RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का ऐलान: वित्त वर्ष 2028 तक पॉलिमर नोट प्रचलन में, फील्ड ट्रायल जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 5 अगस्त को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर करेंसी नोटों को देशभर में प्रचलन में लाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर जारी करने से पहले इन नोटों की गुणवत्ता और प्रदर्शन को परखने के लिए फील्ड ट्रायल अभी जारी हैं।
पायलट कार्यक्रम की स्थिति
गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, पॉलिमर बैंक नोटों का पायलट कार्यक्रम सक्रिय रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा कि RBI बाज़ार में नोट जारी करने से पहले उनका व्यापक परीक्षण करेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये नोट भारतीय जलवायु और उपयोग की परिस्थितियों में प्रभावी और टिकाऊ साबित हों। फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही व्यापक स्तर पर चलन में लाने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में वित्त मंत्रालय ने संसद को सूचित किया था कि सरकार ने RBI के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है, जिसके तहत ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाना है।
कितने नोट जारी होंगे
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस पायलट परियोजना के तहत RBI ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलिमर नोट जारी करने की योजना बना रहा है। इन नोटों के ज़रिए उनकी मज़बूती, टिकाऊपन और विभिन्न भारतीय परिस्थितियों में उपयुक्तता का परीक्षण किया जाएगा। देश की विविध जलवायु — उमस, अत्यधिक गर्मी और वर्षा — को देखते हुए यह परीक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पॉलिमर नोटों के फायदे
RBI का मानना है कि पॉलिमर बैंक नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। खासकर छोटे मूल्यवर्ग के नोट, जो सर्वाधिक उपयोग होने के कारण जल्दी खराब होते हैं, उनके लिए पॉलिमर नोट बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इससे नोटों को बार-बार बदलने की लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, पॉलिमर नोटों में पारदर्शी विंडो और नकली नोटों पर रोक लगाने वाले अत्याधुनिक सुरक्षा तत्व जोड़े जा सकते हैं, जो जालसाज़ी रोकने में सहायक होंगे।
कागज़ी नोट बने रहेंगे
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागज़ी मुद्रा को पूरी तरह हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि पॉलिमर नोट जारी किए जाते हैं, तो वे मौजूदा कागज़ी नोटों के साथ-साथ ही प्रचलन में रहेंगे — दोनों प्रणालियाँ समानांतर चलती रहेंगी।
आगे की राह
RBI ने संकेत दिया है कि पूरे देश में अलग-अलग जलवायु और उपयोग की परिस्थितियों में पॉलिमर नोटों के प्रदर्शन का व्यापक आकलन किया जाएगा। फील्ड ट्रायल और परिचालन संबंधी समीक्षा के नतीजों के आधार पर ही वित्त वर्ष 2028 तक व्यापक रोलआउट का अंतिम फैसला होगा — यह भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में निर्णायक कदम होगा।