सैनिक विद्यालय राष्ट्र निर्माण के स्तंभ: अरुणाचल राज्यपाल केटी परनाइक का मानेकशॉ सेंटर में संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि इन संस्थानों ने देशभर में अनुशासित, देशभक्त और सेवाभावी युवाओं की पीढ़ियाँ तैयार करके राष्ट्र निर्माण में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उनके इस संबोधन ने सैनिक विद्यालयों की शैक्षिक और सामाजिक विरासत को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।
सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस वार्षिक सम्मेलन में देश के कई शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जो स्वयं सैनिक विद्यालय रीवा के पूर्व छात्र हैं। इनमें थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी, लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत चौहान (सेवानिवृत्त) और वायु मार्शल पीके रॉय (सेवानिवृत्त) सहित अन्य विशिष्ट पूर्व छात्र शामिल थे। इन नामों की उपस्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सैनिक विद्यालयों ने देश को कितने सक्षम नेतृत्वकर्ता दिए हैं।
राज्यपाल का संबोधन: मुख्य बिंदु
राज्यपाल परनाइक ने अपने संबोधन में कहा कि सैनिक विद्यालयों में चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय भावना पर दिया जाने वाला जोर, जिम्मेदार नागरिकों को गढ़ने में सहायक रहा है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने निरंतर ऐसे अधिकारी, प्रशासक, पेशेवर और लोक सेवक तैयार किए हैं जिन्होंने भारत के विकास और सुरक्षा में अमूल्य योगदान दिया है।
राज्यपाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने जो साहस और व्यावसायिकता प्रदर्शित की, वह उसी समर्पण, तत्परता और देशभक्ति की भावना को दर्शाती है जिसे सैनिक विद्यालय जैसे संस्थान युवा मनों में विकसित करना चाहते हैं।
सैनिक विद्यालय रीवा की विरासत
सैनिक विद्यालय रीवा की स्थापना 1962 में हुई थी। छह दशकों से अधिक की इस यात्रा में इस संस्थान ने सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, खेल और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पूर्व छात्रों की एक लंबी सूची तैयार की है। गौरतलब है कि देशभर में फैले सैनिक विद्यालयों का यह नेटवर्क रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होता है और इनका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसी संस्थाओं के लिए युवाओं को तैयार करना है।
विकसित भारत और सैनिक विद्यालयों की भूमिका
राज्यपाल परनाइक ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, अनुशासित नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता की भावना से लैस युवा पीढ़ी का निर्माण और भी अनिवार्य हो जाता है। उनके अनुसार, सैनिक विद्यालय इस राष्ट्रीय आकांक्षा को साकार करने में महत्वपूर्ण संस्थान बने रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार नई सैनिक विद्यालयों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है।