शत्रुघ्न सिन्हा का केंद्र पर प्रहार: 'जेन-जी सड़क पर आई तो सरकार खामोश, पहले सांसदों की खरीद-बिक्री चल रही थी'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने 2 अगस्त को आसनसोल में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश की युवा पीढ़ी — विशेषकर जेन-जी — के सड़कों पर उतरने के बाद सत्ताधारी पार्टी बोलती बंद हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले सरकार ने विपक्षी सांसदों की 'खरीद-बिक्री की दुकान' खोल रखी थी।
संसद और सांसदों पर सीधा आरोप
सिन्हा ने कहा, 'हमारी युवा पीढ़ी, हमारे छात्र और जेन-जी इस तरह आगे आए कि ऐसा लगा मानो वे पूरी तरह खामोश हो गए हों। संसद एक मिनट के लिए भी नहीं चल रही है।' उन्होंने आगे कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने सांसदों को तोड़ने की 'बहुत कोशिश' की थी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र व्यवधानों की भेंट चढ़ रहा है और युवाओं के विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय चर्चा में हैं।
दलबदल पर तीखी टिप्पणी
TMC छोड़कर अन्य दलों में शामिल होने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए सिन्हा ने कहा, 'जो लोग अचानक दूसरी तरफ चले गए हैं, वे देश की सेवा या मातृभूमि की सेवा करने के लिए वहाँ नहीं गए। ऐसा नहीं है कि उन्हें अचानक एहसास हुआ कि वे वहाँ देश की बेहतर सेवा कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि इन नेताओं की नीयत 'सोचने वाली बात है।'
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना में हुए विभाजन का हवाला देते हुए सिन्हा ने इसे एक व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ भी ऐसा ही हुआ।'
TMC के बागी नेता और NCP प्रसंग
TMC के एक बागी सांसद के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल होने पर सिन्हा ने कहा, 'मेरी निजी राय में आपके साथ कितने लोग हैं, यह उतना मायने नहीं रखता। जो लोग आपका समर्थन कर रहे हैं, वे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि बागियों का 21 तारीख के 'शहीद दिवस' से पहले जाना ही बेहतर रहा — 'अगर वे बाद में जाते, तो स्थिति और भी मुश्किल होती।'
ममता बनर्जी के प्रति वफादारी पर जोर
सिन्हा ने ममता बनर्जी के साथ बने रहने वाले नेताओं की तारीफ करते हुए कहा कि 'जो अभी दीदी के साथ हैं, वे बहुत अच्छे लोग हैं। जो टिके हुए हैं, वे जबरदस्त हैं।' बागियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, 'सभी दीदी के बनाए हुए लोग हैं। वे दीदी का गुणगान और अभिषेक बनर्जी की जय-जयकार करते थे। उसके बाद वही लोग अचानक अभिषेक बनर्जी पर ठीकरा फोड़कर पार्टी छोड़ गए।'
उन्होंने बागियों के बारे में कहा, 'क्या वे पैसे या डर के लालच में गए? कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।' यह टिप्पणी TMC के भीतर चल रहे असंतोष और दलबदल की राजनीति पर सार्वजनिक बहस को और तेज़ कर सकती है।