भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $682.2 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर, RBI गवर्नर मल्होत्रा बोले — अर्थव्यवस्था मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून 2026 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद घोषणा की कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार $682.2 अरब डॉलर के अत्यंत मज़बूत स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह भंडार वैश्विक आर्थिक झटकों के विरुद्ध भारत की सुरक्षा कवच का काम करता है और देश की वित्तीय स्थिरता को रेखांकित करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार की मज़बूती
मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम है। साथ ही, यह देश के बाह्य ऋण का 89 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करता है। उनके शब्दों में, "भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.2 अरब डॉलर के बेहद मज़बूत स्तर पर है। यह भंडार पर्याप्तता के मानक मापदंडों के अनुसार पर्याप्त है, जिसमें लगभग 11 महीने का आयात कवर और 89 प्रतिशत से अधिक का बाह्य ऋण कवर शामिल है।"
गौरतलब है कि यह आँकड़ा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी व्यापार नीति की अनिश्चितताओं ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के भंडार पर दबाव बनाया हुआ है।
विनिमय दर नीति पर RBI का रुख
विनिमय दर को लेकर गवर्नर मल्होत्रा ने साफ़ किया कि RBI रुपये के किसी विशेष स्तर या सीमा को लक्ष्य नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि विनिमय दर को बाज़ार की शक्तियों के अनुसार तय होने दिया जाता है। हालाँकि, बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और सट्टेबाज़ी के दबावों के कारण जब बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव उत्पन्न होता है, तो केंद्रीय बैंक का उद्देश्य उस अस्थिरता को नियंत्रित करना होता है — न कि बाज़ार-आधारित बदलावों को रोकना।
विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के उपाय
RBI ने विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने के लिए दो महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की। पहला, फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत अब 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल किया जाएगा। इससे पहले केवल 10 वर्ष तक की अवधि वाली प्रतिभूतियाँ ही इस व्यवस्था में आती थीं।
दूसरा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा लिए जाने वाले बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को प्रोत्साहित करने के लिए 13 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। माना जा रहा है कि इससे कंपनियों को कम लागत पर विदेशी पूँजी जुटाने में मदद मिलेगी।
ब्याज दरें अपरिवर्तित, तटस्थ रुख बरकरार
व्यापक बाज़ार अनुमान के अनुरूप, RBI ने ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखते हुए तटस्थ रुख बनाए रखा। यह निर्णय घरेलू विकास और मांग में केंद्रीय बैंक के विश्वास को दर्शाता है। साथ ही, RBI ने स्वीकार किया कि वैश्विक अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं और भविष्य की नीतिगत कार्रवाई के लिए इन पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति
मल्होत्रा ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर दुनिया भर के बाज़ारों पर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव भारत की विकास दर और महंगाई के अनुमान पर भी दिखता है। इसके बावजूद, उनके अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मज़बूत स्थिति में बनी हुई है। RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी उपलब्ध नियामकीय और बाज़ार-आधारित साधनों का उपयोग करने को तैयार है।