अरुणाचल राज्यपाल का प्रस्ताव: 100 दिन हर रविवार 'नशा मुक्त स्ट्रीट शो', युवाओं को जोड़ने की मुहिम
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने 3 अगस्त 2025 को प्रस्ताव रखा कि राज्य में नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए अगले 100 दिनों तक प्रत्येक रविवार को पूरे अरुणाचल प्रदेश में 'नशा मुक्त स्ट्रीट शो' आयोजित किए जाएँ। इस पहल का केंद्रीय उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को नशा-विरोधी मुहिम से सक्रिय रूप से जोड़ना है।
राष्ट्रीय अभियान से जुड़ा अरुणाचल
राज्यपाल परनाइक ने ईटानगर स्थित लोक भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के उद्घाटन कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 100 हफ्तों का राष्ट्रव्यापी जन-भागीदारी अभियान आरंभ किया और देश भर के 10,000 से अधिक स्थानों से जुड़े 1 करोड़ से ज़्यादा युवाओं को संबोधित किया। अरुणाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थान और युवा केंद्र भी इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का हिस्सा बने। कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दोहराते हुए नशा-मुक्त और स्वस्थ भारत निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया।
ज़मीनी स्तर पर 'पहचान-सलाह-रोकथाम-कौशल' का मॉडल
वर्चुअल बातचीत के बाद राज्यपाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जन-आधारित नशा-विरोधी अभियान की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने गाँव बुराहों (ग्राम प्रमुखों), सामुदायिक बुजुर्गों और पंचायत नेताओं से आह्वान किया कि वे नशे की चपेट में आ सकने वाले युवाओं की शीघ्र पहचान करें, प्रभावित परिवारों को परामर्श दें और गाँव स्तर पर नशे की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएँ। सर्कल स्तर पर स्वयं सहायता समूहों (SHG) को पुनर्वास और रिकवरी कार्यों में शामिल करने का सुझाव भी दिया गया।
नशे से उबरे युवा बनेंगे 'एंटी ड्रग्स एंबेसडर'
राज्यपाल परनाइक ने एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए कहा कि जो युवा नशे की लत से बाहर निकल चुके हैं, उन्हें 'ADA — एंटी ड्रग्स एंबेसडर' के रूप में नियुक्त किया जाए ताकि वे अपने अनुभव से दूसरों को प्रेरणा और मार्गदर्शन दे सकें। उन्होंने पश्चिम कामेंग जिले के रूपा में आयोजित 'रूपा फुटबॉल लीग — इंडिपेंडेंस कप' का उल्लेख किया, जो 'नशे को न कहो, फुटबॉल को हाँ कहो' की थीम पर आधारित था। उन्होंने कहा कि कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियाँ और खेलों में सक्रिय भागीदारी नशे की रोकथाम के सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
तकनीक और कड़े कानून से तस्करी पर लगाम
राज्यपाल ने नशे की तस्करी के नेटवर्क और मार्गों की पहचान के लिए तकनीक और खुफिया निगरानी के व्यापक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे से जुड़े अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य नशे की तस्करी की गंभीर चुनौती से जूझ रहे हैं और केंद्र सरकार भी इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर अभियान तेज़ कर रही है। आगे की कार्ययोजना राज्य प्रशासन के साथ समन्वय में तैयार की जाएगी।