23 अक्टूबर 2026
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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले — रुपए का कोई लक्ष्य स्तर नहीं, विदेशी मुद्रा बाज़ार में स्थिरता है प्राथमिकता

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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले — रुपए का कोई लक्ष्य स्तर नहीं, विदेशी मुद्रा बाज़ार में स्थिरता है प्राथमिकता

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया — रुपए का कोई 'फ्लोर' या 'सीलिंग' नहीं है, लक्ष्य सिर्फ बाज़ार की व्यवस्था है। यह बयान तब आया जब रुपया ₹97 के रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरकर ₹94.83 पर आ गया और एक दशक में 42% की गिरावट राजनीतिक बहस का विषय बन चुकी है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 23 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक रुपए के किसी निश्चित स्तर की रक्षा नहीं करता।
RBI का फोकस विदेशी मुद्रा बाज़ार में स्थिरता और व्यवस्था बनाए रखना है; हस्तक्षेप केवल सट्टेबाज़ी या अत्यधिक उतार-चढ़ाव के समय।
रुपया हाल में ₹97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुँचा था; गुरुवार को ₹94.83 पर बंद हुआ।
अक्टूबर 2016 से अब तक रुपए में डॉलर के मुकाबले लगभग 42 प्रतिशत की गिरावट आई है।
मल्होत्रा के अनुसार भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और पिछले एक दशक की औसत महंगाई दर 4.7 प्रतिशत — दोनों आर्थिक मज़बूती के संकेत।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 23 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक डॉलर के मुकाबले रुपए के किसी निश्चित स्तर की रक्षा करने पर केंद्रित नहीं है — असली प्राथमिकता विदेशी मुद्रा बाज़ार में व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखना है। नई दिल्ली में आयोजित NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि RBI केवल तब हस्तक्षेप करता है जब सट्टेबाज़ी या अत्यधिक उतार-चढ़ाव बाज़ार को अस्थिर करने लगे।

RBI का स्पष्ट रुख

गवर्नर मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा, 'हम रुपए के लिए किसी खास कीमत या स्तर को लक्ष्य नहीं बनाते हैं, लेकिन साथ ही हमारी कोशिश यह रहती है कि विदेशी मुद्रा बाज़ारों में स्थिति व्यवस्थित बनी रहे। जैसा कि आपने पहले भी देखा है, अगर हमें लगता है कि बाज़ार में सट्टेबाज़ी हो रही है या बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव है, तो हम ज़रूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटते।'

यह बयान ऐसे समय आया है जब रुपए की दिशा को लेकर नीतिगत और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर बहस तेज़ है। RBI की इस 'फ्लोट लेकिन स्थिरता-केंद्रित' नीति को विशेषज्ञ 'प्रबंधित तैरती विनिमय दर' (managed float) की पुष्टि मानते हैं।

रुपए की हालिया चाल

हाल के हफ्तों में भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर — करीब ₹97 प्रति डॉलर — के आसपास पहुँच गया था। इसके बाद लगातार आठ कारोबारी सत्रों में रुपया मज़बूत हुआ और चार महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुँचा। हालाँकि गुरुवार को इसमें मामूली नरमी आई और यह ₹94.83 प्रति डॉलर पर आ गया।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2016 में रुपया ₹66.83 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। इस प्रकार एक दशक में डॉलर के मुकाबले रुपए में करीब 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है — एक आँकड़ा जो विपक्षी दलों ने आर्थिक दबाव के प्रमाण के रूप में उठाया है।

व्यापक आर्थिक आधार मज़बूत: मल्होत्रा

RBI गवर्नर ने रुपए की कमज़ोरी को समग्र आर्थिक स्थिति से अलग करते हुए कहा कि भारत के बुनियादी आर्थिक संकेतक मज़बूत बने हुए हैं। उन्होंने देश की हालिया 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर का हवाला देते हुए कहा कि यह अर्थव्यवस्था की आंतरिक मज़बूती का प्रमाण है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में डॉलर की मज़बूती और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ा है।

महंगाई पर RBI की स्थिति

मल्होत्रा ने महंगाई पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने माना कि कीमतों का मौजूदा दबाव अधिक है, लेकिन यह अभी भी केंद्रीय बैंक की सहन-सीमा (टॉलरेंस बैंड) के भीतर है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की औसत महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रही है, जो उससे पहले के चार वर्षों में दर्ज 7.4 प्रतिशत की औसत से काफी कम है।

आलोचकों का कहना है कि RBI को महंगाई और मुद्रा दोनों मोर्चों पर एक साथ संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आने वाले हफ्तों में RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में इन दोनों पहलुओं पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब रुपया ₹97 तक फिसला तो केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप कितना प्रभावी रहा। एक दशक में 42% की गिरावट महज़ वैश्विक डॉलर-मज़बूती का नतीजा नहीं — इसमें चालू खाते का घाटा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की अनिश्चितता भी शामिल है। GDP वृद्धि के आँकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन आम आयातक और उपभोक्ता जो मुद्रास्फीति झेल रहे हैं, उनके लिए 'टॉलरेंस बैंड के भीतर' की तसल्ली पर्याप्त नहीं। मुद्रा नीति की पारदर्शिता और संचार-रणनीति को और धारदार बनाने की ज़रूरत है ताकि बाज़ार को सट्टेबाज़ी का मौका न मिले।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI गवर्नर ने रुपए को लेकर क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 23 अक्टूबर 2026 को NDTV वर्ल्ड समिट में स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक डॉलर के मुकाबले रुपए के किसी निश्चित स्तर को लक्ष्य नहीं बनाता। उनका कहना था कि RBI की प्राथमिकता विदेशी मुद्रा बाज़ार में व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखना है।
RBI विदेशी मुद्रा बाज़ार में कब हस्तक्षेप करता है?
मल्होत्रा के अनुसार RBI तभी हस्तक्षेप करता है जब बाज़ार में सट्टेबाज़ी की गतिविधियाँ बढ़ें या असामान्य उतार-चढ़ाव हो। सामान्य बाज़ार उतार-चढ़ाव में केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप नहीं करता।
रुपए में एक दशक में कितनी गिरावट आई है?
अक्टूबर 2016 में रुपया ₹66.83 प्रति डॉलर पर था, जो अब ₹94.83 के स्तर पर है — यानी दस वर्षों में डॉलर के मुकाबले रुपए में करीब 42 प्रतिशत की गिरावट आई है। हाल में यह ₹97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब भी पहुँचा था।
महंगाई को लेकर RBI की क्या स्थिति है?
गवर्नर मल्होत्रा ने माना कि महंगाई का दबाव अभी ऊँचा है, लेकिन यह RBI की सहन-सीमा के भीतर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक की औसत महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रही है, जो उससे पहले के चार वर्षों की 7.4 प्रतिशत की औसत से काफी कम है।
भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में RBI गवर्नर ने क्या कहा?
मल्होत्रा के अनुसार भारत के व्यापक आर्थिक आधार मज़बूत हैं और देश की हालिया GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि प्रमुख आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था की आंतरिक मज़बूती को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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