अरुणाचल प्रदेश में MSME क्रांति: राज्यपाल केटी परनाइक ने युवाओं और महिलाओं के लिए रोज़गार का रोडमैप पेश किया

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अरुणाचल प्रदेश में MSME क्रांति: राज्यपाल केटी परनाइक ने युवाओं और महिलाओं के लिए रोज़गार का रोडमैप पेश किया

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने नई दिल्ली में ईशान इंटरनेशनल के साथ बैठक में MSME को राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने का सबसे कारगर ज़रिया बताया — बाँस उत्पाद से लेकर जैविक खेती तक, पलायन रोकने से लेकर महिला सशक्तिकरण तक।

मुख्य बातें

राज्यपाल केटी परनाइक ने 19 मई 2026 को नई दिल्ली में MSME क्षेत्र को अरुणाचल के सामाजिक-आर्थिक विकास की रीढ़ बताया।
ईशान इंटरनेशनल के MD-CEO शांतनु श्रीवास्तव के साथ हुई बातचीत में उद्यमिता और स्थानीय उद्यम विकास पर ज़ोर दिया गया।
फूड प्रोसेसिंग, बाँस-बेंत उत्पाद, हथकरघा, पर्यावरण पर्यटन, जैविक कृषि और हर्बल उत्पाद को प्रमुख अवसर क्षेत्र बताया गया।
MSME से महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और SHG के लिए स्थायी रोज़गार और शहरी पलायन में कमी की उम्मीद जताई गई।
बुनियादी ढाँचा, वित्तीय सहायता, कौशल विकास, बाज़ार संपर्क और डिजिटल पहुँच को विकास की पाँच अनिवार्य शर्तें बताया गया।

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने मंगलवार, 19 मई 2026 को नई दिल्ली में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को पूर्वोत्तर राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए इसे व्यापक रूप से सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सही नीतिगत समर्थन मिले तो MSME क्षेत्र युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और किसानों के लिए स्थायी आजीविका का सबसे भरोसेमंद स्रोत बन सकता है।

बातचीत का संदर्भ और मुख्य संदेश

यह बातचीत ईशान इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शांतनु श्रीवास्तव के साथ हुई — जो देशभर में MSME सशक्तिकरण के लिए राज्य और केंद्र सरकारों के साथ रणनीतिक साझेदारी का नेतृत्व करते हैं। इटानगर स्थित लोक भवन के अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि अरुणाचल प्रदेश में MSME की वृद्धि न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

राज्यपाल परनाइक ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि MSME आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने, बेरोज़गारी घटाने और रोज़गार की तलाश में युवाओं के शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

अरुणाचल की अपार संभावनाएँ

राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पूँजी को रेखांकित किया। उनके अनुसार राज्य के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, आदिवासी शिल्पकला, जैविक खेती की क्षमता, वन उत्पाद, पर्यटन संभावनाएँ और अनूठी सांस्कृतिक विरासत उद्यमिता और स्थानीय उद्यम विकास के लिए असाधारण अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से इन क्षेत्रों की संभावनाओं को उजागर किया: फूड प्रोसेसिंग, बाँस एवं बेंत उत्पाद, हथकरघा और हस्तशिल्प, पर्यावरण पर्यटन, बागवानी, हर्बल उत्पाद, जैविक कृषि और लघु विनिर्माण। यह सभी क्षेत्र राज्य की स्थानीय पहचान से जुड़े हैं और इनमें वैश्विक बाज़ार तक पहुँचने की क्षमता है।

महिलाएँ, युवा और स्वयं सहायता समूह — प्राथमिकता में

राज्यपाल परनाइक ने समावेशी विकास पर विशेष बल दिया। उनका मानना है कि MSME क्षेत्र महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और कारीगरों को न केवल रोज़गार दे सकता है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना सकता है। साथ ही, यह क्षेत्र पारंपरिक कौशल और स्वदेशी ज्ञान को संरक्षित करने में भी सहायक हो सकता है — जो अन्यथा आधुनिकीकरण की आँधी में विलुप्त होने का ख़तरा झेल रहे हैं।

विकास के लिए ज़रूरी शर्तें

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि MSME की यह संभावना तभी साकार होगी जब राज्य में बेहतर बुनियादी ढाँचा, वित्तीय सहायता, कौशल विकास, बाज़ार संपर्क और डिजिटल पहुँच सुनिश्चित की जाए। उनके अनुसार इन पाँच स्तंभों पर ध्यान केंद्रित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया जा सकता है और 'आत्मनिर्भर अरुणाचल' तथा 'विकसित भारत' की परिकल्पना को ज़मीन पर उतारा जा सकता है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर भारत में निवेश और उद्यमिता को गति देने के लिए कई नई पहलें चला रही है। आने वाले महीनों में ईशान इंटरनेशनल और राज्य सरकार के बीच संभावित सहयोग की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर में MSME की असली बाधाएँ — कनेक्टिविटी की कमी, सीमित बाज़ार पहुँच और वित्त तक पहुँच — वर्षों से अनसुलझी हैं। महज़ आह्वान और बैठकों से ज़मीन पर बदलाव नहीं आता; ज़रूरत है ठोस बजटीय प्रतिबद्धता और समयबद्ध क्रियान्वयन की। गौरतलब है कि अरुणाचल में MSME पंजीकरण दर राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है, और बाँस-हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों की क्षमता दशकों से 'संभावना' बनकर ही रह गई है। जब तक नीतिगत घोषणाएँ मापने योग्य रोज़गार परिणामों से नहीं जुड़तीं, यह संवाद भी उन्हीं इरादों की फ़ेहरिस्त में जुड़ जाएगा जो कागज़ पर तो चमकते हैं, ज़मीन पर नहीं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यपाल केटी परनाइक ने MSME को लेकर क्या कहा?
राज्यपाल केटी परनाइक ने कहा कि MSME क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन का मज़बूत स्तंभ बन सकता है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने पर ज़ोर दिया।
अरुणाचल प्रदेश में MSME के लिए कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक संभावनाशील हैं?
राज्यपाल परनाइक ने फूड प्रोसेसिंग, बाँस एवं बेंत उत्पाद, हथकरघा, हस्तशिल्प, पर्यावरण पर्यटन, बागवानी, हर्बल उत्पाद, जैविक कृषि और लघु विनिर्माण को सबसे अधिक संभावनाशील क्षेत्र बताया। ये सभी राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हैं।
ईशान इंटरनेशनल और अरुणाचल प्रदेश के बीच क्या संबंध है?
ईशान इंटरनेशनल देशभर में MSME सशक्तिकरण के लिए राज्य और केंद्र सरकारों के साथ रणनीतिक साझेदारी का नेतृत्व करती है। इसके MD-CEO शांतनु श्रीवास्तव के साथ राज्यपाल परनाइक की यह बैठक नई दिल्ली में 19 मई 2026 को हुई।
MSME से अरुणाचल में पलायन कैसे रुकेगा?
राज्यपाल के अनुसार, MSME स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर पैदा कर युवाओं को शहरों की ओर जाने से रोक सकता है। बेहतर बुनियादी ढाँचा, कौशल विकास और डिजिटल पहुँच इस बदलाव की बुनियादी शर्तें हैं।
MSME विकास के लिए राज्यपाल ने किन शर्तों पर ज़ोर दिया?
राज्यपाल परनाइक ने पाँच प्रमुख शर्तें गिनाईं — बेहतर बुनियादी ढाँचा, वित्तीय सहायता, कौशल विकास, बाज़ार संपर्क और डिजिटल पहुँच। उनका कहना था कि इन पाँचों के बिना MSME की वास्तविक क्षमता साकार नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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