रुपया लगातार दूसरे सत्र में मज़बूत, डॉलर के मुकाबले 63 पैसे उछलकर 95.73 पर बंद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रुपया शुक्रवार, 22 मई को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेज़ी के साथ बंद हुआ — अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 63 पैसे की बढ़त दर्ज करते हुए 95.73 के स्तर पर। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सक्रिय हस्तक्षेप, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी ने मिलकर घरेलू मुद्रा को सहारा दिया।
कारोबारी सत्र का घटनाक्रम
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में रुपया 96.30 प्रति डॉलर पर खुला और दिनभर मज़बूती की राह पर रहा। सत्र के दौरान यह 95.30 के उच्च स्तर तक पहुँचा और 95.68 के निचले स्तर को छूने के बाद अंततः 95.73 पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को, रुपया अपने रिकॉर्ड निचले बंद स्तर से 50 पैसे की रिकवरी के साथ 96.36 पर बंद हुआ था।
RBI हस्तक्षेप और विश्लेषकों की राय
एक बाज़ार विश्लेषक के अनुसार, 'यह सुधार मुख्य रूप से RBI की सक्रिय दखलअंदाज़ी के कारण हुआ है। RBI ने USD/INR बाय-सेल स्वैप की घोषणा की थी। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से आयातित कमोडिटी की कीमतों में नरमी आई है।' फॉरेक्स बाज़ार के जानकारों ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उस टिप्पणी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान से जुड़े मुद्दे पर कूटनीतिक प्रयास सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वैश्विक संकेतों का असर
रुबियो के बयान से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में संभावित व्यवधान को लेकर चिंताएँ कम हुईं, जिससे रुपये समेत उभरते बाज़ारों की मुद्राओं को राहत मिली। अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड में गिरावट ने भी घरेलू मुद्रा को अतिरिक्त समर्थन दिया। यह ऐसे समय में आया है जब डॉलर इंडेक्स वैश्विक स्तर पर दबाव में है।
शेयर बाज़ार की स्थिति
रुपये की मज़बूती के साथ-साथ घरेलू शेयर बाज़ार भी हरे निशान में बंद हुए। BSE सेंसेक्स 231.99 अंक की बढ़त के साथ 75,415.35 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 64.60 अंक चढ़कर 23,719.30 पर पहुँचा।
आगे क्या उम्मीद
हालाँकि, बाज़ार विश्लेषकों ने सावधान किया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम अब भी रुपये के लिए बड़ा जोखिम बने हुए हैं। एक विश्लेषक ने कहा, 'निकट अवधि में रुपये का रुख सकारात्मक बना हुआ है और यह 95.00 से 95.90 के दायरे में रह सकता है। RBI का हस्तक्षेप बाज़ार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने में अहम भूमिका निभा रहा है।'