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रुपया ₹100/डॉलर पहुँचे तो न घबराएँ, वैश्विक अस्थिरता घटते ही होगी रिकवरी: अरविंद पनगढ़िया

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रुपया ₹100/डॉलर पहुँचे तो न घबराएँ, वैश्विक अस्थिरता घटते ही होगी रिकवरी: अरविंद पनगढ़िया

सारांश

पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने साफ कहा — रुपया ₹100/डॉलर छुए तो भी घबराहट की ज़रूरत नहीं। RBI को विदेशी मुद्रा भंडार दाँव पर लगाने की बजाय बाजार को खुद समायोजित होने देना चाहिए। वैश्विक अनिश्चितता घटते ही रिकवरी स्वाभाविक होगी।

मुख्य बातें

अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा — रुपया ₹100/डॉलर पहुँचे तो घबराने की ज़रूरत नहीं, वैश्विक अस्थिरता घटते ही रिकवरी होगी।
RBI को मनोवैज्ञानिक स्तर बचाने के लिए आक्रामक हस्तक्षेप से बचना चाहिए, अन्यथा विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर घरेलू ईंधन पर क्रमिक रूप से होना चाहिए — कृत्रिम रूप से कीमतें दबाना उचित नहीं।
उच्च ब्याज दर वाली एनआरआई जमा योजनाओं के प्रस्तावों पर पनगढ़िया ने आपत्ति जताई — दीर्घकालिक बोझ बढ़ने की चेतावनी दी।
PM मोदी की विवेकाधीन विदेशी मुद्रा खर्च कम करने की अपील का समर्थन किया, लेकिन अनिवार्य प्रतिबंध के खिलाफ आगाह किया।

अर्थशास्त्री और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने 25 मई 2026 को स्पष्ट किया कि यदि डॉलर के मुकाबले रुपया ₹100 के स्तर तक पहुँचता है, तो इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है — जैसे ही वैश्विक अस्थिरता का दौर थमेगा, रुपए में स्वाभाविक रूप से तेजी लौट आएगी। उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से आग्रह किया कि वह मुद्रा बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप से बचे और विनिमय दर को बाजार के अनुसार समायोजित होने दे।

विनिमय दर पर पनगढ़िया का रुख

पनगढ़िया ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में बाहरी झटकों को अवशोषित करने का काम विनिमय दर को करने देना चाहिए। उनके अनुसार, यदि RBI रुपए की गिरावट रोकने के लिए आक्रामक रूप से हस्तक्षेप करता है, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चाहे मौजूदा वैश्विक संकट अस्थायी हो या दीर्घकालिक, मुद्रा का क्रमिक अवमूल्यन अर्थव्यवस्था को अधिक कुशलता से समायोजित करने में सहायक होता है।

ईंधन कीमतों पर सरकारी नीति

पनगढ़िया ने कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के संदर्भ में कहा कि इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर धीरे-धीरे परिलक्षित होना चाहिए — कृत्रिम रूप से कीमतें दबाए रखना दीर्घकाल में नुकसानदेह होगा। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, 'सरकार किसी भी उत्पाद की निश्चित कीमत की गारंटी देने के लिए नहीं है।'

एनआरआई जमा योजनाओं पर आपत्ति

उच्च ब्याज दर वाली एनआरआई जमा योजनाओं के ज़रिए विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के प्रस्तावों पर पनगढ़िया ने आपत्ति जताई। उनका मानना है कि ऐसे उपाय अल्पकाल में राहत दे सकते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ बढ़ाते हैं।

मोदी की अपील पर समर्थन, अनिवार्य प्रतिबंध पर आगाह

पनगढ़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का समर्थन किया जिसमें नागरिकों से विवेकाधीन विदेशी मुद्रा खर्च कम करने का आग्रह किया गया था। हालाँकि, उन्होंने अनिवार्य प्रतिबंध लगाने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसे कदम उल्टे पड़ सकते हैं।

गौरतलब है कि पनगढ़िया ने इससे पहले सोशल मीडिया पर भी यही रुख व्यक्त किया था कि नीति निर्माताओं को ₹100 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को मौद्रिक रणनीति का आधार नहीं बनने देना चाहिए। अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में बाजार-संचालित मुद्रा समायोजन अधिक टिकाऊ होते हैं — यह उनका केंद्रीय तर्क है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब रुपए पर दबाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है। आने वाले हफ्तों में RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक और वैश्विक बाजारों की दिशा इस चर्चा को और आकार देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसका दीर्घकालिक लाभ सीमित रहा और भंडार पर दबाव बढ़ा। असली सवाल यह है कि क्या भारत की मौद्रिक नीति बाजार-संचालित लचीलेपन के लिए तैयार है, या वह अभी भी संख्याओं के प्रतीकात्मक मूल्य से संचालित होती है। एनआरआई जमा योजनाओं पर उनकी आपत्ति भी महत्वपूर्ण है — 2013 के FCNR(B) अनुभव से सबक लेना ज़रूरी है, जब उन योजनाओं की परिपक्वता ने बाद में दबाव बढ़ाया था।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद पनगढ़िया ने रुपए की गिरावट पर क्या कहा?
पनगढ़िया ने कहा कि रुपया ₹100/डॉलर के स्तर तक पहुँचे तो भी घबराने की ज़रूरत नहीं है। उनके अनुसार वैश्विक अस्थिरता समाप्त होते ही रुपए में स्वाभाविक रिकवरी आएगी और RBI को विनिमय दर को बाजार के अनुसार समायोजित होने देना चाहिए।
RBI को रुपए में हस्तक्षेप क्यों नहीं करना चाहिए?
पनगढ़िया के अनुसार, यदि RBI रुपए की गिरावट रोकने के लिए आक्रामक रूप से हस्तक्षेप करता है तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है। वैश्विक झटकों को अवशोषित करने का काम बाजार-संचालित विनिमय दर को करने देना अधिक टिकाऊ नीति है।
एनआरआई जमा योजनाओं पर पनगढ़िया की आपत्ति क्यों है?
उनका मानना है कि उच्च ब्याज दर वाली एनआरआई जमा योजनाएँ अल्पकाल में विदेशी मुद्रा प्रवाह तो बढ़ा सकती हैं, लेकिन इनसे अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ बढ़ता है। यह एक अस्थायी समाधान है जो भविष्य में नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
पनगढ़िया ने ईंधन कीमतों पर क्या रुख अपनाया?
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों का प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर धीरे-धीरे होना चाहिए और सरकार को कृत्रिम रूप से कीमतें दबाए नहीं रखनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'सरकार किसी भी उत्पाद की निश्चित कीमत की गारंटी देने के लिए नहीं है।'
PM मोदी की विदेशी मुद्रा खर्च कम करने की अपील पर पनगढ़िया का क्या कहना है?
पनगढ़िया ने PM मोदी की नागरिकों से विवेकाधीन विदेशी मुद्रा खर्च घटाने की अपील का समर्थन किया। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अनिवार्य प्रतिबंध लगाना प्रतिकूल साबित हो सकता है और ऐसे कदमों से बचना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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