रुपया 32 पैसे मजबूत होकर 94.85 पर पहुँचा, RBI के विदेशी मुद्रा उपायों और कच्चे तेल में गिरावट का असर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रुपया गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 32 पैसे की बढ़त के साथ 94.85 के स्तर पर पहुँच गया। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े हालिया कदमों, डॉलर की वैश्विक कमज़ोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने मिलकर रुपए की इस मज़बूती को बल दिया।
कारोबार का हाल
घरेलू मुद्रा ने सत्र की शुरुआत 94.91 के स्तर से की और जल्द ही 94.85 पर आ गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 19 पैसे की मज़बूती के साथ 95.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। यानी दो सत्रों में रुपए ने कुल 51 पैसे की बढ़त हासिल कर ली है।
करेंसी विश्लेषकों के अनुसार, रुपया अब 95.50–95.00 के ट्रेडिंग दायरे से निर्णायक रूप से बाहर निकल चुका है। अगला अहम स्तर 94.80 के आसपास बताया जा रहा है — यदि रुपया इससे नीचे टिकता है, तो आगे और मज़बूती की गुंजाइश बन सकती है।
RBI के संरचनात्मक हस्तक्षेप
रुपए को सबसे बड़ा समर्थन RBI के उन कदमों से मिला है, जो केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत में उठाए। बैंकों को निर्देश दिया गया कि 20 लाख डॉलर से अधिक की किसी भी डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का आरक्षित निधि बनाए रखें।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स कारोबार पर भी नियम कड़े किए गए। RBI ने स्पष्ट किया कि अधिकृत डीलर किसी भी ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध — जिसमें भारतीय रुपया शामिल हो, चाहे वह डिलीवरेबल हो या नॉन-डिलीवरेबल — को एक बार रद्द होने के बाद दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं देंगे। इन उपायों का मकसद रुपए के खिलाफ सट्टेबाजी को सीमित करना बताया गया है।
वैश्विक संकेत और कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 2 प्रतिशत गिरकर 104.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल में यह नरमी भारत जैसे तेल-आयातक देश के लिए अनुकूल है, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों की डॉलर-माँग घटती है, जो रुपए पर दबाव कम करती है।
प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स गिरकर 101.99 पर आ गया। यह वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमज़ोरी का संकेत है, जो उभरते बाज़ारों की मुद्राओं — रुपए समेत — को राहत देता है।
शेयर बाज़ार पर असर
मुद्रा बाज़ार की सकारात्मकता का असर घरेलू शेयर बाज़ार पर भी दिखा। BSE सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 73,836.71 पर कारोबार करता नज़र आया, जबकि NSE निफ्टी 300 अंकों की तेज़ी के साथ 22,929.55 के स्तर पर पहुँच गया — दोनों सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई।
आगे क्या होगा
करेंसी विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक रुपया डॉलर के मुकाबले 95.60 से 97.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है, और अधिकांश पूर्वानुमान 96 से 97 प्रति डॉलर के आसपास केंद्रित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दिशा और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुद्रा बाज़ारों पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। आने वाले सत्रों में तेल की कीमतों की दिशा और डॉलर इंडेक्स की चाल रुपए की मज़बूती को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।