18 सितंबर 2026
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सिद्दारमैया के विश्वस्त राजन्ना का तंज: 'अब कांग्रेस को वोट सिर्फ शिवकुमार दिलाएंगे'

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सिद्दारमैया के विश्वस्त राजन्ना का तंज: 'अब कांग्रेस को वोट सिर्फ शिवकुमार दिलाएंगे'

सारांश

सिद्दारमैया के विश्वस्त विधायक राजन्ना का तंज — 'अब वोट सिर्फ शिवकुमार दिलाएंगे' — कर्नाटक कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरण और गुटबाज़ी की परतें खोल देता है। मुख्यमंत्री पद बदलने के बाद कुरुबा बनाम वोक्कालिगा की यह बहस 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति को सीधे प्रभावित करेगी।

मुख्य बातें

केएन राजन्ना , कांग्रेस विधायक और सिद्दारमैया के निकट सहयोगी, ने 18 सितंबर 2026 को तुमकुरु में कहा कि अब कांग्रेस को वोट केवल सीएम डीके शिवकुमार की बदौलत मिलेंगे।
राजन्ना ने कुरुबा और वोक्कालिगा समुदायों की जातीय वोट गणना की तुलना करते हुए शिवकुमार की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाया।
सिद्दारमैया को उन्होंने 'अहिंदा' वर्ग का निर्विवाद नेता बताया और उनकी पार्टी में अहमियत का बचाव किया।
राजन्ना ने मधुगिरी सब-डिवीजन से लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा ज़ाहिर किया।
नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने कहा — खड़गे, शिवकुमार या सिद्दारमैया में से किसी को कमज़ोर करना पूरी पार्टी को कमज़ोर करना होगा।

कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के निकट सहयोगी केएन राजन्ना ने 18 सितंबर 2026 को तुमकुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अब कर्नाटक में कांग्रेस को वोट केवल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बदौलत मिलेंगे — न कि सिद्दारमैया के प्रभाव से। यह बयान कर्नाटक कांग्रेस के भीतर जारी नेतृत्व-तनाव की पृष्ठभूमि में आया है।

राजन्ना ने क्या कहा

राजन्ना ने पत्रकारों के सवाल पर साफ शब्दों में कहा, 'अब सिद्दारमैया से कोई वोट नहीं मिलेगा। पार्टी को सारे वोट सिर्फ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से ही मिलेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कुरुबा समुदाय के वोट कांग्रेस को मिले थे, उसी तर्ज पर शिवकुमार के नेतृत्व में वोक्कालिगा समुदाय के मतदाता भी कांग्रेस की ओर झुक सकते हैं।

उन्होंने सवाल उठाया, 'जब शिवकुमार मुख्यमंत्री बने हैं, तो क्या वोक्कालिगा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में कांग्रेस को वोट देंगे?' — और इसका जवाब उन्होंने मतदाताओं पर छोड़ा।

सिद्दारमैया की स्थिति पर सफाई

इसके साथ ही राजन्ना ने सिद्दारमैया की पार्टी में प्रासंगिकता का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, 'सिद्दारमैया 'अहिंदा' वर्ग के निर्विवाद नेता हैं।' राजन्ना ने स्वीकार किया कि सिद्दारमैया ने उन्हें एपेक्स बैंक का अध्यक्ष बनाने की कोशिश की थी, जो सफल नहीं हुई, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार में सिद्दारमैया की बात की कोई अहमियत नहीं।

यह ऐसे समय में आया है जब सिद्दारमैया की मुख्यमंत्री पद से विदाई के बाद कर्नाटक कांग्रेस में जातीय समीकरण और गुटबाज़ी को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं।

राजन्ना के अपने राजनीतिक इरादे

राजन्ना ने अपनी भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी उजागर की। उन्होंने कहा कि मधुगिरी सब-डिवीजन में परिसीमन के बाद एक नया निर्वाचन क्षेत्र बनेगा और वे वहीं से लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी बात का झटका नहीं लगा है और वे अपने रुख पर कायम हैं।

शिवकुमार खेमे की प्रतिक्रिया

राजन्ना के बयान पर नगर प्रशासन मंत्री और मुख्यमंत्री शिवकुमार के निकट सहयोगी एचसी बालकृष्ण ने संतुलन साधते हुए कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया — इनमें से किसी भी प्रमुख नेता को कमज़ोर किया जाएगा तो पार्टी कमज़ोर होगी। यह बयान आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में अपेक्षित है, और इससे पहले जातीय वोट बैंक की गणना तेज़ होती जा रही है। राजन्ना जैसे वरिष्ठ विधायकों के इस तरह के बयान कांग्रेस के लिए एक दोधारी तलवार हैं — एक ओर ये नेतृत्व संघर्ष को खुलेआम उजागर करते हैं, दूसरी ओर सिद्दारमैया गुट की बेचैनी को भी सामने लाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कर्नाटक कांग्रेस की उस आंतरिक दरार का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है जिसे पार्टी परदे के पीछे रखने की कोशिश कर रही है। सिद्दारमैया के वफ़ादार का यह कहना कि 'अब उनसे वोट नहीं मिलेंगे' — वस्तुतः मुख्यमंत्री पद परिवर्तन की राजनीतिक कीमत को उजागर करता है। गौरतलब है कि जब भी कांग्रेस ने जातीय प्रतिनिधित्व को वोट बैंक की चाबी के रूप में इस्तेमाल किया है, नतीजे अक्सर उम्मीद से कम रहे हैं। एचसी बालकृष्ण की संतुलन-वाली प्रतिक्रिया बताती है कि पार्टी नुकसान-नियंत्रण में है — लेकिन 2028 से पहले यह दरार भरना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केएन राजन्ना ने सिद्दारमैया पर क्या तंज कसा?
कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने 18 सितंबर 2026 को तुमकुरु में कहा कि अब पार्टी को वोट सिर्फ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की वजह से मिलेंगे, सिद्दारमैया के प्रभाव से नहीं। उन्होंने यह बात कुरुबा और वोक्कालिगा समुदायों की जातीय वोट गणना की तुलना करते हुए कही।
कर्नाटक कांग्रेस में सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच विवाद क्या है?
कर्नाटक में 2023 की विधानसभा जीत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और मौजूदा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर तनाव जारी है। दोनों नेताओं के समर्थक अलग-अलग जातीय समुदायों — कुरुबा और वोक्कालिगा — का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे पार्टी में गुटबाज़ी सामने आती रहती है।
'अहिंदा' समुदाय क्या है और सिद्दारमैया से इसका क्या संबंध है?
'अहिंदा' कर्नाटक में अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित वर्गों का एक राजनीतिक गठबंधन है। सिद्दारमैया इस वर्ग के प्रमुख नेता माने जाते हैं और इनके मतों को कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका दी जाती है।
एचसी बालकृष्ण ने राजन्ना के बयान पर क्या कहा?
नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने कहा कि AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया — इनमें से किसी को भी कमज़ोर किया गया तो पूरी पार्टी कमज़ोर होगी। यह बयान आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजन्ना के अपने राजनीतिक इरादे क्या हैं?
केएन राजन्ना ने कहा कि मधुगिरी सब-डिवीजन में परिसीमन के बाद बनने वाले नए निर्वाचन क्षेत्र से वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एपेक्स बैंक अध्यक्ष न बन पाने का कोई झटका नहीं लगा है।
राष्ट्र प्रेस
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