बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज: हंसिका लांबा को सिल्वर, रजत रुहल ने जीता ब्रॉन्ज — भारत के 5 पदक
सारांश
मुख्य बातें
भारत की हंसिका लांबा ने 17 जुलाई 2026 को बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज में महिलाओं के 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की नतालिया क्लीवचुत्स्का से 0-5 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। 19 वर्षीय इस पहलवान ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन स्वर्ण पदक उनसे छिटक गया।
हंसिका का अभियान: क्वार्टर से फाइनल तक
हंसिका ने अपने अभियान की शुरुआत क्वार्टर फाइनल में तुर्की की तुबा डेमिर को 8-4 से हराकर की। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने जर्मनी की अनास्तासिया ब्लेवास के खिलाफ 2-7 से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी की — लगातार चार टेकडाउन के दम पर 10-7 से जीत दर्ज करते हुए फाइनल में जगह बनाई। गौरतलब है कि हंसिका इस वर्ष एशियन चैंपियनशिप और उलानबटार ओपन में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं, जो उनके निरंतर अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को रेखांकित करता है।
प्रियांशी प्रजापत का सफर
महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग में प्रियांशी प्रजापत ने पहले दौर में पैन-अमेरिकन चैंपियन अमेरिका की केटी गोमेज को 'फॉल' के जरिए हराकर सबको चौंका दिया। गोमेज ने शुरुआत में बढ़त बनाई, लेकिन प्रियांशी ने पैरों पर हमला करते हुए उन्हें पिन कर दिया। क्वार्टर फाइनल में चीन की फेंग जिकि — जो पेरिस ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडल विजेता हैं — ने तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर प्रियांशी को हराया। फेंग के फाइनल में पहुँचने के बाद प्रियांशी को रेपचेज का मौका मिला, लेकिन ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में इक्वाडोर की जैकलीन मोलोकाना ने उन्हें 4-2 से हराकर पोडियम तक पहुँचने से रोक दिया।
रजत रुहल का ब्रॉन्ज
पुरुषों के 125 किलोग्राम वर्ग में रजत रुहल ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। क्वार्टर फाइनल में पोलैंड के कामिल कोसिओलेक से हार के बाद रजत ने रेपचेज में वापसी की और साउथ कोरिया के ग्वानुक किम को 8-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जगह बनाई। ब्रॉन्ज मेडल मैच में अमेरिका के मेसन पैरिस ने चोट के कारण हटने का फैसला किया, जिससे रजत को वॉकओवर से पदक मिला। इसी वर्ग में दूसरे भारतीय पहलवान दिनेश धनखड़ क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गए।
अन्य भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन
पुनीत कुमार (92 किग्रा) और ओलंपियन दीपक पूनिया (97 किग्रा) अपने-अपने वर्ग में शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए। इससे पहले, पेरिस ओलंपिक मेडलिस्ट अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि दीपक (61 किग्रा) और विशाल कालीरमाना (65 किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए। इन सभी पदकों के साथ बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज में भारत की कुल पदक संख्या 5 हो गई है।
आगे की राह
यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारतीय कुश्ती संघ अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हंसिका लांबा जैसी युवा प्रतिभाओं का लगातार पोडियम तक पहुँचना आगामी विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक चक्र के लिए शुभ संकेत है।