रुपया ओवरवैल्यूड नहीं, अंडरवैल्यूड हो सकता है: RBI गवर्नर मल्होत्रा; रेपो रेट 5.50% पर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि भारतीय रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है — बल्कि कई मानक संकेतक यह दर्शाते हैं कि यह अंडरवैल्यूड भी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय बाज़ार अल्पावधि में अक्सर तर्कसंगत व्यवहार नहीं करते।
रुपए के मूल्यांकन पर RBI का रुख
मल्होत्रा ने कहा, "कई अनुमानों के अनुसार, जिनमें रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) भी शामिल है, रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि संभव है कि यह अंडरवैल्यूड हो।" यह बयान उन्होंने उस पृष्ठभूमि में दिया जब बाज़ार में यह सवाल उठाया जा रहा था कि भारत की मज़बूत पूंजी आकर्षित करने की क्षमता के बावजूद निवेशक रुपए में आगे भी कमज़ोरी की आशंका क्यों जता रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि "केवल लंबी अवधि में बाज़ार किसी मुद्रा का सही मूल्य निर्धारित कर पाते हैं।" आलोचकों का कहना है कि हेजिंग पैटर्न और मुद्रा अनुमानों के आधार पर कई विश्लेषक अभी भी रुपए के दबाव में रहने की संभावना जता रहे हैं।
रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी
यह बयान उस MPC समीक्षा के तुरंत बाद आया जिसमें RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर उसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2026 की नीति समीक्षा केंद्रीय बैंक की लगातार चौथी ऐसी बैठक थी जिसमें दरें और नीति रुख दोनों अपरिवर्तित रखे गए थे — जून, अप्रैल और फरवरी 2026 की बैठकों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ था। इससे पहले दिसंबर 2025 में RBI ने 25 आधार अंकों की कटौती कर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत किया था।
अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम में इंटरऑपरेबिलिटी
RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC AA) प्रणाली में इंटरऑपरेबिलिटी लागू करने की भी घोषणा की। इस व्यवस्था के तहत किसी भी लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर ऐप में पंजीकृत ग्राहक अपने वित्तीय डेटा को नेटवर्क पर मौजूद किसी भी विनियमित वित्तीय संस्था के साथ साझा कर सकेंगे, चाहे संबंधित बैंक, ऋणदाता या वेल्थ मैनेजर किसी भी प्लेटफॉर्म का उपयोग करता हो।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इससे डीमैट खाताधारकों को अपनी डीमैट होल्डिंग्स और बैंक जमा खातों की जानकारी एक ही स्थान पर कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) के रूप में देखने में सुविधा होगी। इन व्यवस्थाओं को 31 दिसंबर 2026 तक लागू किए जाने की योजना है।
वित्तीय बाज़ार के लिए तकनीकी सलाहकार समिति
RBI ने फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए एक टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी गठित करने की भी घोषणा की। यह समिति मुद्रा बाज़ार, सरकारी प्रतिभूति बाज़ार, विदेशी मुद्रा बाज़ार और उनसे जुड़े डेरिवेटिव बाज़ारों से संबंधित नीतिगत एवं परिचालन विषयों पर बाज़ार सहभागियों के साथ संरचित संवाद का मंच प्रदान करेगी। समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र की अलग से घोषणा की जाएगी।
अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम का बढ़ता दायरा
RBI के अनुसार, भारत का अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम वित्त वर्ष 2025 26 में लगभग ₹3.82 लाख करोड़ के ऋण वितरण को सुगम बनाने में सहायक रहा। इस अवधि में इसके माध्यम से 3.68 करोड़ ऋण वितरित किए गए, और यह मूल्य के आधार पर भारत के खुदरा और MSME ऋण बाज़ार का लगभग 8.4 प्रतिशत तथा संख्या के आधार पर 11.8 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है।
आगे आने वाले महीनों में इंटरऑपरेबिलिटी लागू होने के बाद इस इकोसिस्टम का और विस्तार होने की उम्मीद है, जो भारत के डिजिटल वित्त ढाँचे को और मज़बूत करेगा।