मध्य पूर्व में तनाव के कारण रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 के पार

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मध्य पूर्व में तनाव के कारण रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 के पार

सारांश

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 93.12 पर पहुंच गया, जो कि एक नया रिकॉर्ड है। इस घटनाक्रम का मध्य पूर्व के तनाव से गहरा संबंध है। जानिए इस स्थिति का बाजार पर क्या असर हो सकता है।

मुख्य बातें

रुपया पहली बार 93.12 पर पहुंचा।
मध्य पूर्व में तनाव का असर।
शेयर बाजार में तेजी के संकेत।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी।

मुंबई, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93.12 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह पहली बार है जब अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले घरेलू मुद्रा ने 93 के स्तर को पार किया है।

डॉलर के मुकाबले रुपया 0.55 प्रतिशत गिरकर 93.12 पर स्थिर हो गया है। बुधवार को यह 92.63 पर बंद हुआ था।

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका, इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है, जिससे यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले लगभग 2 प्रतिशत लुढ़क चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपया 92.8 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है, जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक जोखिम से बचने के रुझान का संकेत है।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि 93.00 से ऊपर की बढ़त से तेजी का रुझान मजबूत हो सकता है। यहां 93.20-93.40 रुकावट के स्तर और 92.70 तथा 92.50-92.40 सपोर्ट लेवल हैं।

हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 900 अंक से अधिक या लगभग 1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि निफ्टी लगभग 300 अंक या 1.35 प्रतिशत उछला है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से बिकवाली जारी है। एक्सचेंज के अनुसार, गुरुवार को एफआईआई ने 7,558.19 करोड़ रुपए की इक्विटी निकाली थी।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.65 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.20 प्रतिशत की कमी के साथ 107.3 डॉलर प्रति बैरल पर था।

तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयान के बाद आई है, जिन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक कीमतों को कम करने के लिए वाशिंगटन ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है।

हाल की गिरावट के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के 21वें दिन में प्रवेश करते हुए, ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 2 मार्च77.74 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 19 मार्च108.65 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे महंगाई में भी वृद्धि हो सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुपया डॉलर के मुकाबले क्यों गिर रहा है?
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है।
क्या यह स्थिति लंबे समय तक चलेगी?
यह स्थिति वैश्विक बाजार और भू-राजनीतिक तनाव पर निर्भर करती है।
क्या कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी?
हालांकि हाल में गिरावट देखी गई है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव के चलते यह अस्थिर रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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