डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे मजबूत हुआ, ट्रंप के सीजफायर निर्णय के बाद तेल की कीमतों में गिरावट

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डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे मजबूत हुआ, ट्रंप के सीजफायर निर्णय के बाद तेल की कीमतों में गिरावट

सारांश

भारतीय रुपया बुधवार को 40 पैसे मजबूत हुआ, जो ट्रंप के सीजफायर फैसले और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का परिणाम है। यह वैश्विक बाजारों में राहत का संकेत भी है। जानिए इस बाजार परिवर्तन का असर और आगे की संभावनाएँ।

Key Takeaways

  • रुपया 40 पैसे मजबूत हुआ है।
  • अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा।
  • कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
  • आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा है।
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रुपया बुधवार को लगातार चौथे सत्र में मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 40 पैसे की वृद्धि दर्ज की। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) के फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और वैश्विक बाजारों में आई राहत के चलते देखने को मिली।

इस दौरान, रुपया 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर 92.61 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर 93 से बेहतर है।

यह उछाल उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अस्थायी सीजफायर का ऐलान किया, जिससे भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ। इस प्रस्ताव में दो सप्ताह तक संघर्ष रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की बात कही गई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की और बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं, जबकि कुछ समय पहले ही उन्होंने कड़े बयान दिए थे।

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है।

कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड करीब 16 प्रतिशत यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 20 प्रतिशत यानी 21.90 डॉलर टूटकर 91.05 डॉलर पर पहुंच गया।

सीजफायर की घोषणा ने कई हफ्तों से चल रही बाजार की अनिश्चितता के बीच निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक वापस लौटाया है।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी कितनी टिकेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सीजफायर कितनी मजबूती से लागू होता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होती है या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने इस सीजफायर को अस्थायी रूप से स्वीकार किया है, लेकिन इसके उल्लंघन की आशंका बनी हुई है, क्योंकि इजरायल के हमले जारी हैं, जिससे जवाबी कार्रवाई हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्तर पर रुपया आयातकों के लिए अनुकूल है, जबकि विदेशी निवेशक अभी भी भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं।

इसके अलावा, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7 प्रतिशत उछलकर 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। वहीं एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव (5 मई) 6 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 2,46,376 रुपए प्रति किलो के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

Point of View

सीजफायर की स्थिरता पर सवाल अभी भी बरकरार हैं।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

रुपया क्यों मजबूत हुआ?
रुपया ट्रंप के सीजफायर के कारण और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण मजबूत हुआ।
सीजफायर का अर्थ क्या है?
सीजफायर का मतलब है युद्धविराम, जहां सेनाएँ लड़ाई रोकती हैं।
क्या यह तेजी स्थायी है?
विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी सीजफायर की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
तेल की कीमतों में गिरावट का कारण क्या है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ट्रंप के सीजफायर फैसले का परिणाम है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने क्या किया?
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है।
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