रुपये में तेजी का संकेत: डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ
सारांश
Key Takeaways
- रुपया ने डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ शुरुआत की।
- मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत हैं।
- कच्चे तेल की कीमतें रुपया की स्थिति को प्रभावित कर रही हैं।
नई दिल्ली, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया ने मजबूती के साथ शुरुआत की है। इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में तनाव में कमी के संकेत मिलना है।
वर्तमान में, रुपया 93.64 पर कारोबार कर रहा है, जबकि पिछले सत्र में यह 93.98 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गया था।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले को अगले पांच दिनों के लिए स्थगित करने से तनाव में कमी आई है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि बाजार ने इस विराम का स्वागत किया है, लेकिन वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। यदि आगे तनाव में और कमी आती है, तो रुपया और मजबूत हो सकता है।
सोमवार को मध्य पूर्व में तनाव के बढ़ने के कारण रुपया में 0.37 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। भारत की कच्चे तेल की शुद्ध आयातक स्थिति के कारण आयात बिल में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जिससे रुपया में गिरावट को बढ़ावा मिल रहा है।
विश्लेषक यह भी मानते हैं कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं, जिससे विकास के अनुमानों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और रुपया पर दबाव बढ़ सकता है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, मैक्रो आउटलुक अभी भी नाजुक है। जब तक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की कीमतें ऊंची रहेंगी, रुपया की कमजोरी बनी रह सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में रुपया 93.25-94.25 के कमजोर दायरे में रहने की संभावना है। जब तक तनाव कम होने का कोई मजबूत कारण नहीं मिलता, तब तक बाजार का रुख नकारात्मक बना रहेगा।
ट्रंप के बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में "बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत" हुई है, निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। वाशिंगटन ने ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी सैन्य हमले को पांच दिनों के लिए स्थगित कर दिया है।
हालांकि, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहमद-बघर गालिबफ ने ट्रंप के बयान का खंडन करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह उछाल भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी को दर्शाता है, लेकिन इस तेजी की स्थिरता वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल के रुझानों पर निर्भर करेगी।