान बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी दबाव बढ़ सकता है। RBI के संकेत स्पष्ट हैं — बैंकों को अपनी बैलेंस शीट की मजबूती से समझौता किए बिना ऋण की बढ़ती मांग को पूरा करना होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्रीय बैंक की यह सलाह वित्तीय स्थिरता के प्रति उसकी सजगता को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर वित्तीय स्थिरता से समझौता न हो। असली सवाल यह है कि जब बैंक खुद ऊँची जमा लागत और मार्जिन दबाव झेल रहे हैं, तब लिक्विडिटी संतुलन की 'व्यावसायिक निर्णय' वाली भाषा कितनी व्यावहारिक है। पूनम गुप्ता का रुपये पर बयान भी उल्लेखनीय है — 13.1% की गिरावट के बाद 'मजबूती की गुंजाइश' का संकेत देना बाजार को एक दिशा देने का प्रयास हो सकता है, लेकिन पूंजी प्रवाह की अनिश्चितता और वैश्विक डॉलर की मजबूती इस आशावाद को चुनौती दे सकती है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को क्या सलाह दी?
रोहित जैन ने कहा कि त्योहारी सीजन में बढ़ती ऋण मांग के बीच बैंकों को अपनी लिक्विडिटी का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना होगा। उन्होंने यह बात 24 सितंबर 2026 को 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में कही।
त्योहारी सीजन में किन ऋणों की मांग बढ़ने की उम्मीद है?
RBI डिप्टी गवर्नर के अनुसार त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता ऋण, वाहन ऋण, आवास ऋण और कारोबारी ऋणों की मांग में उछाल आने की संभावना रहती है। ऐसे में बैंकों को संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।
भारतीय रुपया कितना कमजोर हुआ है और आगे क्या उम्मीद है?
RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार रुपया 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक संचयी रूप से 13.1% कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि रुपये के मौजूदा स्तर पर न केवल स्थिर रहने, बल्कि मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश है।
चालू खाता घाटे (CAD) को लेकर RBI का क्या रुख है?
पूनम गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में CAD और कम होना चाहिए, क्योंकि अर्थव्यवस्था की पारंपरिक मजबूती के साथ साथ वस्तु निर्यात में सफलता जैसी नई ताकतें उभर रही हैं। RBI के पास कई दशकों के CAD या BOP शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।
बैंकों की लिक्विडिटी तैनाती का फैसला कौन करेगा?
RBI डिप्टी गवर्नर जैन ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह बैंकों का व्यावसायिक निर्णय होगा। प्रत्येक बैंक अपनी एसेट लायबिलिटी पोजीशन, ऋण प्रस्तावों की पाइपलाइन और भविष्य की लिक्विडिटी स्थिति के आकलन के आधार पर फंड का उपयोग तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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