13 अक्टूबर 2026
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रुपये की अस्थिरता पर RBI सतर्क, निर्मला सीतारमण बोलीं — किसी स्तर का बचाव नहीं, व्यवस्थित माहौल लक्ष्य

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रुपये की अस्थिरता पर RBI सतर्क, निर्मला सीतारमण बोलीं — किसी स्तर का बचाव नहीं, व्यवस्थित माहौल लक्ष्य

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि RBI रुपये को किसी तय स्तर पर बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि बाज़ार में व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है। डेरिवेटिव लिमिट कटौती और डॉलर विंडो जैसे उपायों के बाद रुपया 94.50 तक पहुँचा; मंगलवार को 77 पैसे की और मज़बूती।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि RBI रुपये को किसी निश्चित स्तर पर नहीं थामना चाहता, बल्कि व्यवस्थित माहौल तैयार करना उसका लक्ष्य है।
RBI ने अक्टूबर में तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर लिक्विडिटी विंडो खोली और डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर की।
इन उपायों के बाद रुपया मज़बूत होकर ₹94.50 प्रति डॉलर पर आया; मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 77 पैसे की तेज़ी के साथ 95.05 पर पहुँचा।
सीतारमण ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में आई अधिकांश कमज़ोरी वैश्विक कारणों से है जो भारत के नियंत्रण से बाहर हैं।
सरकार राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के ज़रिए मज़बूत व्यापक आर्थिक नींव बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में स्पष्ट किया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का उद्देश्य रुपये को किसी निश्चित स्तर पर थामे रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाज़ार में व्यवस्थित और स्थिर माहौल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दबावों के बीच केंद्रीय बैंक बाज़ार में उतार चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए आगे भी कदम उठाता रहेगा।

मुख्य बयान और RBI का रुख

सीतारमण ने फोरम में कहा, "आरबीआई रुपये में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने नियामक उपायों के ज़रिए अहम कोशिशें कर रहा है। वे रुपये को किसी खास स्तर पर बनाए रखने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "आगे भी इसी तरह के उपाय जारी रहेंगे।"

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के हफ्तों में रुपये में तेज़ गिरावट दर्ज की गई थी और केंद्रीय बैंक को मुद्रा बाज़ार को स्थिर करने के लिए कई त्वरित कदम उठाने पड़े थे।

RBI द्वारा उठाए गए उपाय

अक्टूबर में RBI ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए एक विशेष डॉलर लिक्विडिटी विंडो खोली। इसके अलावा, रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को पुनः बुक करने के नियमों को सख्त किया गया।

साथ ही, बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र वाले कुछ डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई। इन उपायों के बाद बाज़ार में भरोसा लौटा और रुपया मज़बूत होकर ₹94.50 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया।

रुपये की मौजूदा स्थिति

मंगलवार के शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 77 पैसे की मज़बूती के साथ 95.05 के स्तर पर पहुँच गया। यह हाल की गिरावट से उबरने का संकेत है।

गौरतलब है कि पिछले डेढ़ साल में रुपये की विनिमय दर में उल्लेखनीय कमज़ोरी दर्ज की गई है, जिसे रोकने के लिए नियामक स्तर पर लगातार प्रयास किए गए हैं।

वैश्विक कारण और व्यापक आर्थिक आधार

सीतारमण ने तर्क दिया कि मुद्रा में आई अधिकांश कमज़ोरी उन कारकों से है जो भारत के नियंत्रण से बाहर हैं। उन्होंने कहा, "इसके पीछे कई कारण हैं और उनमें से ज़्यादातर देश के बाहर की चुनौतियों से जुड़े हैं।"

वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति निर्माता राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के ज़रिए मज़बूत व्यापक आर्थिक नींव बनाए रखने पर केंद्रित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डॉलर की मज़बूती और भू राजनीतिक तनाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना रहे हैं।

आगे क्या होगा

सीतारमण ने आश्वस्त किया कि RBI सतर्क बना रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर मुद्रा बाज़ार में अस्थिरता रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने में देर नहीं करेगा। बाज़ार विश्लेषकों की निगाह अब आगामी RBI मौद्रिक नीति समीक्षा और वैश्विक संकेतों पर टिकी होगी, जो रुपये की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डेरिवेटिव लिमिट में इतनी भारी कटौती और विशेष विंडो जैसे असाधारण उपायों की ज़रूरत क्यों पड़ी। वैश्विक कारणों का तर्क स्वीकार्य है, लेकिन यह घरेलू राजकोषीय और चालू खाता घाटे की भूमिका को परोक्ष रूप से नज़रअंदाज़ करता है। मुद्रा स्थिरता का श्रेय नीतिगत दक्षता को देना तब तक अधूरा है जब तक विदेशी मुद्रा भंडार के स्तर और उसकी टिकाऊ लागत को पारदर्शी रूप से सामने न रखा जाए।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI रुपये की अस्थिरता को कम करने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
RBI ने अक्टूबर 2026 में सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए विशेष डॉलर लिक्विडिटी विंडो खोली, डेरिवेटिव अनुबंधों की पुनर्बुकिंग के नियम सख्त किए और बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र वाले डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी। इन उपायों के बाद रुपया मज़बूत होकर ₹94.50 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया।
क्या RBI रुपये को किसी खास स्तर पर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है?
नहीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि RBI का लक्ष्य रुपये को किसी निर्धारित स्तर पर थामे रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाज़ार में व्यवस्थित और स्थिर माहौल तैयार करना है। केंद्रीय बैंक ज़रूरत के अनुसार हस्तक्षेप करता है, न कि किसी लक्षित विनिमय दर की रक्षा के लिए।
रुपये में हाल की कमज़ोरी के क्या कारण हैं?
वित्त मंत्री के अनुसार, पिछले डेढ़ साल में रुपये में आई अधिकांश कमज़ोरी वैश्विक कारणों से है जो भारत के नियंत्रण से बाहर हैं। इनमें डॉलर की वैश्विक मज़बूती, भू राजनीतिक अनिश्चितता और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर बाहरी दबाव शामिल बताए गए हैं।
मंगलवार को रुपये की स्थिति क्या रही?
13 अक्टूबर 2026 के शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 77 पैसे मज़बूत होकर 95.05 के स्तर पर पहुँच गया। यह हाल के RBI उपायों और बाज़ार में लौटे भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
आगे RBI और क्या कदम उठा सकता है?
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि RBI सतर्क बना रहेगा और यदि ज़रूरत पड़ी तो मुद्रा बाज़ार में अस्थिरता रोकने के लिए अतिरिक्त नियामक कदम उठाए जाएंगे। सरकार राजकोषीय अनुशासन और विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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