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डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर, रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 96.31 पर खुला

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डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर, रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 96.31 पर खुला

सारांश

तीन सत्रों की गिरावट के बाद रुपए ने पलटवार किया — डॉलर इंडेक्स के एक महीने के निचले स्तर पर आने और अमेरिकी महंगाई के कमजोर आंकड़ों ने फेड की दर वृद्धि की उम्मीदें घटाईं। लेकिन ईरान तनाव से कच्चे तेल में उछाल ने रुपए की बढ़त को 4 पैसे तक सीमित रखा।

मुख्य बातें

भारतीय रुपया शुक्रवार, 17 जुलाई को 4 पैसे की बढ़त के साथ 96.31 प्रति डॉलर पर खुला।
पिछले सत्र में रुपया 96.35 पर बंद हुआ था; लगातार तीन सत्रों की गिरावट का सिलसिला टूटा।
डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर, 100.7 के आसपास; कमजोर अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से फेड दर वृद्धि की संभावना घटी।
ब्रेंट क्रूड 1.48% उछलकर 85.48 डॉलर/बैरल ; WTI 1.60% चढ़कर 80 डॉलर/बैरल — अमेरिका-ईरान तनाव से तेजी।
निक्केई 4%+ , हैंग सेंग ~2% , शंघाई कंपोजिट 1%+ गिरे; एशियाई बाजारों में व्यापक कमजोरी।
भू-राजनीतिक तनाव से सोने में तेजी, चांदी में गिरावट।

भारतीय रुपया शुक्रवार, 17 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे की बढ़त के साथ 96.31 पर खुला, जिससे लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। यह तेजी डॉलर इंडेक्स के एक महीने के निचले स्तर पर फिसलने की पृष्ठभूमि में आई है।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 4 पैसे की रिकवरी दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स — जो अमेरिकी मुद्रा की छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले स्थिति को मापता है — 100.7 के आसपास बना हुआ है, लेकिन इसमें और गिरावट की संभावना बढ़ गई है।

फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का असर

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में अपेक्षा से कमजोर महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। बाजार ने जुलाई में दर वृद्धि की संभावना लगभग खारिज कर दी है। हालांकि, सितंबर की बैठक को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, क्योंकि निवेशक भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े महंगाई के जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।

कच्चे तेल और भू-राजनीतिक दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं, जिससे रुपए की बढ़त सीमित रही। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.48% की तेजी के साथ 85.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.60% चढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा। भारत एक बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है, इसलिए तेल की ऊँची कीमतें रुपए पर दबाव बनाए रखती हैं।

एशियाई बाजारों में कमजोरी

एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक बिकवाली का दबाव रहा। जापान का निक्केई सूचकांक 4% से अधिक लुढ़क गया, हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2% गिरा, और चीन का शंघाई कंपोजिट 1% से अधिक नीचे कारोबार करता दिखा। इस वैश्विक कमजोरी ने घरेलू बाजार की धारणा पर भी असर डाला।

सोने-चांदी पर असर

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की माँग बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखी गई। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। आगे चलकर डॉलर इंडेक्स की दिशा और फेडरल रिजर्व की अगली बैठक के संकेत रुपए की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर मिली-जुली है — डॉलर की कमजोरी एकतरफा कारण नहीं है, बल्कि फेड नीति की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम एक साथ काम कर रहे हैं। ईरान तनाव से कच्चे तेल में उछाल भारत के लिए दोहरी मार है: आयात बिल बढ़ता है और करंट अकाउंट घाटे पर दबाव आता है, जो रुपए को लंबे समय तक कमजोर रख सकता है। सितंबर की फेड बैठक तक यह अनिश्चितता बाजार को अस्थिर रखेगी, और तब तक रुपए की हर बढ़त को 'टिकाऊ' मानना जल्दबाजी होगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 जुलाई को भारतीय रुपया कितने पर खुला?
17 जुलाई को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे की मजबूती के साथ 96.31 पर खुला। पिछले सत्र में यह 96.35 पर बंद हुआ था।
रुपए में आज तेजी क्यों आई?
अमेरिका में अपेक्षा से कमजोर महंगाई के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कमजोर पड़ी, जिससे डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर आ गया। इसी के चलते रुपए को समर्थन मिला।
डॉलर इंडेक्स आज कहाँ है और इसका रुपए पर क्या असर है?
डॉलर इंडेक्स 100.7 के आसपास बना हुआ है और एक महीने के निचले स्तर पर फिसला है। जब डॉलर इंडेक्स गिरता है, तो रुपया समेत उभरती बाजार मुद्राओं को मजबूती मिलती है।
कच्चे तेल की कीमतों ने रुपए की बढ़त को कैसे सीमित किया?
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 1.48% उछलकर 85.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। भारत एक बड़ा तेल आयातक है, इसलिए ऊँची तेल कीमतें डॉलर की माँग बढ़ाती हैं और रुपए पर दबाव बनाए रखती हैं।
एशियाई बाजारों में आज क्या हुआ?
एशियाई बाजारों में व्यापक कमजोरी रही — जापान का निक्केई 4% से अधिक, हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2%, और चीन का शंघाई कंपोजिट 1% से अधिक गिरा। इस वैश्विक कमजोरी ने घरेलू बाजार की धारणा को भी प्रभावित किया।
राष्ट्र प्रेस
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