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सैनिक विद्यालय राष्ट्र निर्माण के स्तंभ: अरुणाचल राज्यपाल केटी परनाइक का मानेकशॉ सेंटर में संबोधन

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सैनिक विद्यालय राष्ट्र निर्माण के स्तंभ: अरुणाचल राज्यपाल केटी परनाइक का मानेकशॉ सेंटर में संबोधन

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने मानेकशॉ सेंटर में सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इन संस्थानों को राष्ट्र निर्माण का स्तंभ बताया। सेना प्रमुख सहित कई शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति ने इस विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

मुख्य बातें

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया।
सम्मेलन में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी सहित कई शीर्ष पूर्व छात्र उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में प्रदर्शित साहस को सैनिक विद्यालयों की शिक्षा का प्रतिफल बताया।
सैनिक विद्यालय रीवा की स्थापना 1962 में हुई थी और यह छह दशकों से सशस्त्र बलों व सिविल सेवाओं को नेतृत्व प्रदान कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य में सैनिक विद्यालय महत्वपूर्ण संस्थान बने रहेंगे।

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि इन संस्थानों ने देशभर में अनुशासित, देशभक्त और सेवाभावी युवाओं की पीढ़ियाँ तैयार करके राष्ट्र निर्माण में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उनके इस संबोधन ने सैनिक विद्यालयों की शैक्षिक और सामाजिक विरासत को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।

सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस वार्षिक सम्मेलन में देश के कई शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जो स्वयं सैनिक विद्यालय रीवा के पूर्व छात्र हैं। इनमें थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी, लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत चौहान (सेवानिवृत्त) और वायु मार्शल पीके रॉय (सेवानिवृत्त) सहित अन्य विशिष्ट पूर्व छात्र शामिल थे। इन नामों की उपस्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सैनिक विद्यालयों ने देश को कितने सक्षम नेतृत्वकर्ता दिए हैं।

राज्यपाल का संबोधन: मुख्य बिंदु

राज्यपाल परनाइक ने अपने संबोधन में कहा कि सैनिक विद्यालयों में चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय भावना पर दिया जाने वाला जोर, जिम्मेदार नागरिकों को गढ़ने में सहायक रहा है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने निरंतर ऐसे अधिकारी, प्रशासक, पेशेवर और लोक सेवक तैयार किए हैं जिन्होंने भारत के विकास और सुरक्षा में अमूल्य योगदान दिया है।

राज्यपाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने जो साहस और व्यावसायिकता प्रदर्शित की, वह उसी समर्पण, तत्परता और देशभक्ति की भावना को दर्शाती है जिसे सैनिक विद्यालय जैसे संस्थान युवा मनों में विकसित करना चाहते हैं।

सैनिक विद्यालय रीवा की विरासत

सैनिक विद्यालय रीवा की स्थापना 1962 में हुई थी। छह दशकों से अधिक की इस यात्रा में इस संस्थान ने सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, खेल और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पूर्व छात्रों की एक लंबी सूची तैयार की है। गौरतलब है कि देशभर में फैले सैनिक विद्यालयों का यह नेटवर्क रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होता है और इनका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसी संस्थाओं के लिए युवाओं को तैयार करना है।

विकसित भारत और सैनिक विद्यालयों की भूमिका

राज्यपाल परनाइक ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, अनुशासित नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता की भावना से लैस युवा पीढ़ी का निर्माण और भी अनिवार्य हो जाता है। उनके अनुसार, सैनिक विद्यालय इस राष्ट्रीय आकांक्षा को साकार करने में महत्वपूर्ण संस्थान बने रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार नई सैनिक विद्यालयों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनकी पहुँच अभी भी सीमित क्यों है — देशभर में इनकी संख्या मात्र 33 के आसपास है, जबकि माँग कहीं अधिक है। 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदर्भ देकर इन संस्थानों को समसामयिक राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श से जोड़ना एक सुविचारित संदेश है, परंतु विस्तार की ठोस नीति के बिना यह प्रशंसा केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। शीर्ष पूर्व छात्रों की उपस्थिति संस्थान की गुणवत्ता का प्रमाण है, किंतु सामाजिक-आर्थिक विविधता और ग्रामीण पहुँच के मोर्चे पर इन विद्यालयों का प्रदर्शन अभी भी पर्याप्त चर्चा का विषय नहीं बना है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैनिक विद्यालयों का राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान है?
सैनिक विद्यालय अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय भावना पर केंद्रित शिक्षा देकर सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं और सार्वजनिक जीवन के लिए सक्षम नागरिक तैयार करते हैं। इनके पूर्व छात्रों में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल हैं।
सैनिक विद्यालय रीवा की स्थापना कब हुई और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सैनिक विद्यालय रीवा की स्थापना 1962 में हुई थी। छह दशकों में इसने सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं और खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अनेक पूर्व छात्र तैयार किए हैं, जो इसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित सैनिक विद्यालयों में से एक बनाता है।
मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन में कौन-कौन उपस्थित थे?
24 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित इस सम्मेलन में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी, लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत चौहान (सेवानिवृत्त) और वायु मार्शल पीके रॉय (सेवानिवृत्त) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राज्यपाल केटी परनाइक ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख क्यों किया?
राज्यपाल परनाइक ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित साहस और व्यावसायिकता को सैनिक विद्यालयों की शिक्षा-दीक्षा का प्रतिफल बताया। उन्होंने इसे इन संस्थानों में विकसित की जाने वाली देशभक्ति और तत्परता की भावना का जीवंत उदाहरण माना।
'विकसित भारत' के लक्ष्य में सैनिक विद्यालयों की क्या भूमिका होगी?
राज्यपाल परनाइक के अनुसार, 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए अनुशासित नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता की भावना से लैस युवा पीढ़ी अनिवार्य है। सैनिक विद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण संस्थान बने रहेंगे क्योंकि वे न केवल सैन्य बल्कि नागरिक नेतृत्व भी तैयार करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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