RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का ऐलान: रेपो रेट 5.50% पर, ब्याज दर कटौती फिलहाल संभव नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का कोई विकल्प नहीं है। तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने अपना नीतिगत रुख बदलते हुए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी संतुलित सख्ती की नीति अपनाने का फैसला किया।
मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव
मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर तथा बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर लगाम कसने को प्राथमिकता दे रहा है।
आगे क्या हो सकता है — दरें बढ़ेंगी या यथास्थिति रहेगी
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आगामी नीतिगत कार्रवाई के रूप में या तो रेपो रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है, या मौजूदा स्तर पर यथास्थिति बनाए रखी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दरों में कटौती फिलहाल विकल्पों की सूची में शामिल नहीं है।
उनके अनुसार, ब्याज दर वृद्धि चक्र की अवधि और सीमा वृद्धि एवं महंगाई के वास्तविक आँकड़ों, अंतर्निहित मुद्रास्फीति की स्थिति, मूल्य दबावों के विस्तार और आपूर्ति झटकों के प्रभाव पर निर्भर करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी मुद्रास्फीति से निपटने के लिए कड़े रुख अपना रहे हैं।
मुद्रास्फीति का अनुमान और आर्थिक तस्वीर
RBI को उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में औसत CPI मुद्रास्फीति लगभग 5.8 प्रतिशत रहेगी। चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति करीब 4.94 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। गौरतलब है कि RBI का मध्यम अवधि का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत है, ऐसे में 5.8 प्रतिशत का अनुमान इस लक्ष्य से काफी ऊपर है।
अर्थव्यवस्था की मज़बूती के संकेत
मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी हुई है। निजी खपत में स्थिरता बरकरार है और विवेकाधीन खर्च से इसे समर्थन मिल रहा है। स्थायी निवेश भी कई आर्थिक संकेतकों के आधार पर सकारात्मक दिशा में है।
दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग PMI और सर्विसेज PMI दोनों विस्तार क्षेत्र में बने रहे, जिससे आर्थिक गतिविधियों की निरंतर मज़बूती का संकेत मिलता है। सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ भी घरेलू और वैश्विक माँग के बल पर सुदृढ़ बनी हैं।
कमज़ोरी के क्षेत्र और आगे की राह
हालाँकि गवर्नर ने यह भी स्वीकार किया कि गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और घरेलू हवाई यात्री यातायात जैसे कुछ क्षेत्रों में कमज़ोरी के संकेत मिले हैं। यह संकेत देता है कि ऊँची ब्याज दरों का असर उपभोक्ता माँग के कुछ हिस्सों पर पड़ने लगा है।
आने वाले महीनों में RBI की नीतिगत दिशा मुख्यत: मुद्रास्फीति के आँकड़ों, खाद्य कीमतों की स्थिति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर रहेगी।