मध्य पूर्व के तनाव, रुपए की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें: शेयर बाजार का रुख कैसे प्रभावित करेंगी?
सारांश
Key Takeaways
- मध्य पूर्व का तनाव और कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार को प्रभावित करेंगी।
- डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
- एफआईआई और डीआईआई के निवेश से बाजार का रुख तय होगा।
- शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना है।
- विश्लेषकों की नजरें कच्चे तेल की कीमतों पर रहेंगी।
मुंबई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार के लिए अगले हफ्ते की घटनाएँ बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली हैं। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें इन सबका असर बाजार के रुख पर पड़ेगा।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इस दौरान तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दी है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की संभावना है।
मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर स्थिर हैं। पिछले हफ्ते में ब्रेंट क्रूड का मूल्य (डॉलर में) 8.77 प्रतिशत और एक महीने में 57.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की निगाहें रहेंगी।
इसके अतिरिक्त, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति भी शेयर बाजार के रुख को प्रभावित करेगी। पिछले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड स्तर पर 93.71 पर पहुंच गया था।
पिछले हफ्ते, एफआईआई ने शेयर बाजार में लगभग 29,718.9 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) द्वारा 30,642 करोड़ रुपए का मजबूत निवेश गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित करने में सहायक रहा।
16-20 मार्च के बीच भारतीय शेयर बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। फिर भी, सेंसेक्स 74,523.96 और निफ्टी 23,114.50 पर बंद हुआ।
सूचकांकों में डिफेंस, एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जिनमें क्रमशः 2.41 प्रतिशत, 1.91 प्रतिशत और 1.89 प्रतिशत की कमी आई। इसके विपरीत, ऑटो और मेटल शेयरों ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई और सप्ताह के दौरान क्रमशः 2.15 प्रतिशत और 1.06 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।