रुपया 95.76 प्रति डॉलर पर खुला, RBI के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों से मिली मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाज़ार में सट्टेबाज़ी पर लगाम कसने के लिए उठाए गए कड़े नियामकीय कदमों के बाद सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 प्रतिशत से अधिक मज़बूत होकर 95.76 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। यह उछाल ऑफशोर और ऑनशोर — दोनों बाज़ारों में दर्ज की गई, और इसे 2013 के 'टेपर टैंट्रम' के बाद RBI के सबसे मज़बूत हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
रुपए में उछाल का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, एक महीने के नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाज़ार में रुपया एक समय 94.17 प्रति डॉलर तक पहुँच गया, जो लगभग 2.7 प्रतिशत की बढ़त थी। बाद में इसमें कुछ नरमी आई और बढ़त घटकर 0.7 प्रतिशत के आसपास रह गई। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आए जब रुपया 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब जा पहुँचा था।
RBI ने क्या नए नियम लागू किए
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन पर कई अहम नियामकीय बदलाव किए। इसके तहत बिना हेजिंग वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई — यानी एक बड़ी कटौती।
इसके अलावा RBI ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व (FERR) नामक नई व्यवस्था भी लागू की। इसके अंतर्गत 20 लाख डॉलर से अधिक मूल्य वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए अधिकृत डीलरों को अनुबंध मूल्य के रुपए समतुल्य का 20 प्रतिशत नकद रिज़र्व RBI के पास बनाए रखना होगा — और यह रिज़र्व अनुबंध समाप्त होने तक प्रतिदिन बनाए रखना अनिवार्य होगा।
अधिकृत डीलरों पर नई बाध्यताएँ
नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर किसी भी ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं देंगे, जो भारतीय रुपए से संबंधित हो और पहले रद्द किया जा चुका हो। हालाँकि अनुबंध की अवधि पूरी होने पर उसके रोलओवर की अनुमति जारी रहेगी।
RBI ने यह भी अनिवार्य किया है कि विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करने वाले ग्राहकों से लिखित घोषणा ली जाए, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि जिस मूल जोखिम के लिए हेजिंग की जा रही है, उसके खिलाफ किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ पहले से हेजिंग नहीं की गई है। यदि कोई उपयोगकर्ता कई लेनदेन के ज़रिए नियमों को दरकिनार करने की कोशिश करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
तेल कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था
शनिवार, 11 अक्टूबर को RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की डॉलर ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने सहित कई अन्य कदम भी उठाए। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि भारतीय तेल कंपनियाँ डॉलर की सबसे बड़ी खरीदारों में से एक हैं और उनकी माँग रुपए पर दबाव डालती है।
मौद्रिक नीति का संकेत
पिछले सप्ताह RBI ने रेपो रेट में भी बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि ज़रूरत पड़ने पर आगे और मौद्रिक सख्ती की जा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डॉलर की मज़बूती और उभरते बाज़ारों से पूँजी बहिर्प्रवाह का दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, RBI के इन बहुआयामी कदमों का प्रभाव निकट भविष्य में बाज़ार की स्थिरता पर निर्भर करेगा।