सिद्दारमैया के विश्वस्त राजन्ना का तंज: 'अब कांग्रेस को वोट सिर्फ शिवकुमार दिलाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के निकट सहयोगी केएन राजन्ना ने 18 सितंबर 2026 को तुमकुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अब कर्नाटक में कांग्रेस को वोट केवल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बदौलत मिलेंगे — न कि सिद्दारमैया के प्रभाव से। यह बयान कर्नाटक कांग्रेस के भीतर जारी नेतृत्व-तनाव की पृष्ठभूमि में आया है।
राजन्ना ने क्या कहा
राजन्ना ने पत्रकारों के सवाल पर साफ शब्दों में कहा, 'अब सिद्दारमैया से कोई वोट नहीं मिलेगा। पार्टी को सारे वोट सिर्फ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से ही मिलेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कुरुबा समुदाय के वोट कांग्रेस को मिले थे, उसी तर्ज पर शिवकुमार के नेतृत्व में वोक्कालिगा समुदाय के मतदाता भी कांग्रेस की ओर झुक सकते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया, 'जब शिवकुमार मुख्यमंत्री बने हैं, तो क्या वोक्कालिगा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में कांग्रेस को वोट देंगे?' — और इसका जवाब उन्होंने मतदाताओं पर छोड़ा।
सिद्दारमैया की स्थिति पर सफाई
इसके साथ ही राजन्ना ने सिद्दारमैया की पार्टी में प्रासंगिकता का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, 'सिद्दारमैया 'अहिंदा' वर्ग के निर्विवाद नेता हैं।' राजन्ना ने स्वीकार किया कि सिद्दारमैया ने उन्हें एपेक्स बैंक का अध्यक्ष बनाने की कोशिश की थी, जो सफल नहीं हुई, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार में सिद्दारमैया की बात की कोई अहमियत नहीं।
यह ऐसे समय में आया है जब सिद्दारमैया की मुख्यमंत्री पद से विदाई के बाद कर्नाटक कांग्रेस में जातीय समीकरण और गुटबाज़ी को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं।
राजन्ना के अपने राजनीतिक इरादे
राजन्ना ने अपनी भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी उजागर की। उन्होंने कहा कि मधुगिरी सब-डिवीजन में परिसीमन के बाद एक नया निर्वाचन क्षेत्र बनेगा और वे वहीं से लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी बात का झटका नहीं लगा है और वे अपने रुख पर कायम हैं।
शिवकुमार खेमे की प्रतिक्रिया
राजन्ना के बयान पर नगर प्रशासन मंत्री और मुख्यमंत्री शिवकुमार के निकट सहयोगी एचसी बालकृष्ण ने संतुलन साधते हुए कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया — इनमें से किसी भी प्रमुख नेता को कमज़ोर किया जाएगा तो पार्टी कमज़ोर होगी। यह बयान आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में अपेक्षित है, और इससे पहले जातीय वोट बैंक की गणना तेज़ होती जा रही है। राजन्ना जैसे वरिष्ठ विधायकों के इस तरह के बयान कांग्रेस के लिए एक दोधारी तलवार हैं — एक ओर ये नेतृत्व संघर्ष को खुलेआम उजागर करते हैं, दूसरी ओर सिद्दारमैया गुट की बेचैनी को भी सामने लाते हैं।