4 नवंबर 2026
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सिद्धारमैया का शक्ति प्रदर्शन: 26 नवंबर को मैसूरु में अहिंदा महासम्मेलन, 2028 की जंग की तैयारी

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सिद्धारमैया का शक्ति प्रदर्शन: 26 नवंबर को मैसूरु में अहिंदा महासम्मेलन, 2028 की जंग की तैयारी

सारांश

कर्नाटक में सत्ता की नई बिसात बिछ रही है — सिद्धारमैया का मैसूरु में 26 नवंबर का अहिंदा सम्मेलन महज एक रैली नहीं, बल्कि शिवकुमार की बढ़ती पकड़ के खिलाफ खुली चुनौती है। विधान परिषद की चारों सीटें गँवाने के बाद पार्टी की नींव हिल चुकी है, और 2028 की लड़ाई अभी से शुरू हो गई है।

मुख्य बातें

सिद्धारमैया के समर्थक 26 नवंबर 2026 को मैसूरु में बड़े अहिंदा सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं।
सम्मेलन का मकसद अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित (अहिंदा) समुदायों को एकजुट कर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करना है।
हाल के विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस विधायक के.एन.
राजन्ना ने चुनावी हार के लिए कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को जिम्मेदार ठहराया।
राजन्ना सिद्धारमैया , एच.सी.
महादेवप्पा और मंत्री सतीश जारकीहोली के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश में हैं।
सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मुलाकात में स्टिंग मामले पर सरकार के रवैये को लेकर असंतोष जताया — सूत्रों के अनुसार।

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर गहराती गुटबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक 26 नवंबर 2026 को उनके गृह जिले मैसूरु में एक बड़े अहिंदा सम्मेलन के आयोजन की तैयारी में जुटे हैं। इस सम्मेलन का मकसद अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित (अहिंदा) समुदायों को एकजुट कर सिद्धारमैया की राजनीतिक ताकत का खुला प्रदर्शन करना है। विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की चारों सीटों पर हार के बाद यह पहल राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

सम्मेलन की पृष्ठभूमि

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पद संभालने के बाद सिद्धारमैया और उनके करीबी नेताओं को कांग्रेस संगठन में धीरे-धीरे हाशिये पर धकेला जा रहा है। शिवकुमार कथित तौर पर पार्टी ढाँचे पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद से काफी हद तक चुप्पी साधे बैठे सिद्धारमैया अब एक बार फिर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता स्थापित करने की दिशा में सक्रिय हो रहे हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि सिद्धारमैया ने नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ एकांत बैठक के दौरान कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले से निपटने के सरकार के तरीके पर अपना असंतोष जताया। यह बैठक और उसके बाद की सक्रियता इस बात का संकेत है कि सिद्धारमैया खेमा अब चुप नहीं रहना चाहता।

चुनावी हार और बढ़ता दबाव

हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की चारों सीटों पर हार ने पार्टी के भीतर सवालों का सिलसिला शुरू कर दिया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना ने इस चुनावी पराजय के लिए सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को जिम्मेदार ठहराया है। यह बयान सत्तारूढ़ दल के भीतर की अंदरूनी दरार को उजागर करता है।

गौरतलब है कि अहिंदा वोट बैंक कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि यह सामाजिक गठबंधन कमजोर पड़ा, तो 2028 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की राह मुश्किल हो सकती है।

राजन्ना की भूमिका और मेल-मिलाप की कोशिश

राजन्ना इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए प्रमुख अहिंदा नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और उनके बीच पैदा हुई गलतफहमियाँ दूर करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों ने सिद्धारमैया और दलित समुदाय के वरिष्ठ नेता एच.सी. महादेवप्पा के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की है। उन्होंने मैसूरु में सिद्धारमैया के खिलाफ नारे लगवाए और उनके खिलाफ लेख भी लिखवाए। हम इन सभी मुद्दों को ठीक करेंगे। मुझे विश्वास है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा।'

राजन्ना की कोशिश सिद्धारमैया, एच.सी. महादेवप्पा और मंत्री सतीश जारकीहोली सहित तमाम प्रमुख अहिंदा नेताओं के बीच समन्वय बनाने की है। उनके मुताबिक, कुछ बिचौलिये वरिष्ठ नेताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिसे आपसी संवाद और सामूहिक प्रयासों से दूर किया जा सकता है।

2028 के लिए रणनीतिक महत्व

सिद्धारमैया खेमे की मूल चिंता यह है कि शीर्ष नेताओं के बीच खींचतान का असर कांग्रेस के पारंपरिक अहिंदा समर्थन आधार पर न पड़े। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सामाजिक गठबंधन को मजबूत और एकजुट बनाए रखना दोनों खेमों के लिए अस्तित्व का सवाल बन गया है।

26 नवंबर का यह सम्मेलन केवल एक आंतरिक पार्टी आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश देने का मंच है कि सिद्धारमैया अभी भी कर्नाटक की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिवकुमार गुट इस शक्ति प्रदर्शन पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ऐतिहासिक रूप से कर्नाटक में कांग्रेस की जीत की सबसे बड़ी नींव रहा है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहिंदा सम्मेलन क्या है और यह 26 नवंबर को क्यों हो रहा है?
अहिंदा का अर्थ है अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित — कर्नाटक में कांग्रेस का प्रमुख सामाजिक समर्थन आधार। 26 नवंबर 2026 को मैसूरु में आयोजित यह सम्मेलन पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थकों द्वारा पार्टी के भीतर जारी सत्ता संघर्ष के बीच अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए बुलाया गया है।
सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच विवाद की जड़ क्या है?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार के पद संभालने के बाद सिद्धारमैया और उनके करीबी नेताओं को संगठन में कथित तौर पर हाशिये पर धकेला गया है। कांग्रेस संगठन पर नियंत्रण को लेकर दोनों खेमों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की हार का इस सम्मेलन से क्या संबंध है?
हाल के विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना ने इस हार के लिए सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को जिम्मेदार ठहराया है, जिसके बाद अहिंदा नेताओं की एकता बहाल करने की ज़रूरत और तीव्र हो गई।
के.एन. राजन्ना इस सम्मेलन में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना सिद्धारमैया, एच.सी. महादेवप्पा और मंत्री सतीश जारकीहोली के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ बिचौलिये वरिष्ठ नेताओं के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं, जिसे आपसी बातचीत से सुलझाया जाएगा।
2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
अहिंदा वोट बैंक कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का ऐतिहासिक आधार रहा है। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस गठबंधन में दरार पड़ना पार्टी के लिए बड़ा खतरा है। सिद्धारमैया खेमे की कोशिश है कि शीर्ष नेताओं की आपसी खींचतान का असर पारंपरिक मतदाताओं तक न पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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