मध्य पूर्व में दबाव के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया नए रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंचा

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मध्य पूर्व में दबाव के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया नए रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंचा

सारांश

रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 92.634 के नए ऑल टाइम लो पर पहुंच गया। जानिए, इस गिरावट का कारण क्या है और भविष्य में रुपये का क्या होगा।

मुख्य बातें

रुपया ने डॉलर के मुकाबले 92.634 पर पहुँचकर नया रिकॉर्ड बनाया।
मध्य पूर्व में संघर्ष का असर भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से आयात लागत बढ़ रही है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत फैसला महत्वपूर्ण होगा।
रुपया निकट भविष्य में 92.25-92.95 के दायरे में रहने की संभावना है।

मुंबई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को पहली बार 92.50 के स्तर को पार करते हुए नए ऑल टाइम लो 92.634 पर पहुँच गया।

यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जब रुपया ने डॉलर के मुकाबले इस स्तर को छुआ है। इससे पहले अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपए का ऑल टाइम लो 92.4750 था।

सत्र के दौरान, रुपया 3 पैसे की गिरावट के साथ 92.402 पर खुला था। दिनभर में इसकी गिरावट बढ़ती गई और यह 92.634 पर पहुँच गया। रुपया ने दिन के दौरान 92.334 का न्यूनतम स्तर और 92.643 का उच्चतम स्तर भी छुआ।

रुपए में कमजोरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष बताया जा रहा है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है, जबकि भारत अपनी आवश्यकताओं का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से रुपया पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की तेज वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि आयात बिल में लगातार वृद्धि के कारण रुपया 92.60 के नीचे गिर गया है, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में माल ढुलाई में जारी व्यवधान के कारण भारत के लिए आयात लागत में लगातार वृद्धि की चिंता बढ़ रही है।

उन्होंने आगे कहा कि व्यापक आर्थिक परिदृश्य प्रतिकूल बना हुआ है, और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना है, जिससे रुपया पर दबाव बना रहेगा। बाजार के भागीदार अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आज के नीतिगत फैसले पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो डॉलर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और परिणामस्वरूप रुपये के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करेगा।

निकट भविष्य में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुपया डॉलर के मुकाबले क्यों गिर रहा है?
रुपया की गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व में संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं।
रुपया का ऑल टाइम लो क्या है?
रुपया का नवीनतम ऑल टाइम लो 92.634 है, जो बुधवार को दर्ज किया गया।
कच्चे तेल की कीमतों का रुपया पर क्या असर है?
कच्चे तेल की ऊँची कीमतें भारतीय आयात लागत को बढ़ाती हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है।
क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर पड़ेगा?
हाँ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत फैसला डॉलर की दिशा और रुपया के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करेगा।
भविष्य में रुपया कितना गिर सकता है?
निकट भविष्य में, रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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